Friday, December 4, 2020

IT की नौकरी के साथ ही वाटर लिली की खेती करते हैं, केवल बीज़ बेचकर 20 हज़ार महीने का कमा रहे हैं: तरीका जाने

कहते हैं शौक बहुत बड़ी चीज होती हैl और यदि किसी का प्रेम पेड़ पौधों और प्रकृति से हो तो फिर और कुछ कहने की बात ही नहीं। आज हम आपको महाराष्ट्र के एक ऐसे जावा से मिलाने वाले हैं जो आईटी सेक्टर को भी ठुकरा कर आज तरह-तरह के फूलों का काम करते हैंl उनका नाम है सोमनाथ प्रदीप पालl

कौन है प्रदीप

प्रदीप महाराष्ट्र के थाने के रहने वाले हैं और शहर के चकाचौंध वाले कंपनियों को छोड़कर गार्डनिंग कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने उसमें अलग-अलग तरीके की वाटर लिली और कमल के फूल को उगाया है। आपको बता दें कि बस कमल के फूल और वाटरलिली तक ही इनका काम सीमित नहीं है बल्कि वह हाइब्रिड किस्में भी तैयार कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना भी चाहते हैं। कमर्शियल सर की बात करें तो यह बल्ब और ट्यूबर तैयार करते हैं और बेचते हैं।

बचपन से रहा गार्डनिंग का शौक

सोमनाथ प्रदीप को हमेशा से हैं गार्डनिंग का बहुत ही ज्यादा शौक रहा है। अभी वह एक आईटी फर्म में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और इसके साथ ही उन्होंने अपने शौक को भी जिंदा रखा है। वह वाटर लिली और कमल के फूल को उगाते हैं और कहते हैं कि गार्डनिंग का सफर या हाइब्रिडाइज्ड जैसे अलग-अलग गाड़ियों के लिए उन्होंने कोई योजना नहीं बनाई थी। समय के साथ सब कुछ होता चला गया l

Somnath pradeep farming

छोटी उम्र से ही पेड़ पौधे लगाते थे

वह बताते हैं कि बचपन से हैं वह पेड़ पौधे लगाने का कोई मौका नहीं कमाते थे। वह किराए के घर में रहते तो थे लेकिन हर बार उन्हें घर बदलना पड़ता था जिसकी वजह से उन्हें पौधों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ता था। जब कभी यह आसान होता तो वह पौधों को ले जाते हैं और कभी-कभी अपने पड़ोसियों में है उसे बाट देते हैं।

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घर बनाने के लिए जमीन लिया लेकिन शुरू कर दिया gardening

हर बार पौधों को एक घर से दूसरे घर तक शिफ्ट करने में बहुत परेशानी होती थी उनका ख्याल रखना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया से वह थक चुके थेl आगे चलकर उन्होंने एक जमीन लेते हैं जिसमें उन्होंने घर बनाने कासपना देखा था लेकिन उन्हें वाटर लिली से इतना प्रेम था कि उन्होंने उस जमीन पर वाटर लिली उगाना शुरू कर दिया।

सोलह 17 साल पहले जाना था वाटर लिली के बारे में

सोमनाथ बताते हैं कि करीबन 16 से 17 साल हो गए जब उन्होंने पहली बार वाटर लिली का नाम सुना था या उसका फोटो देखा था।उसके बाद एक बार उन्हें अपनी बहन के साथ एक नर्सरी में जाने का मौका मिला जहां पर उन्होंने पहली बार वॉटर लिली के पौधे को देखा। वैसे तो पहले से ही उन्हें वह बहुत पसंद आया था लेकिन सामने देखकर उन्होंने उसी वक्त ठान लिया कि अब वह वाटर लिली को एक न एक दिन होगा आएंगे। उस वक्त इतने पैसे नहीं थे कि वह उसे खरीद पाते हैं तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना एक से छत पर ही उगाया जाए।

Waterlili

कई बार हुए असफल लेकिन हार नहीं मानी

सोमनाथ का कहना है कि शुरुआती दिनों में कई बार उन्हें असफलता हाथ लगी लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और प्रयास करते चले गए। जैसे जैसे समय बीता उन्होंने वॉटर लिली के बारे में बहुत सारी चीजें पढ़ी। पेड़ लगाने के साथ-साथ वह वाटर लिली के बीजों को इकट्ठा भी करते थे उस पर एक्सपेरिमेंट भी करते थे। जब उनके पास अच्छी खास है मात्रा में बीज इकट्ठा हो गया तो उन्होंने उसे बेचना शुरू कर दिया। बीजों को बेचने के लिए उन्होंने इबे का सहारा लिया और उन्होंने देखा कि लोग काफी पसंद कर रहे हैं। कुछ महीनों में उन्होंने ₹20000 के बीज को बेच डाले।

धीरे-धीरे मनोबल बड़ा और आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलती गई

जैसे जैसे बीज की बिक्री शुरू हुई और सफलता हासिल हुई वैसे वैसे सोमनाथ के मनोबल को भी काफी प्रोत्साहन मिला। उन्होंने बड़े स्तर पर कमल के फूल और वॉटर लिली को गाना शुरू कर दिया। अभी की बात करें तो पूरे 11000 स्क्वायर फीट की जगह में उन्होंने लगभग 30 किस्म के कमल के फूल और लगभग 110 किस्म के लिली को उगाया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान

इनके इस अद्भुत कार्य के लिए ना ही इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोग इन्हें पहचानने लगे हैं। बस कुछ ही धुन पहले की बात है कि उन्हें इंटरनेशनल वाटर लिली एंड वाटर गार्डन इन सोसाइटी जनरल के जुलाई अंक में उनका नाम अंकित किया गया और उन्हें हाइब्रिडाइज्र बोला गया।

चाहते हैं दुनिया में सबसे बड़ा hybridizor का खिताब पाना

जैसा कि व्यापारिक दृष्टि से सोमनाथ ने अच्छी खासी कमाई शुरू कर दी है इसके साथ ही वह चाहते हैं कि पूरी दुनिया में उन्हें बीजों के लिए जाना जाए। वह कहते हैं कि सीजन आते हैं उन्हें बहुत सारे ऑर्डर्स मिलने लगते हैं लेकिन वह हर किसी को ट्यूबर या बल्ब नहीं भेज पाते हैं।

Waterlili  flower

बाजार की बात करें तो आमतौर पर हमें यह देखते हैं कि ग्राहक के ऊपर ही निर्भर करता है कि वह कौन सी दुकान व्यक्ति विक्रेता के पास जाएगा लेकिन सोमनाथ के केस में यह बिल्कुल उल्टा है। सोमनाथ खुद तय करते हैं कि उन्हें किस इंसान तक चीजों को पहुंचाना है। इसके पीछे का कारण यह है कि वह सबसे पहले यह देखते हैं कि कौन से इंसान पौधों की देखभाल अच्छी तरीके से कर पाएगा। वह नहीं चाहते हैं कि जिस पौधे से वह इतना ज्यादा प्रेम करते हैं और इतना संरक्षण प्रदान करते हैं उसे कोई इंसान घर ले जाकर तहस-नहस कर दें।

घर में लगा सकते हैं आसानी से वाटर ले ले

सोना का कहना है कि वाटर लिली या कमल दोनों ही पौधे थोड़ी गर्म तापमान को ज्यादा पसंद करते हैं। इसके लिए आप ही ने छत पर लगा सकते हैं जहां पर धूप का सीधा आना जाना हो। वाटर लिली की अगर बात करें तो इसे धूप की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। आप ठंडे मौसम में वाटर लिली को नहीं संभाल सकते हैं। यह गर्मी के दिनों में बहुत अच्छे लगते भी और खिलते भी हैं। लिली के बीज के अलावा आप बल्ब इसके फूल पत्तों या ट्यूबर से भी प्रॉपर गेट कर सकते हैं। आपको इसकी अच्छी देखभाल करनी होगी और धीरे-धीरे आपको इस क्षेत्र में अनुभव होता जाएगा। कभी आप असफल हो जाए तो निराश होने की कोई जरूरत नहीं है आप बस अपना काम करते हैं प्रोग्रामl

पौधों को उगाने के तरीके

1- वाटर लिली को गाने के लिए सबसे पहले आपको चाहिए एक छोटा सा गमला कुम्हार वाली मिट्टी या फिर आप सब चिकनी मिट्टी भी ले सकते हैं और एक थोड़ा-थोड़ा गमला या फिर उसकी जगह पर कोई टब का इस्तेमाल कर सकते हैं।

2-आपको यह देखना पड़ेगा कि आप से बर्तन का इस्तेमाल कर रहे हैं उसमें कोई 6 तो नहीं है क्योंकि वॉटर लिली में आप पानी का इस्तेमाल करेंगे इसलिए इसमें कोई ड्रेनेज सिस्टम की जरूरत नहीं

3- जब आप बीज लगाने जाते हैं तो आप इसे कुछ दिन तक पानी में डालकर किसी डब्बे में बंद कर कर रखते हैं। जब यह अंकुरित होने लगे तो आप इन्हें लगाएं इससे फायदा यह है कि आप इसे सीधा लगा सकते
4- मिट्टी को जो गमले में आप रखने जा रहे हैं उसे गीला करते रहें
5- उसके बाद उस मिट्टी में वीज को थोड़ा नीचे दबा दें।
6 अब इसमें थोड़े थोड़े पानी को भरें। ध्यान रहे पानी ज्यादा नहीं होना चाहिए
7- सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि आपको पता होना चाहिए कि गमले को धूप में ही रखे क्योंकि जैसा पहले बताया गया है कि वाटर लिली के पौधों को धूप की सख्त जरूरत होती है।
8- लगभग तीन-चार हफ्ते गुजर जाने के बाद आपको यह देखेगा कि इसमें छोटे-छोटे पत्ते आने लगे हैं।
9- अगर आपको लगता है कि इसमें फूल बहुत जल्दी आ जाएंगे तो आप गलत है क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम ढाई से 3 महीने का समय लग जाता है। इसलिए खुद को संयमित रखें और धैर्य बनाए रखें।

Waterlili farming

ठहरे हुए पानी में ज्यादा पनपते हैं वाटर लिली

सोमनाथ का कहना है कि अगर आप वाटर लिली को अच्छे से पनपना देखना चाहते हैं तो आप इसे ठहरे हुए पानी में ही जगह दें। बहुत ज्यादा पानी को हिलाने से परेशानी हो सकती है और आप पानी को हफ्ते में बदलते रहे। इसमें आप यह भी देखते रहे हैं कि कोई एलजी कि मौजूदगी है या नहींl इसका मौजूद होना आप के पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए सावधानी पढ़ते हैं। पहले ही अपने मिट्टी को इतना पोषण दे दे कि उसे बाद में किसी और चीज की जरूरत ना पड़े।

पौधों में दे ज्यादा स्पेस-

अगर आप एलगी को पौधों से दूर रखना चाहते हैं तो आप इनमें ज्यादा स्पेस डालें क्योंकि जगह के हिसाब से एलगी बनता है। जगह देने का एक और फायदा यह भी है कि आपके जो फूल है वह बड़े-बड़े खेलते हैं इसलिए इन छोटी बातों का ध्यान रखकर अपने पौधों को अच्छा एक माहौल दे सकते हैं।

बल्ब ट्यूबर आदि से कमा लेते हैं अच्छा

सोमनाथ वाटर लिली और कमल के बल और ट्यूबर आदि को बेचकर अच्छा खासा कमा लेते हैं। ऐसा भी होता है कि बिक्री की राशि एक लाख को पार कर जाती है। इस बात को बताने का अर्थ यह नहीं है कि यह सारा काम पैसों के लिए है किया जा रहा है। दरअसल यह शुरू से हैं सोमनाथ का शौक रहा है और वह पूरी इमानदारी से इसे करते हैं।

The Logically की तरफ से सोमनाथ के इस अद्भुत कार्य को सलाम और हम उम्मीद करते हैं की आप भी इस कहानी से बहुत कुछ सीखे होंगे और आप भी अपने सपनों को पंख देने की कोशिश करेंगे।

अंजली
अंजली पटना की रहने वाली हैं जो UPSC की तैयारी कर रही हैं, इसके साथ ही अंजली समाजिक कार्यो से सरोकार रखती हैं। बहुत सारे किताबों को पढ़ने के साथ ही इन्हें प्रेरणादायी लोगों के सफर के बारे में लिखने का शौक है, जिसे वह अपनी कहानी के जरिये जीवंत करती हैं ।

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