Wednesday, August 4, 2021

34 वर्षीय इंजीनयर बिना मिट्टी का करते हैं खेती, सलाना कमा रहे हैं 2 करोड़ रुपये: पढ़ें तरीका

आजकल के इस नये दौर में बहुत सारे लोगों का पेड़-पौधों से लगाव बढ़ता जा रहा है। चाहे वह बच्चे हो, नवयुवक या बुजुर्ग। अगर देखा जाये तो यह बहुत ही अच्छी बात है कि लोगों का पौधे लगाने में मन लग रहा है। पौधे लगाने के बहुत सारे फायदे भी है। इससे हमारा पर्यावरण स्वच्छ रहेगा। हम स्वच्छ हवा में सांस लेंगे। सांस लेने के लिए फ्रेश वायु मिलेगी तो इससे बीमारियां भी कम होगी। पेड़-पौधों से हमारे आस-पास का वातावरण भी खुबसूरत दिखाई देता है और पर्यावरण हरा भरा रहता है।

अब तक हमें यही पता है कि पेड़-पौधों को उगाने के लिये मिट्टी, खाद, पानी की ज़रुरत होती है। हम सब ने मिट्टी की सहायता से ही पेड़-पौधे लगाए है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि मिट्टी का इस्तेमाल किये बिना भी पेड़-पौधें उगाये जा सकतें है। क्या आपने कभी इस बात पर विचार-विमर्श किया हैं कि बिना मिट्टी के भी पेड़-पौधें उगायें जा सकतें हैं? आज हम आपको बग़ैर मिट्टी का इस्तेमाल किये पेड़ उगाने के बारें में बताने जा रहें हैं।

हमारे देश में आजकल टेक्नोलॉज़ी का बहुत ज़्यादा विस्तार हो रहा है। आजकल ऐसी तकनीक आ गयी है जिसकी सहायता से मिट्टी का इस्तेमाल किये बिना पौधों को उगाया जा सकता है। इस तकनीक को “हाइड्रोपोनिक्स” कहा जाता है। हालांकि अभी हमारे देश में इस तकनीक का विस्तार नहीं हुआ है लेकिन हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के विस्तार को पूरे देश में बढ़ाने के लिये देश के युवा श्रीराम गोपाल ने कोशिश कर रहे हैं।

आईये जानतें हैं, उनके और इस तकनीक के बारें में

श्रीराम गोपाल (SreeRam Gopal) चेन्नई (Chennai) के निवासी हैं। इनकी उम्र 34 साल है। श्रीराम ने इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक्स में इंजीनियर से स्नातक की डिग्री हासिल किए हैं। स्नातक करने के बाद वह मार्केटिंग और स्ट्रेटजी से मास्टर्स की उपाधि हासिल करने के लिये कालेडोनियल बिजिनेस स्कूल युनाइटेड किंगडम से पढ़ाई कियें। श्रीराम गोपल के पिताजी का नाम गोपालकृष्णन (Gopalkrishnan) है। श्रीराम के पिताजी का पेरुगडी (Perugandi) में फोटो प्रोसेसिंग और प्रिंटिंग मशीन बनाने का कारखाना था। गोपालकृष्णन की तबियत खराब होने और व्यवसाय में कमी होने के वजह से वर्ष 2007 में कारखाने को बंद करना पड़ा। इनकी बहुत फोटो लैब्स भी थी। श्रीराम गोपाल हाई एन्ड कैमरे के बहुत अधिक शौकीन थे। अपने शौक को पूरा करने के लिये श्रीराम अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद चेन्नई में हाई एण्ड कैमरा रिपेयर की दुकान खोलने के बारें में विचार करने लगे।

5 वर्ष पूर्व श्रीराम गोपल एक IT कम्पनी में कार्यरत थे। तभी उनके एक मित्र ने उनको हाइड्रोपोनिक्स के बारे एक YouTube पर एक विडियो दिखाया। इस विडियो ने श्रीराम को अपने ओर आकर्षित किया और वह इससे बहुत ज़्यादा प्रभावित भी हुयें। श्रीराम का मानना है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल बेहद ज़रूरी हो गया है। हमारे देश में जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी और शहरीकरण के कारण कृषि करने के लिये खेत घटती जा रही है। हमारे देश में बढ़ती जनसंख्या के कारण पानी का भी दुरुपयोग बहुत अधिक हो रहा है जिसके चलतें खेतों की सिंचाई के लिये पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती हैं। “श्रीराम का यह भी कहना है कि, “हमारे देश में खेती और उद्योग दोनों भिन्न-भिन्न कार्यक्षेत्र है। यदि कृषि को भी उद्योग मान लिया जाए तो समय के साथ सफलता पाईं जा सकती है।”

श्रीराम गोपाल (ShreeRam Gopal) ने बिना मिट्टी के पौधे उगाने की जांच शुरु करने के लिए अपने पिता गोपालकृष्णन (Gopalkrishnan) की बंद पड़ी कम्पनी के रूफटॉप का उपयोग किया। इस कार्य को करने में श्रीराम के पिताजी ने इनका पूरा साथ दिया। पेड़-पौधा सबके स्वास्थ के लिये आवश्यक है। हमारे आस-पास पेड़-पौधों के रहने से हमारे स्वास्थ्य में सुधार होता है। श्रीराम के पिताजी के स्वास्थ में भी पेड़-पौधों के वजह से सुधार आने लगा। अपने पिताजी के सेहत में सुधार होते देख कर श्रीराम ने निश्चय किया कि वह इस क्षेत्र में जरुर कुछ बड़ा करने का प्रयास करेंगे। इस क्षेत्र में काम करने के लिये श्रीराम ने केवल हाइड्रोपोनिक्स टेक्नोलाजी से सम्बंधित शिक्षा लेने के लिये हाइड्रोपोनिक्स में काम कर रही विदेशी कम्पनियों से बातचीत की। ताकि उनकी कम्पनियों को वह भारत में रिप्रेजेंट कर सके और इस कम्पनी में खुद से ही निवेश कर सकें। विदेशी कंपनियों से मिले तकनिकी शिक्षा की सहयता से श्रीराम ने स्वयं का 5 लाख रूपया इन्वेस्ट कर एक कम्पनी स्थापित की। उन्होंनें इस कम्पनी का नाम “फ्यूचर फामर्स” रखा। श्रीराम की कोशिश आहिस्ते-आहिस्ते अपना प्रभाव दिखाना शुरु कर दिया और केवल 5 वर्ष में ही उनकी कम्पनी को 2 करोड़ का टर्नओवर हुआ। श्रीराम का कहना हैं कि उनकी कम्पनी 300% दर से प्रतिवर्ष बढ़ते जा रही है। इस कम्पनी का टर्नओवर 2015-16 में 38 लाख रुपये था जबकी साल 2016-17 में 2 करोड़ हो गया था।

इस कम्पनी में 60 नवयुवक अपनी अहम भुमिका निभा रहें हैं। श्रीराम ने इस कम्पनी में अभी तक 2.5 करोड़ रुपये तक का इम्वेस्ट कर चुके हैं। इस कम्पनी में 11 लोगों ने मिलकर 10-15 लाख रुपये का निवेश किया हैं उनकों कोई भी तय राशि नहीं मिलतीं है। वे सभी 12 लोग कम्पनी के शेयर में हिस्सेदार हैं।

श्रीराम गोपाल (ShreeRam Gopal) ने हाइड्रोपोनिक्स के बारें में बताया कि यह एक ऐसा तकनीक है जिसकी सहायता से कोई भी इन्सान अपने फ्लैट और घर में मिट्टी का इस्तेमाल किये बिना पौधें या सब्जियां उगा सकता है। उन्होनें आगे बताया कि पानी में लकड़ी का बुरादा, बालू और कंकड़ो को डाला जाता है। पौधों को हमेशा ज़रुरी पोषक तत्व मिलता रहें, उसके लिये उसमें एक खास तरह का घोल को डाला जाता हैं जिससे पौधों को पोषक मिलता रहें। श्रीराम ने पौधों को ऑक्सीजन (Oxygen) देने के लिये बताया कि पतली नाली और पम्पिंग मशीन का उपयोग किया जा सकता है। इस तकनीक की सहायता से पेड़-पौधों की उपज के लिये साधारण खेतों की फसल के तुलना में लगभग 90% पानी का इस्तेमाल कम होता है। इसमें अलग से कीटनाशकों को डालने की ज़रूरत नहीं पड़ती है तथा इस तकनीक से उपज भी ज्यादा होता है।

ट्रांसपेरेंसिग मार्केट रिसर्च के रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल हाइड्रोपोनिक्स का व्यवसाय वर्ष 2016 में 6,934.6 Million डॉलर था वह आनेवाले साल 2025 तक 12, 106. मिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान हैं। हाइड्रोपोनिक्स की एक कीट की कीमत 999 रुपये से लेकर 69,999 रुपये तक हैं। इसी मूल्य पर कम्पनी अपनी वेबसाइट पर कीट को बचती है। 200 से लेकर 5000 स्क्वायर फीट हाइड्रोपोनिक्स फार्म को बनाने में लगभग कुल लागत 1 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक हैं।

Shree Ram के द्वारा इस नयी तकनीक की शुरुआत करने से प्राकृतिक स्रोतों के लिये बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। हमारे देश में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का विस्तार करने के लिये The Logically श्रीराम गोपाल को हृदय से सलाम करता हैं।