Sunday, December 5, 2021

स्तंभेश्वर मंदिर: बाबा भोलेनाथ का ऐसा मंदिर जो दिन में दो बार समुद्र में हो जाता है लुप्त !

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपने चमत्कारों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यह मंदिर गुजरात के कावी- कवोई गांव में अरब सागर के तट पर स्थित है। स्तंभेश्वर महादेव मंदिर 150 वर्ष पुराना मंदिर है। और इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की ऊंचाई 4 फिट है और यह दो फीट के व्यास का है।

Astembheswar  Mandir में भगवान शिव की आराधना होती है। यह मंदिर दिन में दो बार सुबह और शाम को दर्शन देने के बाद समुद्र में लुप्त हो जाती है। इस दृश्य को देखने हेतु शिव भक्त बेहद उत्सुकता से चले आते हैं। स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में हर महाशिवरात्रि और अमावस्या को एक विशेष मेला लगता है। स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव जी को और इस चमत्कार मंदिर को दर्शन करने के लिए श्रद्धालु लोग देश-विदेश से हजारों की भीड़ में आते हैं। और भगवान शिव की पूजा- अर्चना करते हैं।

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यह मंदिर हिन्दुओं का एक पवित्र धार्मिक स्थल है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव जी के पुत्र कार्तिकेय ने किया था। स्तंभेश्वर महादेव मंदिर प्रतिदिन दिन में दो बार लुप्त हो जाते हैं। दिन में दो बार समुद्र के जल स्तर बढ़ने के कारण यह मंदिर समुद्र में डूब जाता है। और फिर कुछ देर के बाद जब समुद्र का जल स्तर घटता है तो मंदिर पुनः दिखाई देने लगता है। जब समुद्र में ज्वार-भाटा आता है तो समुद्र का पानी मंदिर के अंदर तक आ जाता है। और भगवान शिव के शिवलिंग को अभिषेक कर वापस लौट जाता है।

Astembheswar  Mandir मंदिर में एक विशेष तरह का नियम है। जिसमे श्रद्धालुओं को विशेष तरह की पर्ची दिए जाते हैं उस पर्ची में ज्वार के आने का समय लिखा रहता है। जिससे श्रद्धालुओं को कोई परेशानी ना हो और इस चमत्कारी मंदिर को सुविधा पूर्वक दर्शन कर सकें।

यह मंदिर गुजरात के बढोदरा से लगभग 40 किलोमीटर दूर जंबसूर में स्थित है। यहाँ भक्त सड़क मार्ग , रेल मार्ग और हवाई मार्ग से पहुँच सकते हैं। यह बाबा भोलेनाथ के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

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