Success story of becoming an IAS officer Srushti Deshmukh

हर कैंडिडेट अपनी रणनीति के हिसाब से यूपीएससी UPSC की तैयारी करता है, जिसमें कुछ तो सफल होते हैं परंतु कुछ को असफलता का भी सामना करना पड़ता है। आज हम एक ऐसी ही आईएएस IAS ऑफिसर सृष्टि देशमुख (Srishti Deshmukh) की बात करेंगे, जो अपनी कामयाबी का राज मेडिटेशन को मानती हैं। सृष्टि ने अपनी शुरुआती पढ़ाई भोपाल से की है।

बचपन से था आईएएस बनने का सपना

सृष्टि शुरू से पढ़ने में बहुत अच्छी थीं और वह बचपन से ही यूपीएससी की तैयारी करना चाहती थी परंतु उस समय उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। धीरे-धीरे वह पढ़ाई में उलझती चली गई, जिससे यूपीएससी कहीं पीछे छुट गया। सृष्टि ने ग्रेजुएशन के बाद इंजीनियरिंग करने का फैसला किया परंतु उनका सपना आईएएस IAS बनने का था, जिसे वह छोड़ना नहीं चाहती थीं।

Success story of becoming an IAS officer Srushti Deshmukh

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अपने सपने को किया पूरा

सृष्टि ने जब अपने परिवार वालों को यूपीएससी के सपने के बारे में बताया, तो उनके परिवारवालों ने उनका पूरा साथ दिया। उसके बाद सृष्टि यूपीएससी की तैयारियों में जुट गई। सृष्टि देशमुख (Srishti Deshmukh) ऑल ओवर इंडिया में पांचवें स्थान के साथ यूपीएससी UPSC की परीक्षा क्लियर कर आईएएस IAS अफसर बनी। सृष्टि को लिखित परीक्षा में 895 अंक प्राप्त हुए। वही उनके पर्सनैलिटी के लिए उन्हें 173 अंक मिले, जिससे वह यूपीएससी की परीक्षा में 1068 अंकों के साथ सफल हुई।

Success story of becoming an IAS officer Srushti Deshmukh

सृष्टि देती हैं अन्य कैंडिडेट्स को सलाह

सृष्टि अन्य कैंडिडेट्स को सलाह देती हैं कि इस दौरान पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी है। यह जरूरी नहीं कि आप कितने घंटे पढ़ते हैं बल्कि जरूरी यह है कि आप उन घंटों में कैसे पढ़ते हैं? हर किसी की मेंटल लेवल एक समान नहीं होती इसलिए अपनी रणनीति खुद तैयार करें। साथ ही इस दौरान फ्रेश रहना भी बहुत जरूरी है। ऐसी रणनीति ना बनाएं जिसमें एक दिन 10 घंटे पढे और दूसरे दिन बिल्कुल ही ना पढ़े। आप अपने अनुसार अपनी रणनीति तैयार करें जिससे आप फॉलो कर सकें।

सृष्टि देशमुख (Srishti Deshmukh) मानती हैं कि वह योगा और मेडिटेशन के जरिए ही दो विषयों को एक बार पढ़ पाती थी। साथ ही सृष्टि यह भी कहती हैं कि इस दौरान अपने आत्मविश्वास को कम ना होने दें।

बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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