Sunday, September 19, 2021

मुम्बई की शहरी नौकरी छोड़कर गांव में बस गए, ख़ुद खाद बनाते हैं और उसी से ऑर्गेनिक फसल उगाकर अच्छा पैसा कमा रहे हैं

मुम्बई को सपनों की नगरी कहा जाता है। यहां हर कोई सपना संजोय उसे पूरा करने की चाहत लिए आता है। लेकिन कुछ ऐसे भी व्यक्ति हैं जो शहरों की चकाचौंध से दूर शांति में अपना जीवन बसर करना चाहते हैं। लेकिन मुम्बई जैसी नगरी को छोड़कर कहीं और जाना थोड़ा मुश्किल लगता है। सुमित भोंसले 28 साल तक मुम्बई के निवासी रहें है और 6 वर्षों से अब गांव में खेती और मवेशिपालन कर रहें हैं।

मिलिए भारत के कोंकण से सुमित भोंसले से

Sumit Bhosle शहरी व्यक्ति हैं जो किसान बन खेती कर रहे हैं। ऐसे बहुत कम लोग मिलेंगे जो अपने जीवन के पहले 28 साल मुंबई जैसे शहर में बिताए और अब पिछले 6 सालों से एक गाँव में बेहतर और खुशहाल जीवन शैली का आनंद ले रहे हैं।

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प्रेरणादायक जीवन

Sumit जहां रहते हैं, उस इलाके को कोंकण (Konkan) कहा जाता है। यहां की जैव-विविधता और जीवन-जीने और उसे आनंदमय बनाने का तरीका बहुत प्रेरणादायक है। इनके परिवेश में प्रकृति की प्रचुरता और निहित सादगी है। जो सभी को अच्छी लगती है। यह इलाका देख मन करता है कि यहां से कहीं और जाये ही ना।

सुमित भारत (India) के महाराष्ट्र (Maharastra) राज्य के तलवाडे (Talavade) नामक गाँव में रहते हैं जो गोवा (Gova) के बहुत करीब हैं। सुमित खुद को भाग्यशाली समझते है कि वह लगभ 14 एकड़ की जमीन में धान, फल, पत्तेदार सब्जियां, देशी सब्जियां और स्थानीय विदेशी फल जैसे आम और जामुन उगाते हैं। यह विभिन्न प्रकार के फसलों का उत्पादन करते है कि वह आश्चर्यजनक लगता है। इनकी खेती देख हर किसी का मन होगा कि वह भी ऐसी आश्चर्यजनक खेती करें।

बनाते हैं खुद खाद

प्रकृति हमेशा एक सुंदर तरीके से काम करती है। प्रकृति की हर चीज़ मन मोह लेती है। अब यह हमारे ऊपर निर्भर है कि हम क्या खाएं जिससे हमारा स्वास्थ्य न बिगड़े और क्या खाएं जिससे स्वास्थ्य का संतुलन बना रहे। सुमित अपने खेत में जानवरों और अपने लिए भोजन उगाते हैं। एक बात जो वह बताते हैं कि वह वहां कुछ भी नहीं जलाते हैं जिससे मिट्टी या वायु प्रदूषित हो। खेत में पैदा होने वाले सभी जैव पदार्थ, पत्ते, टहनियाँ, फसल अवशेष, चारा अपव्यय, सब कुछ खाद बनाकर वापस मिट्टी में डाल देते हैं ताकि मिट्टी की उपज बनी रहें।

सुमित बताते है कि उनका सौभाग्य है कि वह  ग्रामीण क्षेत्र के निवासी है और स्वदेशी चीज़ों के महत्व को जानते हैं। इसलिए वह अपने सभी बीजों को स्थानीय क्षेत्र से ही प्राप्त करते हैं। केवल इस वर्ष ही उन्होंने साथी किसानों के साथ अपनी उपज के कुछ बीज और पौधे साझा करना शुरू कियें और इससे उन्हें बहुत प्रसन्नता मिली है।

जब खेती की बात होती है तो मुझे किसी भी परेशानियों का सामना करना अच्छा लगता है। यदि बदलते जलवायु पैटर्न के साथ कोई समस्या है, तो इसका समाधान कृषि योजना है। लेकिन एक बात मुझे परेशान करती है जो है प्रत्येक व्यावसायीकरण जो बड़े पैमाने पर उत्पादन का जरिया है। हम सभी को यह समझने की जरूरत है कि जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है सभी चीजें सूक्ष्म प्रबंधन में निहित होता जा रहा है। औद्योगिक पैमाने के साथ हर चीज में अधिक परेशानी है।

मनुष्य के लिए सबसे बड़ा इनाम सृजन की संतुष्टि है। एक व्यक्ति खेती में बहुत प्रयास करता है। जब वह फसल काटता है तो बस यही उम्मीद रखता है कि उसके सभी कार्यों की तृप्ति हो। जो भी है प्रकृति को हमें अर्पित करना है क्योंकि वह हमें सब अर्पित कर देंगे। आप जितना बोयेंगे उतना ही काटना है आपको।

मुम्बई की जिंदगी छोड़ खेती और मवेशिपालन करना यह सभी के लिए प्रेरणा है। The Logically , Sumit Bhosle की खेती करने और जीवनशैली को सलाम करता है।