Saturday, July 31, 2021

तालाबों और चेकडैमों के निर्माण से जल-क्रांति लाने वाले “पानी बाबा” की कहानी

“जल हीं जीवन है” आज के परिवेश में जब जल की बर्बादी और भूमिगत जल के स्रोतों के खात्मे से पूरे देश में पीने के पानी की गहरी समस्या आ चुकी है ऐसे में इस कथन की महत्ता को समझकर हर संभव उपाय अविलम्ब करने की आवश्यकता है ! जल संरक्षण के क्षेत्र में अतुल्य कार्य करने वाले एक ऐसे हीं नायक झारखंड के सिमोन उरांव हैं ! आईए जानते हैं उनके और उनके किए कार्यों के बारे में…

राँची के बेरो प्रखंड के रहने वाले सिमोन उरांव जल संरक्षण हेतु दृढ संकल्पित थे ! वे जल संरक्षण के उपायों को अपनाकर ना सिर्फ कई हेक्टेयर भूमि को सूखे से बचाया बल्कि अपने प्रयास से भूमिगत जलस्तर के संतुलन में भी योगदान दिया ! उनका प्रदेश झारखण्ड पहाड़ी क्षेत्रों से भरा है ! यह राज्य तीव्रता से मरुस्थलीकरण की ओर बढ़ रहा है ! भारत के भू-क्षरण व मरूस्थलीकरण एटलस के मुताबिक इस राज्य की 68 प्रतिशत से अधिक भूमि मरूस्थल बनने के चपेट में है ! जिसका प्रमुख कारण जल अपरदन है ! यहाँ जलस्रोतों का क्षय होना तथा वनस्पतियों को हुआ नुकसान मरूस्थलीकरण के प्रमुख जिम्मेदार है ! यहाँ की कृषि वर्षा पर आधारित है ! गर्मियों में पीने के पारी की भीषण समस्या का सामना करना पड़ता है ! अच्छी खेती ना होने से यहाँ के लोग दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं ! इन सारी समस्याओं ने सिमोन उरांव को जल की उपलब्धता हेतु कुछ करने की उनकी सोंच को बल दिया !

उरांव ने 1960 के दशक में जल को संरक्षित करने का कार्य शुरू किया ! उन्होंने अपने समुदाय के लोगों को इसके लिए जागरूक किया और जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने व चैकडैम बनाने का कार्य शुरू कर दिया ! इस राह में बहुत बाधाएँ थीं ! लोग अपनी जमीन कतई नहीं देना चाहते थे तो उन्हें किसी तरह सिमोन जी ने इसके महत्व को समझाकर उनसे जमीन दान करवाई और ऐसा करके उन्होंने बड़ी संख्या में तालाबों और चेकडैमों का निर्माण किया ! उन्होंने सबसे बड़ा चेकडैम बेरो के समीप जामतोली गांव में बनवाया है ! यह डैम 12 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें हमेशा पानी रहता है ! उन्होंने सामान्य जमीन पर खेती की और उपजाई हुई फसल को बेचकर धन इकट्ठा किया जिससेे उन्होंने डैम और तालाब के निर्माण में लगे मजदूरों को पारिश्रमिक दिया !

अपने प्रयासों से मिलने वाले लाभों के बारे में सिमोन कहते हैं “आज 500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई तालाबों और चेकडैमों से की जा रही है ! गर्मी के दिनों में भी यहाँ के जलस्रोतों में पर्याप्त पानी रहता है ! पानी की उपलब्धता के कारण लोग खेती करने के साथ सब्जियां भी उगाते हैं ! यहाँ की खेती वर्षा पर आधारित थी पर चेकडैम और तालाब बन जाने से सिंचाई की समस्या खत्म सी हो गई है ! मैं अपने खेत में वर्ष में तीन फसलें उगा ले रहा हूँ ! इस कारण हमें खेती से अच्छी आमदनी हो रही है” ! सिमोन उरांव का जल संरक्षण हेतु किया गया प्रयास इतना प्रभावकारी है कि बेरो प्रखण्ड के लगभग 50 से अधिक गाँव ने उनके जल संरक्षण मॉडल को अपना लिया है !

जल संरक्षण हेतु किए गए बेहतर और असरकारक प्रयास के कारण सिमोन उरांव को “झारखंड का जल पुरूष” कहा जाता है ! कई लोग उन्हें सम्मान के तौर पर “पानी बाबा” भी कहते हैं !

अपने जीवन काल के 50 साल से भी अधिक पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत जल , जंगल और जमीन को देने वाले व उसके संरक्षण हेतु निरन्तर कई प्रयास करने वाले सिमोन उरांव को भारत सरकार ने “पद्मश्री” सम्मान से नवाजा ! फिल्म मेकर बीजू टोप्पो ने सिमोन उरांव के संघर्ष पर एक फिल्म भी बनाई है जिसका नाम “झरिया” है ! 2002 में उन्हें अमेरिकन मेडल ऑफ ऑनर स्टारकिंग पुरस्कार भी दिया गया !

जल संरक्षण के क्षेत्र में जल-क्रांति लाने वाले प्रेरणा पुरूष सिमोन उरांव पर्यावरण संरक्षण हेतु काम करने वाले प्रत्येक लोगों के लिए वृहद प्रेरणा हैं ! Logically सिमोन उरांव जी को व उनके प्रयासों को नमन करता है तथा अपने दर्शकों और पाठकों से उनके प्रयासों को अपनाने की अपील करता है !