Wednesday, August 4, 2021

घर से ही शुरू किया ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड्स का स्टार्टअप, 30 महिलाओं को दिया रोजगार का अवसर

आज भी कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वैसे तो बाजार में सैनिटरी पैड्स के कई प्रोडक्ट बिकते हैं पर उनके लिए कौन से प्रोडक्ट सही है, यह जानना उनके लिए मुश्किल हो जाता हैं। ऐसे में मुंबई के ठाणे जिले की रहने वाली सुजाता पवार ने रियूजेबल और ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड्स बनाना शुरू किया है। उनके बनाए प्रोड्क्ट कई देशों में सप्लाई हो रहे हैं।

सुजाता पवार (Sujata Pawar) ने साल 2020 के अगस्त में रियुजेबल और ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड्स (Reusable and organic sanitary pads)
बनाने की शुरूआत की। मात्र 11 महीने में उनका बिजनेस बुलंदियों तक पहुंच गया। भारत समेत कई अन्य देशों में भी इनके प्रोडक्ट्स की सप्लाई हो रही है। जैसे- नेपाल, सिंगापुर और न्यूजीलैंड आदि। उनका बिजनेस करीब 22 लाख रुपए का है। इसके अलावा उन्होंने 30 लोगों को रोजगार भी दिया है। अपने बिजनेस में सफल होने के बाद अब वह ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफार्म के बिजनेस की शुरुआत करने में लगी हुई हैं।

सुजाता की उम्र लगभग 33 वर्ष है। उन्होंने बीफार्मा के साथ एमबीए (MBA) ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने लगभग 8 वर्षों तक अलग-अलग फार्मास्युटिकल्स कंपनियों में काम किया है। वह बताती हैं कि मेडिकल फील्ड में उनका अनुभव काफ़ी अच्छा रहा है, जिसकी वजह से वह इस कार्य से बेहद संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति अपूर्व अग्रवाल भी इसी सेक्टर में जॉब करते थे और उनकी सैलरी भी अच्छी थी। उन्होंने बताया कि इस तरह की नई शुरुआत के लिए उन्होंने पहले कभी नहीं सोचा था।

Through startup of Organic Sanitary Pads from home this girl is giving livelihood to 30 women

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प्लास्टिक और केमिकल वाले सैनिटरी पैड्स पर किया रिसर्च

सुजाता बताती हैं कि हर लड़की की तरह उन्हें भी पीरियड्स के दौरान अच्छी पैड्स को लेकर काफी दिक्कत महसूस होती थी। उन्होंने बताया कि बाजार में कई तरह के पैड्स उपलब्ध हैं, पर इस्तेमाल करने पहले उन्हें सोचना पड़ता था। पिछले वर्ष कोरोना महामारी की वजह से हुए लॉकडाउन में उन्होंने पैड्स पर रिसर्च करना शुरू किया। पूरी जानकारी जुटाने के बाद उन्हें पता चला कि इसमें उपयोग की गई प्लास्टिक और केमिकल स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होते हैं। इसके उपयोग से महिलाओं को स्किन प्रॉब्लम भी होने लगती है और लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बाद इंफेक्शन प्रॉब्लम भी होने लगते हैं।

पूरे रिसर्च करने के बाद सुजाता ने Alternative (वैकल्पिक) पर कार्य करना शुरू किया, जिसके बाद उन्हें पता चला कि कॉटन का उपयोग करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। उन्होंने बताया कि कॉटन का उपयोग बरसों से लोग गांवों में करते आ रहे हैं। यही कारण है कि सुजाता ने खुद ऑर्गेनिक कॉटन के कुछ पैड्स तैयार किए और उन्हें इस्तेमाल भी किया, जिसके बाद उन्हें यह पसंद आया। खुद इस्तेमाल करने के बाद उन्होंने अपने रिलेटिव्स को भी पैड्स इस्तेमाल करने के लिए दिया और उन्हें भी यह पसंद आया।

सुजाता द्वारा बनाए गए पैड्स में दो तरह के दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पहली दिक्कत यह थी कि इसे साफ करने के बाद सुखाने में एक से दो दिन का समय लग जाता था। वही दूसरी समस्या यह थी कि अगर इसे अच्छी तरह से साफ नहीं किया जाए तो इससे इंफेक्शन का खतरा भी हो सकता था।

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कैसे हुई शुरूआत?

सुजाता का कहना है कि उन्होंने इस पर फिर से रिसर्च करना शुरू किया। जिसके बाद उन्हें और भी जानकारियां प्राप्त हुई और इस काम में इनकी रुचि भी बढ़ने लगी। उन्होंने बताया कि वह इस कार्य को अगले लेवल तक लेकर जाना चाहती हैं क्योंकि इस तरह की समस्या और भी लड़कियों को और महिलाओं को होती है। यहीं से उन्होंने इस कार्य की शुरुआत की।

सुजाता ने एक डिजाइनिंग पार्टनर से टाइअप किया और साल 2020 के अगस्त में अवनी(Avni) नाम से रियूजेबल ऑर्गेनिक कॉटन के पैड्स तैयार किया। इस पैड्स में ना तो लीकेज की समस्या थी और न ही सुखाने का टेंशन। यह प्रोडक्ट हर तरीके से सुरक्षित था और इसे लंबे समय तक रीयूज भी किया जा सकता था।

स्टार्टअप शुरू करने के बाद छोड़ी नौकरी

सुजाता ने स्टार्टअप शुरू करने के बाद अपनी नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा ध्यान अपने प्रॉडक्ट को तैयार करने में लगाया। शुरुआत के चार-पांच महीनों तक उन्होंने अपने घर में ही बिजनेस को संभाला। बाद में जब ग्राहकों के डिमांड्स बढ़ने लगे तब उन्होंने ठाणे में ही एक ऑफिस खोल लिया, जहां 30 लोगों की टीम काम करती है। वहां काम करने वालों में अधिकतर महिलाएं शामिल हैं, जो पैड्स को तैयार करने और पैकिंग करने का काम करती हैं। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए केवल सुजाता ही बल्कि इनके पति अपूर्व ने भी अपनी नौकरी छोड़ दी।

सुजाता कहती हैं कि उन्होंने लगभग 25 लाख का इन्वेस्टमेंट किया है। कुछ फंड इन्वेस्टर्स की ओर से भी मिले हैं, जिसका उपयोग मशीनों की खरीदारी और रॉ मटेरियल पर खर्च किया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ और फंड मिले थे, जिसका उपयोग उन्होने मार्केटिंग स्ट्रेटजी और प्रमोशन पर भी खर्च किए हैं।

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मार्केटिंग कैसे करते हैं?

सुजाता ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए मार्केटिंग की शुरुआत की। उन्होंने सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर पेज बनाया और अपने प्रोडक्ट के फोटो, वीडियो पोस्ट करना शुरु किया। जिसके बाद इसका परिणाम भी बेहतर मिला पर उन्होंने यह सोचा कि लोगों को इससे अवगत कराना भी उतना ही ज़रूरी है फिर उन्होंनेे खुद का वीडियो बनाकर पोस्ट करना शुरू किया। साथ ही लोगों को पैड्स के उपयोग करने के बारे में जानकारी देने लगी। उन्होंने यह भी बताया कि पैड्स का इस्तेमाल करना हमारे स्वास्थ्य के कितना ज़रूरी है।

शुरु हो गए ऑर्डर मिलना

जब सुजाता को उनके प्रोडक्ट्स के लिए आर्डर मिलने लगे तब उन्होंने कुछ हेल्थ ब्लॉगर्स से कांटेक्ट किया और उन्हें अपना प्रोडक्ट भेजा। उन्होंने इसे इस्तेमाल किया और इस्तेमाल करने के बाद इसके बारे में अच्छा रिव्यू लिखा, जिससे लोगों को प्रोडक्ट के बारे में जानकारी मिली। सुजाता ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को भी अपने प्रोडक्ट भेजे। उन्होंने भी इसे उपयोग करने के बाद अपने अकाउंट से प्रोडक्ट के बारे में पोस्ट किया, जिससे लोगों को यह काफ़ी पसंद आया और इस तरह से बिजनेस बढ़ता गया।

फिलहाल सुजाता ने अपनी एक वेबसाइट के जरिए देशभर में अपने product की सप्लाई online कर रही हैं। भारत समेत कई अन्य देश जैसे सिंगापुर, नेपाल, न्यूजीलैंड जैसे देशों से product की डिमांड आती है। इतना ही नहीं उनके product फ्लिपकार्ट (Flipkart) और अमेजॉन (Amazon) पर भी उपलब्ध हैं। उन्होंने साउथ इंडिया में लगभग 25 बड़े रिटेलर्स से भी टाइअप कर लिया है, जहां इनके प्रोडक्ट्स की खरीदारी होती है। सुजाता का कहना है कि उन्हें हर महीने 2 से ढाई हजार ऑर्डर्स मिलते हैं और लगभग 10 हजार कस्टमर्स साथ जुड़ चुके हैं।

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किस तरह के प्रोडक्ट्स को कैसे तैयार करती हैं?

फिलहाल सुजाता और उनकी टीम 3 तरह के प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग कर रही हैं, जिसमें एक ऑर्गेनिक कॉटन पैड है। इस कॉटन पैड को 3 लेयर में बनाया गया है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल्स टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी कीमत 200 रुपए है और यह 3 साल तक रियूजेबल है। इसे सुखाने में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। इसे एक नॉर्मल कपड़े की तरह धुलाई कर सकते है।
खास बात यह है कि इसे मात्र 3 से 4 घंटे में ही सुखाया जा सकता है।

इनका दूसरा प्रोडक्ट डिस्पोजेबल पैड है जिसकी कीमत केवल 10 रुपए है। इसे इकोफ्रेंडली तरीके से तैयार किया जाता है और पैड की पैकेजिंग मटेरियल भी इको फ्रेंडली ही की जाती है। ऐसे ही तीसरा प्रोडक्ट मेंस्ट्रुअल कप है, जिसे सिलिकॉन से बनाया गया है, जिसमें ब्लड सुखाने की जगह कलेक्ट किया जाता है। इतना ही नहीं इसका उपयोग 4 सालों तक किया जा सकता है। इन प्रोडक्ट्स को तैयार करने के लिए सुजाता ने कुछ मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से टाइअप किया है। इनके दो प्रोडक्ट महाराष्ट्र में बनते हैं। वही तीसरा बेंगलुरु में बनता है। महाराष्ट्र में इनकी खुद की भी यूनिट है, जहां महिलाएं पैड्स बनाने का कार्य करती हैं।

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विमेन हेल्थ प्रोडक्ट का मार्केट

पिछले कई सालों से भारत में ऑर्गेनिक और इकोफ्रेंडली सैनिटरी पैड्स के कई प्रोडक्ट की शुरूआत हुई है, जिसमें कुछ अच्छे प्रोड्क्ट भी शामिल हैं।

ग्रामीण इलाकों की महिलाएं ऐसी भी हैं, जो इन प्रोडक्ट्स से वंचित हैं। कुछ महिलाएं तो जानते हुए भी पैसों की कमी की वजह से इसे यूज नहीं कर पाती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में यह प्रॉडक्ट करीब 32 अरब का है। अनुमान है कि साल 2025 तक यह 70 अरब तक पहुंच जायेगा। इससे यह मालूम पड़ता है कि इसका बिज़नेस काफी आगे बढ़ रहा है।

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अगर आप इस तरह का स्टार्टअप प्लान कर रहे हैं, तो इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप में से कोई इस तरह के स्टार्टअप का प्लान कर रहे हैं, तो सबसे पहले आपको मार्केट रिसर्च करना जरूरी है क्योंकि इससे आपको यह जानकारी प्राप्त होंगी कि आप क्या नया लांच करने वाले हैं। बाजार में इसकी लागत और कीमत क्या है? बाजार में रिसर्च करने का फायदा यह होगा कि आपको इसके बजट का अंदाजा लग जाता है। इस प्रोडक्ट को शुरू करने से पहले आपको एक हेल्थ एक्सपोर्ट से भी सलाह ले लेना जरूरी है। अगर हो सके तो आप उसकी देखरेख में यह काम शुरू करें ताकि आगे आपको इसमें कोई प्रॉब्लम ना हो। इसकी शुरुआत के लिए आपके पास लगभग 4 से 5 लाख रुपए की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए या तो आप अपने पास से इन्वेस्ट कर सकते हैं या फिर लोन ले सकते हैं।

हमारे देश कुछ मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां हैं, जो इस तरह के प्रॉडक्ट्स बनाती हैं, जिससे आप टाइअप करके अपने हिसाब से प्रॉडक्ट तैयार करवा सकते हैं। आप मशीन लगवा कर अपना खुद का यूनिट शुरु कर सकते हैं। वैसे अधिकतर लोग अपना स्टार्टअप दूसरे कंपनियों के साथ ही अपना प्रोडक्ट तैयार करवाते हैं।

सोशल मीडिया मार्केटिंग के लिए सबसे सही है। इसके अलावा आप बड़े सेलिब्रिटी और चर्चित महिलाओं को इस तरह के प्रॉडक्ट्स दे सकते हैं, जिससे आपके प्रोड्क्ट का प्रमोशन भी हो जाएगा। इसके साथ ही आप स्कूलों और कॉलेजों में अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलवा सकते हैं, जिससे लोगों में इसके प्रति जागरुकता भी बढ़ेंगी।