Sunday, December 10, 2023

अब कलर ब्लाइंडनेस से मिल सकती है निजात, UAE और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने बनाया विशेष तरह का कॉन्टैक्ट लेंस

आंखें हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक अंग है। अगर यह कहा जाये कि इस विश्व में स्थित चल-विचल, रंग-बिरंगी अथवा रंगहीन सभी वस्तुओं का हमसे परिचय हमारी आंखें ही कराती हैं तो यह गलत नही होगा। लेकिन समय के साथ बदल रहे लाइफ स्टाइल, प्रदुषण या मानसिक तनाव की वजह से हमें नेत्र संबधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं बहुत से लोग हमारे बीच ऐसे भी होते हैं जो बचपन से ही दृष्टि बाधित होते हैं अथवा नेत्र संबंधी किसी रोग से पीड़ित होते हैं।

बचपन से ही आंखों से संबंधित होने वाली बिमारियों में से ही एक अन्य बीमारी रंग अंधता या कलर ब्लाइंडनेस(Colour Blindness) है। जिसमें पीड़ित व्यक्ति हरे व लाल रंग में अंतर नही कर पाता। बता दें कि ये बीमारी अनेक दशकों से लोगों में पाई जाती रही है लेकिन, आजतक डॉक्टरों द्वारा इसका कोई इलाज नही निकला जा सका है।

lense

आंखों में कलर ब्लाइंडनेस को लेकर हाल ही में एक सुखद ख़बर यह आई है कि ब्रिटेन व संयुक्त अरब अमीरात(Britain and UAE) के डॉक्टर्स ने मिलकर गोल्ड नैनोपार्टिकल्स (Gold nanoparticals) के ज़रिये ऐसे कॉन्टेक्ट लैंस(Contact Lense) तैयार किये हैं जो कलर ब्लाइंडनेस से जूझ रहे लोगों को लाल व हरे रंग में फर्क करने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकते हैं।

UAE और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने मिलकर डेवलप किये हैं ये कॉन्टेक्ट लैंस

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ब्रिटेन(Britain) के साइंटिस्ट ने मिलकर कलर ब्लाइंडनेस के मरीज़ों के लिए ऐसे कॉन्टेक्ट लैंस बनाये हैं जिनके द्वारा मरीज लाल व हरे रंग में फर्क करने में काफी हद तक सक्षम हो पाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक इन लैंस में गोल्ड नैनो पार्टिकल्स इस्तेमाल हुए हैं जोकि लाल व हरे रंग को पहचानने में मदद करता है।

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गोल्ड नैनोपार्टिकल्स के प्रयोग से बने हैं ये कॉन्टेक्ट लैंस की

ACS Nano Journal में पब्लिश एक रिसर्च आर्टिकल के मुताबिक – “इन कॉन्टेक्ट लैंस में किन्ही ऐसे कैमिकल्स जो आखों को नुकसान पहंचाते हों का प्रयोग न करके गोल्ड नैनोपार्टिकल्स को यूज़ किया गया है जो गैर-विषैले यानि नॉन-टॉक्सिक हैं, हाइड्रोजेल में गोल्ड पार्टिकल्स को सम्मिलित करने की विधि(Gold particals infused with Hydrogel) बेहद पुरानी है, ताकि क्रैनबेरी ग्लास(Cranberry Glass) बनाया जा सके, क्योंकि वे एक अलग प्रकार का रोशनी फैलाते हैं। ये क्रैनबेरी ग्लास 520 और 580 नैनोमीटर के बीच प्रकाश विकिरणों को फिल्टर करने वाले रेड-टिंटेड जेल का उत्पादन करते हैं जो लाल और हरे रंग को एक-दूसरे में मिलने या ओवरलैप होने से बचाता है। एक अन्य उपयुक्त बात यह भी है कि कलर ब्लाइंडनेस के साथ-साथ ये लैंस दृष्टि संबंधी अन्य समस्याओं में भी उपयोगी साबित होंगे”

UAE and Britain scientists developed contact lenses

Colour Blindness क्या होता है

कलर ब्लाइंडनेस आंखों संबंधी एक जेनेटिक बिमारी है यानि पीढ़ी दर पीढी लोगों में पाई जाती है। यह जन्म के समय से ही होने वाली बिमारियों में से एक है। आपको ज्ञात होना चाहिए कि कलर ब्लाइंडनेस के दो खास प्रकार प्रोटानोपिया और डयूटेनोपिया (Protanopia and Deuteranopia) जिसमें पीड़ित व्यक्ति न केवल इन दो कलर्स में भेद कर पाता है बल्कि दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में उसे बेहद कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इन हालातों में पीड़ित कलर्ड ग्लास पहन कर कुछ हद तक समस्या का सामना कर पाता है। भारत में इसके मामले 8 प्रतिशत पुरुषों और 0.5 फीसदी मामले महिलाओं में देखे जाते हैं। भले ही ये बिमारी वर्षों से हमारे समाज व दुनिया में फैली हुई है लेकिन आज तक इसका कोई इलाज नही ढ़ूढ़ा जा सका है।

जल्द शुरु होने वाला है इन लैंस का क्लीनिकल ट्रायल

अबूधाबी की खलीफा यूनिवर्सिटी (Khalifa University- Abu Dhabi) के इंजीनियर अहमद सालिह(Ahmad Saalih) कहते हैं- “दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने अपने प्रारंभिक अध्ययन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब जल्द ही वे इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरु करने वाले हैं। कलर ब्लाइंडनेस के मरीज़ लाल ग्लास वाले चश्में पहनते हैं जिससे उन्हे कलर्स कुछ हद तक साफ दिखाई देते हैं। क्योंकि अभी तक इस बीमारी का कोई इलाज नही खोजा जा सका है, ऐसे में ये लैंस उपयुक्त साबित होंगे, अच्छी बात यह है कि इन्हे लगाना काफी आसान है”