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B.tech और M.Tech के बाद शुरू की खेती, आज अपने फसल को विदेशों में बेचकर कमा रही हैं अच्छा मुनाफा

अगर आप किसी से पूछे कि वह क्या बनना चाहता हैं तो सब के अपने-अपने सपने होते हैं पर उनमें से कोई नही कहेगा कि उसे किसान बनना हैं। वही पर अगर कोई पढ़ -लिख कर अपनी नौकरी छोड़ कर खेती करने की सोचे तो सब उसे मूर्ख ही समझेंगे। कुछ इसी तरह से सब वल्लरी चंद्राकर(vallari chandrakar) को पढ़ा-लिखा बेवकूफ कहते थे जब उन्होंने किसान बनने की सोची। 27 वर्षीय वल्लरी चंद्राकर(vallari chandrkar) रायपुर से करीब 88 कि.मी दूर मुहँसमून्द के बागबाहरा के सिर्री पठारीमुडा गांव की रहने वाली हैं।2012 में कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने के बाद रायपुर के दुर्गा कॉलेज में अस्सिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी की। पर उस समय किसी को यह अंदाजा नही था कि यह लड़की कोई ऐसा कदम उठाएगी जो कोई लड़का भी न सोचें।

खेती का फैसला

अपनी छुट्टी में वल्लरी अपने गांव आई तब उन्होंने देखा कि गांव में किसान अब भी पुरानी तकनीक से ही खेती कर रहे है जिसे उन्हें मेहनत ज़्यादा लग रही है और मुनाफा कम हो रहा हैं। तब उन्होंने खेती करने का फैसला किया।

Vallari Chandrakar farming

शुरुआत

वल्लरी ने खेती की शुरआत अपने पिता द्वारा फार्म हाउस के लिए खरीदी गई ज़मीन से की। इनके पिता मौसम विभाग केंद्र रायपुर में इंजीनियर हैं। कमाल की बात यह थी कि वल्लरी(vallari) के परिवार में तीन पीढ़ियों से किसी ने खेती नही की थी। पर वल्लरी की ये मुहिम सफल रही। पहले वह जहा 15 एकड़ में खेती करती थी वही आज वह 27 एकड़ में खेती करती हैं।

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मुश्किलो का सामना

वालारी का यह सफर आसान बिल्कुल भी नही था। शुरुआत में उन्हें बहुत मुश्किलो का सामना करना पड़ा। शुरू में उनकी बातों को लड़की होने के कारण कोई गंभीरता से नही लेता था। किसान, बाजार और मंडीवालो से उनकी डील नही पाती थी।

छत्तीसगढ़ी सीखी

वल्लरी ने किसानों से बेहतर संवाद की लिए छत्तीसगढ़ी सीखी। साथ ही बेहतर खेती के लिए इंटरनेट से खेती की नई तकनीक भी सीखी। उन्होंने देखा कि कैसे दुबई, इजराइल और थाईलैंड में खेती होती है और उसे अपनाने की कोशिश की।

विदेशो में सब्ज़ियों की मांग

आज वल्लरी की सब्ज़िया दिल्ली, भोपाल,इंदौर, ओडिशा, नागपुर तक जाती हैं। अब तो उन्हें विदेशो से भी आर्डर मिलने लगे हैं। सब्ज़िया दुबई , इजराइल जैसे देशों में निर्यात के लिए तैयार हैं। उन्हें दुबई और इजराइल से टमाटर और लौकी का आर्डर मिला हैं।

खेती के अलावा वल्लरी शाम 5 बजे खेत से घर आने पर लड़कियों को अंग्रेज़ी और कंप्यूटर का ज्ञान भी देती है। ताकि यह लड़कियो को आत्मनिर्भर बना सके।

भविष्य में योजना

वल्लरी यही नही रुकती है बल्कि भविष्य में उनकी योजना इजराइल जाकर आधुनिक खेती की तकनीक सीखने की हैं। ताकि वह खेती में और प्रयोग कर किसानी की मदद कर सके।

The Logically के लिए इस कहानी को मृणालिनी द्वारा लिखा गया है। बिहार की रहने वाली मृणालिनी अभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती हैं और साथ ही अपने लेखनी से सामाजिक पहलुओं को दर्शाने की कोशिश करती हैं!

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