Thursday, January 28, 2021

ईस IAS अफसर ने गांव के उत्थान के लिए खूब कार्य किये, इनके नाम पर ग्रामीण वासियों ने गांव का नाम रख दिया

ऐसे तो यूपीएससी की परीक्षा पास करते ही सभी समाज के लिए प्रेरणा बन जाते है पर ऐसे अफसर बहुत कम है जिन्होंने सच में किसी की जिंदगी या किसी समुदाय को प्रभावित किया है। आज की कहानी ऐसे ही IAS ऑफिसर की है जिनसे प्रभावित होकर उनके नाम पर ही लोगों ने अपने गांव का नाम रख लिया। आज हम बात करेंगे IAS दिव्या देवराजन की।

दिव्या देवराजन 2010 बैच की आईएएस ऑफिसर हैं। दिव्या ने बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह बताती हैं कि लोक सेवा में आने के पीछे का कारण उनके दादाजी और पिताजी हैं। वह आगे बताती है कि बचपन में जब भी गांव में कोई अधिकारी आता था तब अपने दादाजी को मंदिरों में छुपते हुए देखा करती थी। इससे उन्हें एहसास हुआ कि कैसे अधिकारी किसानो को प्रभावित कर सकते है। वह कहती है कि उन्हें IAS ऑफिसर बनने की प्रेरणा उनके पिता जी से भी मिली हैं। उनके पिता जी तमिलनाडु बिजली बोर्ड में काम किया करते थे। वह बताते थे कि कैसे एक गांव में बिजली पहुंचने पर किसानों के चेहरे पर चमक आई थी और इससे उनके पिताजी को जो संतुष्टि मिली थी वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। इन दो बातों ने दिव्या को लोक सेवा का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया।

दिव्या यूपीएससी की परीक्षा पास करने के वक़्त तो चर्चा में आयी थी पर सबकी नजरों में एक बार फिर तब आई जब 2017 में इनका तबादला तेलंगाना के आदिलाबाद में किया गया था।

 IAS Divya Devrajan

बातचीत से किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है

आदिलाबाद में उस वक़्त आदिवासी समुदाय के बीच झड़प आम बात थी। उस समय पर झड़प ने हिंसक रूप ले लिया था ।आनन-फानन में दिव्या देवराजन का तबादला आदिलाबाद में किया गया और एक ही रात में दिव्या वहां पहुंच गई। झड़प उस समय हिंसक रूप ले चुकी थी और लोगों में अविश्वास बहुत था, स्थिति काफी संवेदनशील थी और उसे काफी समझदारी और धैर्य से संभालने की जरूरत थी। दिव्या ने ठीक उसी तरह काफी धैर्य और समझदारी दिखाते हुए संवाद का रास्ता निकाला। दिव्या को इस बात में यकीन है कि किसी भी समस्या को संवाद या बातचीत से हल किया जा सकता है।

तीन महीने में गोंडा भाषा सीखी

यह दिव्या देवराजन उन लोगों से सीधे संवाद कर सके इसके लिए वहां की गोंडा भाषा सिर्फ 3 महीने के भीतर ही सीख ली। इसमें उनकी मदद आदिलाबाद की ऑल इंडिया रेडियो की वरिष्ठ अनाउंसर दुर्वा भूमंन्न ने की।
जब लोगों को अहसास हुआ कि दिव्या उनकी बात समझ सकती है तब लोगों ने खुलकर अपनी समस्या उनके सामने रखनी शुरू की।

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कमजोर समूह के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किए

दिव्या देवराजन ने विशेष रूप से कमज़ोर आदिवासी समूह के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति की। जिससे इनसब की समस्या को बेहतर ढंग से हल किया जा सके। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधा इन आदिवासियों तक अच्छे से पहुच सके इसके लिए उन्होंने जिला अस्पताल(RIMS) में विशेष आदिवासी समंवयक और भाषा अनुवादक की नियुक्ति की।

 IAS Divya Devrajan

लोगो के लिए सरकारी कार्यालय तक पहुच आसान बनाई

आदिलाबाद का इतिहास ही हिंसा का रहा है लेकिन इस जगह पर दिव्या देवराजन ने अपने व्यवहार और कार्यकुशलता से सभी के दिलों में अपनी एक अलग जगह बनाई हैं। यहां के हर गांव का उन्होंने दौरा किया और सभी लोगों को वह नाम से जानती हैं। थोटी समुदाय के आदिवासी नेता मारुति के अनुसार दिव्या देवराजन ने वह किया जो आज तक वहां पर आए कोई ऑफिसर नहीं कर पाए। उन्होंने सभी के लिए कार्यालय तक पहुंच आसान बनाई। मारुति जिस इलाके से आते हैं वह इलाका हर साल बाढ़ की चपेट में आ जाता है। दिव्या ने उस मुद्दे पर भी ध्यान दिया और वहां की भूमि समतल कराई जिससे बाढ़ से लोगों को कुछ हद तक राहत मिली। इसके अलावा दिव्या ने कपास की खरीद के लिए व्यवस्था सही की, बहुत सालों से लंबित भूमि मुद्दों को सुलझाया, आदिवासियों के उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को पहुंचाने के लिए व्यवस्था की।

गांव का नाम दिव्या के नाम पर रखा

दिव्या के कामों से आदिलाबाद के लोग इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने गांव का नाम ही दिव्य के नाम पर दिव्यगुड़ा रख दिया। इस संबंध में वहां के लोगों का कहना है कि दिव्या ने उनके लिए जितना किया है वह उनके प्रति सम्मान जताना चाह रहे थे और वह चाहते थे कि उनकी आने वाली पीढ़ी भी दिव्या के काम को जाने। इसलिए उन्होंने अपने गांव का नाम ही दिव्या के नाम पर दिव्यगुड़ा रख दिया।

 IAS Divya Devrajan

आदिवासियों की परंपराओं का दस्तावेजीकरण किया

दिव्या बताती हैं कि पहले इन समुदायों के लोगों को लगता था कि अधिकारी उनके अधिकारों का हनन करने के लिए है। यह गलतफहमी दूर करने के लिए उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाई, उन्हें जागरूक किया। यहां तक कि उनकी त्योहारों जैसे की डंगरी गुसाड़ी और नासोबा जात्रा का समर्थन किया और उन सबका वृतचित्र के रूप में दस्तावेजीकरण करने की कोशिश की।

अधिकारो के लिए जागरूक किया

दिव्या ने इन समुदायों के लोगो को अपने अधिकारों के लिए जागरूक किया और इनका उपयोग करने के लिए रिक्त पदों को भरा। इन्होंने आदिवासियों की पारंपरिक पंचायत राय केंद्र को पुनर्जीवित किया। इसके अलावा इन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर PESA पर समन्वयक नियुक्त किए।

दिव्या देवराजन( Divya Devrajan) अभी महिला, बाल, विकलांग और वरिष्ठ नागरिक विभाग में सचिव और आयुक्त के पद पर नियुक्त हैं। दिव्या यही नही रुकती, वह कहती है अभी तो उन्हें बहुत कुछ करना है।

मृणालिनी सिंह
मृणालिनी बिहार के छपरा की रहने वाली हैं। अपने पढाई के साथ-साथ मृणालिनी समाजिक मुद्दों से सरोकार रखती हैं और उनके बारे में अनेकों माध्यम से अपने विचार रखने की कोशिश करती हैं। अपने लेखनी के माध्यम से यह युवा लेखिका, समाजिक परिवेश में सकारात्मक भाव लाने की कोशिश करती हैं।

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