Saturday, July 31, 2021

बिना मिट्टी का इस्तेमाल किये अपने छत पर ही अनोखी पद्धति से खेती कर अच्छा मुनाफ़ा कमा रहे हैं: तरीका सीखिए

लोगों का मानना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ता है वैसे वैसे ज्ञान और अनुभव भी बढ़ता है। साथ ही किसी कार्य को करने या सीखने की क्षमता भी बढ़ती है। कुछ हद तक यह सत्य भी है कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ हमारे बातचीत का तरीक़ा, दुनिया को देखने का नजरिया, लोगों को समझना इन सारी चीजों में बदलाव हो ही जाता है। लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि छोटी उम्र में बड़ा काम नहीं किया जा सकता। हमारे देश में ऐसे बहुत से प्रतिभावान व्यक्ति मौजूद है जो कम उम्र में ऐसा कार्य कर रहे हैं जिसके कारण वह सभी के लिए मिसाल बन रहे हैं। आज की कहानी एक ऐसे 20 वर्षीय लड़के की है जो अपने छत पर बिना किसी मिट्टी के खेती कर रहा है और मुनाफा भी कमा रहा है। तो चलिए पढ़ते हैं, कौन है वह।

यह हैं विपिन यादव

विपिन यादव (Vipin Yadav) गुड़गांव (Gudgawan) से ताल्लुक रखते हैं। कंप्यूटर साइंस से बीएससी किए हैं। अपनी पढ़ाई संपन्न करने के बाद जब यह नौकरी ढूंढ़ने लगे तो इन्हें इनकी काबिलियत के अनुसार कोई नौकरी नहीं मिली। इन्होंने अपने एक दोस्त की मदद से खेती की तरफ रुख मोड़ा और फूलों की खेती करनी शुरू कर दी। इन्होंने छत पर बिना मिट्टी के पौधों को लगाया और अपने टेरेस फार्मिंग का श्रीगणेश किया।

कमा रहें हैं 25-30 हज़ार

इन्होंने अपने छत पर पोलीहाउस का निर्माण किया है। इसके जरिए यह फूलों को उगाते हैं। जहां ज्यादातर फूलों की मांग होती है, उस एरिया में इन्होंने रेंट पर जगह ले लिया है और वहां फूलों की खेती कर रहे हैं। इनकी फूलों से इतनी कमाई हो जा रही है कि वह उसका किराया देने के बाद भी 25-30 हज़ार प्रत्येक महीने कमा लेतें हैं। यह अपने एक नए प्रोजेक्ट का शुभारंभ करने जा रहे हैं। जो मात्र 800 स्क्वायर फीट में है। इस प्रोजेक्ट का एक फायदा यह है कि हर मौसम में फूलों को प्राप्त किया जा सकता है। इससे इन्हें लगभग डेढ़ लाख का मुनाफा होगा। विपिन ने अपने नर्सरी में अनेक प्रकार के फूलों को लगाया है। फूलों की सप्लाई यह “प्रो ट्रे” बनाकर करतें हैं। एक प्रो ट्रे में लगभग 202 होल है।

यह भी पढ़े :- खुद की कम्पनी बेच शुरू किए ‘मिट्टी रहित खेती’ अच्छे पैदावार के साथ ही, हो रही है मोटी कमाई

प्रो ट्रे से क्या है फायदा

विपिन ने यह जानकारी दी कि नारियल के बुरादे, बर्मिको, परलाइट को अन्य हिस्सों में मिलाकर उसे प्रो ट्रे में डालने के बाद बेड का निर्माण होता है। फिर जो भी सैंपल हुए हैं, उन्हें ट्रे में लगाया जाता है। महीनों में इनमें लगभग निरीक्षण कर प्रतिदिन 2-3 बार सिंचाई भी की जाती है। जब यह पौधे तैयार हो जाते हैं तो उन्हें खेत में लगा दिया जाता है। वैसे तो अधिकतर पौधे प्रो ट्रे के माध्यम से ही बिक जाते हैं।

निःशुल्क देते हैं प्रशिक्षण

कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन करने के बाद भी इन्होंने खेती को चुना और इससे अधिक लाभ भी कमा रहे हैं। यह प्रतिदिन कुछ ना कुछ नया सीखते हैं और मेहनत कर इसे अपने कार्य में लगाते हैं। यह किसानों को भी निःशुल्क प्रशिक्षण देते हैं ताकि वह इस तकनीक को अपनाकर अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इस कार्य के साथ-साथ यह बड़े कंपनियों और घरों में लैंडस्केप डिजाइनिंग का कार्य भी करतें हैं। यह इसमें सिर्फ सामग्रियों के पैसे लेते हैं और डिजाइनिंग फ्री में ही करते हैं।

अच्छी खासी पढ़ाई कर फूलों की खेती छत पर करने का जो फैसला विपिन ने लिया वह अनुकरणीय है। साथ ही लोगों को प्रशिक्षण देने का कार्य भी करते हैं जो प्रशंसनीय है। इन दोनों कार्यों के लिए The Logically विपिन यादव (Vipin Yadav) की सराहना करता है।