Sunday, October 24, 2021

IIT से इंजिनीयरिंग करने के बाद भी नौकरी नही किये, गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा शुरू कर 2500 बच्चों को हुनर दे रहे हैं

एक सफ़ल व्यक्ति बनने की अभिलाषा हर इंसान की होती है। सफलता व्यक्ति के आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प, उसकी सोच और हिम्मत पर निर्भर करता है। अगर कोई चाहे कि सफलता की सीढ़ी पर वह यूं ही चढ़ जाएगा तो यह असम्भव है। कुछ व्यक्ति अधिक पैसे कमाकर सफलता हासिल करते हैं तो कुछ समाजसेवी बनकर सभी के दिलों पर राज करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी सफलता के बाद दूसरों को सफल बनाने के बारे में सोचते हैं। दूसरों को रोजगार देते हैं। आज की यह कहानी IIT के छात्र की है जो 9 हज़ार से भी अधिक किसानों और 5 हज़ार बच्चों का कल बेहतर बना रहे हैं।

विशाल सिंह (Vishal Singh) वाराणसी (Varanasi) में जन्मे हैं। इन्होंने खाद्य प्रौद्योगिकी (Food Technology) से मास्टर और कृषि (Agriculture) की डीग्री IIT खड़गपुर (Kharagpur) से प्राप्त की हैं। इनके पिता किसान (Farmer) और मां गृहणी (Housewife) हैं। विशाल किसान परिवार से थे इसलिए यह अपने खेतों में दादाजी और पिताजी के साथ जाया करते थे। जब यह खेतों में जाते थे तो यह देखते कि खेतों में मजदूर काम कर रहें हैं और वे मजदूर भी काफी मशक्कत के बाद ही मिलते थे।

उड़ीसा में पढ़ने गए तो बहुत क़रीब से ज़िंदगी को देखें

अपने खेतों में मजदूरों को देख विशाल सोचते.. शायद कोई ऐसी भी खेती होती जिसमें किसान मजदूरों पर कम निर्भर रहते। विशाल जब उड़ीसा (Oddisa) पढ़ने गयें तब वहां बहुत क़रीब से ज़िंदगी को देखे। बहुत कुछ नया सीखे। उन्होंने आर्थिक-समाजिक के बीच के अंतर को महसूस किया। वह Odisa University Of Agriculture and Technology से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गयें थे। उन्होंने वहां यह भी देखा कि कैसे बच्चों को वस्त्र, भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी छोटी-छोटी चीजों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। फिर वह आगे की पढ़ाई के लिए IIT खड़गपुर चले गयें।

शुरू किये बच्चों को शिक्षित करना

वर्ष 2012 में विशाल ने अपना पंजीकरण केवल्य विचार सेवा संस्था (Kaivalya Vichar Sewa Samiti) नाम के एनजीओ में कराया। फिर वह पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बच्चों को पढ़ाने लगें। विशाल ने मात्र 6 हज़ार रुपये से इन 40 बच्चों को पढ़ना शुरू किया। लेकिन खुशी यह भी थी कि इनका साथ IIT के छात्रों, दोस्तों और प्रोफेसर ने भी दिया। केवल्य विचार सेवा संस्था की यह सेवा वर्ष 2012 तक बहुत से शहरों और जिलों तक पहुंच गई। वर्ष 2013 तक बड़े-बड़े विश्विद्यालय से अधिक से अधिक मात्रा में स्वयंसेवक जुड़ने लगे। देखते-ही-देखते वर्ष 2014 तक केवल्य विचार सेवा संस्था की सहायता लगभग 2500 से अधिक बच्चों तक पहुंच गईं। इन बच्चों को सभी जरूरतमंद चीजें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इन बच्चों को भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य सुविधा ये सब निःशुल्क मिलती है। साथ ही बच्चों को इस मॉडर्न युग के काबिल भी बनाया जाता है। उन्हें खेल-कूद जैसी प्रतियोगिता के लिए तैयार किया जाता है।

KVSS के 6 प्राइमरी स्कूल और 4 अनाथालय हैं

विशाल ने अपनी IIT M.TECH की पढ़ाई पूरी की और उन्हें लखनऊ के अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) विभाग में काम भी मिला। इसके बाद वह सेंचुरी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के कृषि विभाग में हेड ऑफ डिपार्टमेंट के तौर पर भी कार्यरत हुए। ये सब करने के बावजूद भी उनका लगाव KVSS से जुड़ा रहता था। उन्होंने 6 प्राथमिक विद्यालय और 4 अनाथआश्रम खोल रखे हैं। यह KVSS के साथ झारखंड के 15 गांवों के साथ अन्य राज्यों को भी जोड़ रहा है।

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कृषि क्षेत्र की तरफ बढ़ाया कदम

विशाल शिक्षा के क्षेत्र को सुधार रहें थे। इसके बाद उन्होंने कृषि क्षेत्र में भी अपना कदम आगे बढ़ाया। इसके लिए वह गांव-गांव गए और वहां उन्होंने पाया कि आदिवासियों के पास जमीन तो है लेकिन वह इसके बारे में नहीं जानते हैं। बाहर की दुनिया में क्या है, उन्हें कुछ भी मालूम नहीं है। ज्यादातर आदिवासी प्रजाति इधर-उधर घूम कर कर अपना जीवकोपार्जन करते हैं। उनके बच्चे कुपोषण के शिकार होते है। ये बच्चे ना शिक्षा को जानते हैं और ना ही इन्हें वस्त्र के बारे में जानकारी है। इसलिए विशाल ने आदिवासियों को खेती से जोड़ा और जीवनयापन करने के तरीके के बारे में बताया।

जैविक खेती

विशाल ने वर्ष 2016 में किसानों के लिए 0 लागत वाली जैविक खेती के मॉडल को तैयार किया। शुरुआती दौर में पहले इन्होने किसानों को यह सारी जानकारियां दी कि जैविक खेती क्या है? कैसे करनी है? फिर KVSS ने बहुत ही कम जमीन महज़ 1 एकड़ में 1 लाख रुपये सालाना लगाकर मॉडल बनाया। यह मॉडल सबको अच्छा लगा। हर किसी को जैविक खेती ने बहुत प्रभावित किया। इस जैविक खेती से किसान औषधि व फूल उगाकर लाखों का फायदा उठा रहे हैं।

विशाल पूरी तरह से सामाजिक कार्यों में लगना चाहते थे लेकिन बीच मे नौकरी आरे आ रही थी। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। लेकिन यह फैसला उनके परिवार वालों को मंजूर नहीं था। विशाल असमंजस में थे कि क्या करें तब उनके मित्र ने उनका साथ दिया। विशाल का हिम्मत बढ़ा। उन्होंने पूरी तरह से खुद को सामाजिक कार्यों में लगाया। बच्चों को शिक्षित करने और वयस्कों को रोजगार देने के प्रयास में वह सफल हुयें। उन्होंने लगभग 5 हज़ार बच्चों को शिक्षित किया और 9 हजार किसानों को रोजगार दिया है। विशाल यहीं नहीं रुके हैं। अब उनका लक्ष्य है- वह आदिवसियों को घरेलू उधोग जैसे डेयरी फार्म, मशरूम खेती और पोल्ट्री से जोड़ना। साथ ही यह ये भी चाहते हैं कि जैविक उर्वरक कीटनाशक का निर्माण भी करें।

विशाल ने छोड़ी नौकरी

एक पढ़े-लिखे समझदार इंसान की पहचान है विशाल जो ख़ुद पढ़े.. दूसरों को भी पढ़ाये.. दूसरों को भी रोजगार देकर सफल बनाने की कोशिश किए हैं। The Logically विशाल की सराहना करते हुए उन्हें सलाम करता है।