Monday, March 8, 2021

गेहूं के फसल में रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन करने वाले किसान से सीखिए नुस्खे, इन्हें कृषि मंत्री भी सम्मानित कर चुके हैं

पहले की तुलना में किसान भी अब ज्यादा जागरूक हो गए हैं। आज हम एक ऐसे व्यक्ति की बात करेंगे जो आधुनिक खेती से सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। जिन किसानों को लगता है कि आधुनिक खेती से कोई लाभ नहीं हैं, उनके लिए यह एक उदाहरण है।

कमल किशोर (Kamal kishore)

कमल उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के उन्नाव जिले के पुरवा ब्लॉक के मछिगवां सदकू गाँव के निवासी हैं। उनकी आयु 58 वर्ष हो चुकी है और वे अब भी खेती का काम कर रहे हैं। कमल ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। कमल गाँव कनेक्शन से बात करते हुए बताते हैं कि उन्होंने कृषि का काम साल 2004 में शुरु किया था। शुरूआत के दिनों में खेती करने में लागत अधिक लगती थी और उसकी तुलना में लाभ बहुत कम होता था। इस हानि से राहत पाने के लिए कमल ने कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर खेती करना शुरू किया जिसके बाद कमल को अच्छा लाभ होने लगा।

कमल ने पूरे प्रदेश में गेंहू का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन किया है

कमल बताते हैं कि अधिक लागत लगाकर व कड़ी मेहनत करने के बाद भी किसानों को लाभ नहीं मिलता। इस वजह से अब किसान खेती छोड़ अन्य काम को तरफ रुख कर रहे हैं। जबकि कमल का मानना हैं कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की सलाह से हम कम लागत के बाद भी अच्छा उत्पादन कर लाभ कमा सकते हैं। कमल ने गेंहू का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने एक हेक्टेयर में 82 क्विंटल 40 किलोग्राम गेंहू का उत्पादन किया है। 23 दिसंबर 2020 को किसान दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की उपस्थिति में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही (Surya Pratap Shahi) के द्वारा कमल को सम्मानित किया गया।

wheat farming

कमल बताते हैं गेहूं के बुवाई का सही समय

कमल गेहूं के फसल की जानकारी देते हुए कहते है कि इसकी तैयारी बरसात खत्म होने के बाद शुरू करनी चाहिए। पिछले साल उन्होंने खेत में ब्लॉक से ढैंचा लेकर बो दिया था और फिर ढैंचा कटवा कर उसमें गोबर की खाद डाल कर पानी भर दिया। जिससे गोबर के साथ ढैंचा सड़ने लगा। इसके बाद खेत की अच्छे से जुताई कराई और खेत गेहूं बुआई के लिए तैयार हो गई। आगे वह बताते हैं कि गेहूं के बुवाई का सही समय 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच होता है। इस समय बुवाई करने से गेहूं का अच्छा उत्पादन होता है।

कमल बीज को मानते हैं महत्वपूर्ण

कमल बीज को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। वह हर किसान को यह सलाह देते हैं कि बीज हमेशा किसी प्रमाणित जगह या फिर राजकीय बीज भंडार से ही खरीदना चाहिए। अच्छे बीज में अच्छे जमाव के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है, जिसमें अधिक बियास के साथ रोग कम लगता और उत्पादन भी अच्छा होता है। बीज के शोधन के बारे में कमल कहते हैं कि खेत तैयार करने के साथ ही बीज का शोधन करना चाहिए। इसके लिए कमल ट्राइकोडर्मा की 5-6 ग्राम मात्रा लेकर प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधित करते हैं और फिर 12 घंटे के लिए छाया में सुखाने के लिए छोड़ देते हैं। ऐसा करने से बीज के जड़ों को मजबूती मिलती है।

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गेहूं की बुवाई की विधि

गेहूं की बुवाई मशीन की मदद से की जाती है, इससे बुवाई में बीज बहुत कम मात्रा में लगते हैं और खाद का प्रयोग भी संतुलित मात्रा में होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि गेहूं के बीज को अधिकतम 3 से 4 इंच की गहराई में बोना चाहिए, इससे पूरा बीज जमाव ले और उसमें वृद्धि भी पर्याप्त मात्रा में हो। इससे हमारे बीज और खाद की बचत होती है और लागत भी घटती है। कमल पहले छिड़काव विधि से ही बुवाई करते थे, जिसमें उनका बहुत नुकसान होता था।

कमल ने बताई सिचाई की विधि

उर्वरकों तथा खाद का सही प्रयोग करना बहुत जरूरी है। कमल बताते हैं कि महंगे खाद प्रयोग न कर जैविक खाद/हरी खाद/ गोबर की खाद का प्रयोग करना अच्छा होता है। गोबर की खाद का उपयोग करने के बाद हम रासायनिक खादों का उपयोग नहीं या बहुत ही कम मात्रा में करते हैं। इससे जमीन और भी ज्यादा उपजाऊ तथा मजबूती होती हैं। इसके अलावा भी इसके बहुत से फायदे हैं। कमल बुआई के बाद सिचाई की विधि बताते हुए कहते हैं कि पहला पानी 20 से 23 दिन में लगाना चाहिए। इस समय में बियास और जड़े निकलने वाला होता है और इस समय का पानी उसके बियास को बढ़ा देता है।

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कृषि रक्षा इकाई से ही खरीदे दवाईया

उसके कुछ समय बाद खरपतवार की दवा का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि यह समय फसल के बियासने का होता है और इसी समय फसल में खरपतवार का भी अच्छा असर दिखता है। 25 किलोग्राम प्रति बीघे की दर से यूरिया का इस्तमाल करना चाहिए। कमल कहते हैं, दवा हमेशा कृषि रक्षा इकाई से ही खरीदना चाहिए, ये पूरी तरह विश्वसनिय होता है। बाजार से खरीदे गए दवा का बहुत खराब प्रभाव पड़ता है और इससे फसल भी खराब हो जाती है। इसके बाद खेत में रोलर ‘गेहूं को कुचल देते हैं’ कुचलने से गेहूं में ठीक दुगुना वृद्धि आती है और इसके बाद 25-25 दिन के अंतराल पर पांच पानी लगते हैं।

कृषि विशेषज्ञों की राय हैं बहुत महत्वपूर्ण

गेहूं में बाली निकलने के समय में बहुत कम मात्रा में यूरिन का छिड़काव किया जाता है। ऐसा करने से बाली जल्दी निकल आती है और बाली में दाना भी ज्यादा होता है। कमल कहते है, समय समय पर अपने खेत का निरीक्षण करते रहना चाहिए। इससे आपके बदलते फसल की जानकारी भी आपको मिलती रहेगी। कमल इस बार 10 बीघे जमीन में गेहूं की खेती किए हैं। इसके लिए वह समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों की राय भी लेते रहते हैं। फसल संबंधित किसी भी तरह की जानकारी के लिए 1551 पर कॉल कर सलाह लिया जा सकता है। यहाँ पर हमें विशेषज्ञों द्वारा बेहतर और उचित सलाह मिलती है, जो किसानों के लिए बहुत ही लभदायक होती है।

डॉ. धीरज तिवारी के द्वारा बताई गई कुछ जरूरी बाते

कृषि वैज्ञानिक डॉ. धीरज तिवारी (Dr. Dhiraj Tiwari) बताते हैं कि कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी हैं, जैसे 21 दिन बाद सिचाई करना चाहिए, इस समय फसल में चंदेरी जड़ें निकलने का समय होता हैं। अगली सिंचाई 65 दिन के आसपास करनी चाहिए, इस समय फसल में गांठ बनने का समय होता है। तीसरी सिचाई 85 दिन के आसपास बाली बनने के समय करनी चाहिए क्युकि इस समय पानी का प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसके बाद फसल में पोषक तत्व प्रबंधन की बारी आती है। गेंहू की खेती में एक बार के फसल चक्र में 132 किलो खाद का प्रयोग दो चक्र में करना चाहिए।

Wheat farmer Kamal kishore

गेंहू की खेती में कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है

इसके बाद गेंहू में खरपतवार का समय आता है। गेहूँ में दो तरह के खरपतवार पाए जाते हैं, एक चौड़ी पट्टी वाले और दूसरे सकरी पट्टी वाले। अगर हमारी फसल 25-30 दिन की है तो सल्फोसल्फ्यूरान 75WP प्रति एकड़ की दर से 40-45 दिन की फसल होने पर क्लोडिनाफ्रॉक 10 ईसी को 400 मिलीलीटर पानी मे घोल कर छिड़काव करना चाहिए। धीरज बताते हैं कि गेहूं की फसल में पानी का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। हमें इसकी बुवाई समय पर करनी चाहिए और समय-समय पर इसका ध्यान भी रखना चाहिए। ऐसा करने से गेहूं के फसल में बहुत ही कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

कमल हो चुके हैं सरकार द्वारा सम्मानित

कमल बताते हैं, वह पिछले साल PBW 2967 का बीज इस्तमाल किए थे। इसके अलावा उन्होंने पूरी तरह से जैविक, हरी और गोबर के खाद का प्रयोग किया। समय-समय पर उन्होंने विशेषज्ञों की सलाह भी ली। जिससे कमल ने एक हेक्टेयर में 82 कुंटल 40 किलोग्राम गेंहू का उत्पादन कर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए सरकार द्वारा किसान दिवस के अवसर पर उन्हें प्रशस्ति पत्र के साथ ही 75 हजार रुपये देकर सम्मानित किया गया। कमल का मानना है कि यह सम्मान और पुरस्कार हमें और अधिक लगन के साथ प्रथम स्थान प्राप्त करने की प्रेरणा देता है और अब हमारा लक्ष्य प्रदेश ही नही देश में भी उत्कृष्ट उत्पादन करने का है।

The Logically कमल किशोर के कार्य की प्रशंसा करता है और उन्हें उनके कामयाबी के लिए बधाई देता है।

प्रियंका ठाकुर
बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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