Women from gujrat is earning lakh by organic farming

“जहां चाह वहीं राह” इस कहावत को सच करने वाली कई कहानियां हम सुने हैं…पढ़ें हैं। पुनः इसे सच कर दिखाया है दसवीं पास एक महिला किसान ने, जो मात्र तीन एकड़ की जमीन पर ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming) से सालाना दो लाख रुपए का मुनाफा कमा रही है और साथ ही एक हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार भी दे चुकी है।

कौन है वह महिला किसान?

गुजरात (Gujarat) के नर्मदा जिले की निवासी ऊषाबेन वसावा बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखतीं हैं और महज 10वीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण की हैं। 3 साल पूर्व उन्होंने अकेले ही 3 एकड़ जमीन पर खेती की शुरुआत करके आज दर्जनभर सब्जियां और अनाज उगा रही हैं। इसके साथ ही इसकी प्रोसेसिंग से वे कई अन्य प्रोडक्ट से भी तैयार कर रही हैं तथा सालाना दो लाख रुपये का मुनाफा भी कमा रही हैं। ऊषाबेन ने अन्य कई महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होकर आजीविका चलाने का हुनर दिया है।

Women from gujrat is earning lakh by organic farming

खेती करने के लिए प्रशिक्षण लिया

ऊषाबेन बताती हैं कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। खेती से उतनी अच्छी उपज नहीं थी, जिससे घर-परिवार का खर्चा चल सकें। इसी बीच में नवजीवन आदिवासी महिला विकास मंच से जुड़ीं, जहां महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही थी। वहां ऊषा ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming) के बारे में जानकारी हासिल करने लगीं। प्रशिक्षण के दौरान ऊषा को यह समझ में आया कि गौ-मूत्र, गाय के गोबर और देसी खाद की सहायता से खेती में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इससे भूमि की पौष्टिकता भी नष्ट नहीं होगी और खर्च भी बचेगा।

यह भी पढ़ें :- रेडिमेड कपड़े की दुकान टूटी तो संगीता ने मशरुम की खेती शुरू की, आज 25-30 हज़ार तक हर महीने कमाती हैं

प्रशिक्षण के बाद शुरु किया खेती करना

उन्होनें नवजीवन आदिवासी महिला विकास मंच से खेती का प्रशिक्षण लेकर खुद खेती करना शुरु किया। पहले से कोई अनुभव नहीं होने के कारण खेती के पहले साल ही उन्हें घाटा सहना पड़ा। न फसल की उपज अच्छी हो सकी और न ही वे मार्केट में बेचने में कामयाब रहीं। इस घाटे से हार न मानकर ऊषाबेन फिर से अगले साल सीजन के हिसाब से सब्जियों की खेती की। इस बार उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। वे लोकल मार्केट में सब्जियों की सप्लाई शुरु कर दीं। इससे उनके आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई।

Women from gujrat is earning lakh by organic farming

कई महिलाओं को भी दिया रोजगार

उसके बाद वह नए नए प्रयोग करती गईं। उन्होंने अपने आसपास के गांव और क्षेत्रों की महिलाओं को भी जैविक खेती (Organic Farming) की ट्रेनिंग देने लगी। अभी तक ऊषाबेन एक हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वे सभी महिलाएं खेती और फूड प्रोसेसिंग की सहायता से अपनी जीविका चला रही हैं।

ऊषाबेन बताती हैं कि हर सीजन के अनुसार फल और सब्जियां लगाती हैं साथ ही वे अनाज की खेती भी करती हैं। उनके साथ जुड़ी महिलाएं भी अपने खेतों में अनाज उगाती हैं। उसके बाद वे कुछ प्रोडक्ट्स को सीधे मार्केट और मंडियों में भेज देती हैं। अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने के लिए वे अलग-अलग जगहों पर स्टाल भी लगाती हैं, साथ ही कृषि मार्केट में भी वे अपनी प्रोडक्ट्स बेचती हैं।

ऊषा बताती रही हैं ऑर्गेनिक खेती के फायदें

वह बताती हैं कि ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming) से लोगों को शुद्ध भोजन मिलने के साथ ही हमें भी अच्छा मुनाफा होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे जमीन खराब न होकर हर वर्ष उसकी उर्वरकता बढ़ती जाती है। दुसरा फायदा यह है कि ऑर्गेनिक खाद के इस्तेमाल से रासायनिक खाद पर होने वाले खर्च से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ ही जागरुक लोग ऑर्गेनिक तरीके से उगाए जा रहें प्रॉडक्ट्स को अधिक मात्रा में खरीदना चाहते हैं। ताकी गम्भीर बिमारियों से बचा जा सकें। ऊषाबेन और उनसे जुड़ी महिलाओं को बीज के लिए बाजार जाने की जरुरत नहीं होती है, वे अपनी उपज से ही बीज बचा लेती हैं।

ऊषाबेन बताती हैं कि दवा में गौ-मूत्र का उपयोग कर पंप की सहायता से खेतों में उसका छिड़काव करती हैं। गौ-मूत्र का असर लंबे समय तक रहता है और फसल भी कीटों से सुरक्षित रहती है। वह कहती हैं कि देश के बाकी किसानों को भी रासायनिक खाद के प्रयोग से बचना चाहिए।

कई पुरस्कारों से हुई सम्मानित

हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और प्रेरित करने के लिए ऊषाबेन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की तरफ से पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय कृषि पुरस्कार 2018 से सम्मानित किया जा चुका है। CII फाउंडेशन फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग एंड वुमन एंपावरमेंट ने भी उन्हें सम्मानित किया है। हाल ही में नर्मदा जिले के कलेक्टर ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर ऊषाबेन को सम्मानित किया था।

Women from gujrat is earning lakh by organic farming

खेती के लिए गाय के गोबर और गौ-मूत्र का उपयोग कैसे करें ?

एक एकड़ जमीन के लिए खाद तैयार करने के लिए 20 किलो गोबर, 1 किलो बेसन, 1 किलो गुड़, 5 लीटर गौ-मूत्र और 5 किलोमीटर की आवश्यकता होती है। इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाने के बाद कुछ देर सुखने के लिए छोड़ दिया जाता है। उसके बाद इसे खेत में मिलाया जाता है।

इसी तरह कीटनाशक तैयार करने के लिए 200 लीटर पानी, 10 किलो नीम की पत्ती, 5 लीटर गौ-मूत्र और 2 किलो गोबर कोअच्छी तरह मिलाकर छान लें। इस पानी के छिड़काव से फसल के रोग और कीट नष्ट हो जाते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here