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पिता की मृत्यु के बाद मां ने भी की आत्महत्या, मगर अपने दृढ़ संकल्प से पूरा किया पुलिस बनने का सपना

किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसके माता-पिता का बहुत अहम भूमिका होता है। हम उनके बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते। बचपन में ही अनाथ हो जाने से बड़ा दुःख कोई भी नहीं है। ऐसे में लोग अपनी किस्मत के आगे घुटने टेक देते हैं। कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं, जो हालातों से हार मानने की जगह उससे लड़ते हैं, और सफल भी होते हैं। आज हम एक ऐसे ही पुलिस ऑफ़िसर की बात करेंगे, जिन्होंने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया था, मगर अपनी मेहनत और हौसले से वह आज एक पुलिस ऑफ़िसर हैं।

मणिकंदन अनाथालय में बड़े हुए

ऑफ़िसर मणिकंदन (Manikandan), वर्तमान में चेन्नई (Chennai) के अंबत्तूर औद्योगिक क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में तैनात हैं। बचपन में ही मणिकंदन के पिता की मृत्यु हो गई। थी,जिस वजह से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई। इससे हार मानकर मणिकंदन की मां ने उन्हें अनाथालय भेज दिया। अनाथालय ने मणिकंदन का दाखिला एक प्राइवेट स्कूल में करा दिया।

Story of becoming Manikandan becoming police

अचानक मणिकंदन की मां ने आत्महत्या कर लिया

मणिकंदन जब 7वीं कक्षा में थे, तब एक रोज़ उनकी मां अनाथालय में उनसे मिलने आई परंतु उस समय वह स्कूल गए थे, तब मणिकंदन से मिलने उनकी मां स्कूल चली गईं। उनसे मिलकर वापस आने के बाद उन्होंने अनाथालय के बच्चों के कपड़े धोए और रसोई में खाना भी बनवाया। उसके बाद वह अपने घर वापस चली गईं। उसके कुछ ही समय बाद ख़बर आई कि उन्होंने ख़ुद को जलाकर आत्महत्या कर लिया। किसी भी बच्चे के लिए यह खबर बेहद दुखद होगी क्योंकि एक एक ओर पिता का साया छूटना फिर मां का दूर चले जाना भीतर तक तोड़ देता है।

पुलिस ऑफ़िसर बनने का था सपना

मणिकंदन (Manikandan) के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, परंतु उनका हौसला कम नहीं हुआ। उसके बाद अनाथालय के केयर टेकर परिभास्कर ने उनके लिए एक डॉक्टर को तलाशा, जो उनकी शिक्षा का ख़र्च उठाने के लिए तैयार थे। मणिकंदन का बचपन से ही पुलिस ऑफ़िसर बनने का सपना था। इसे पूरा करने के लिए मणिकंदन ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की।

मणिकंदन अपने मेहनत से बने पुलिस ऑफ़िसर

मणिकंदन (Manikandan) कहते हैं कि मैंने कई बच्चों को बचपन में ही बर्बाद होते देखा है। मैं अनाथालय और परिभास्कर जी का आभारी हूं। अगर मैं यहां नहीं आया होता, तो आज पता नहीं मैं कहां होता? मणिकंदन ने Criminology विषय से स्नातक किया है। साल 2007 में उन्होंने सशस्त्र रिज़र्व बल में नौकरी के लिए आवेदन दिया था, जिसमें कुल 13000 उम्मीदवारों को चुना गया। उनमें से मणिकंदन का नंबर 423 था। अब वह अंबत्तूर औद्योगिक क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में तैनात हैं।

The Logically उनके दृढ़ संकल्प और हिम्मत की दाद देता है। हम उम्मीद करते हैं कि हर एक बच्चे को उसका आसमान जरूर मिले।

बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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