Wednesday, October 21, 2020

ख़ुद का प्रयोगशाला और सैकड़ों तरह के पेड़, बिहार का यह किसान खेती से लाखों रुपये कमा रहा है

यह बात सोलह आने सत्य है कि अगर किसान पारम्परिक खेती कर रहें हैं तो प्रकृति पर भरोस से ही। अगर मौसम ठीक हुआ तो फसल अच्छी हुई अन्यथा फसल बर्बाद हो जाता है। कुछ बातों को ध्यान में रखकर अगर खेती किया जाये तो यह सही हो सकता है। हमारे देश के कुछ किसान ऑर्गेनिक और हाइड्रोपोनिक्स विधि से खेती कर रहें हैं। आज की यह कहानी बिहार के किसान की है जो व्यवसायिक खेती को बढ़ावा दे रहें हैं। यह किसान टिश्यू पद्धति को अपनाकर खेती कर रहें हैं।

अनिल ने लगाया है 35 एकड़ में हज़ारों के पेड़

अनिल कुमार का मनना है कि किसान खेती करें तो वह अपना भरण पोषण भी करें। उनकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहे। इन्होंने जैसी बागवानी की है कि आप देख कर मोहित हो जाएंगे। अनिल ने लभगभ 35 एकड़ भूमि में सौ नहीं बल्कि हज़ारों की तादाद में पेड़ पौधों को लगायें हैं। इनमें आम, चन्दन, सागवान, महोगनी के साथ देशी और विदेशी फलों के पेड़ भी हैं।


 
खुद का है प्रयोगशाला

अनिल का प्रयोगशाला खरौना डीह नामक स्थान पर स्थित है। इतनी संख्या में लगाये हुए पेड़ की खास बात है कि अनिल इन्हें खुद अपनी प्रयोगशाला से डेवलप कियें हैं। यह पौधों को टिश्यू कल्चर पद्धति के अनुसार तैयार किये हैं। कुछ ऐसे पौधें हैं जिन्हें स्टेम कल्चर के माध्यम से उगाया जा रहा है और इस पर कार्य चल रहा है। जब यहां केंद्रीय कृषि मंत्री Radhamohan singh आएं तो वह इस बात से हैरान हो हुए कि बिहार (Bihar) में भी ऐसी खेती की जाती है?

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हल्दी ओर कुकर्मिन पर विशेष ध्यान

हम यह भली-भांति जानते हैं कि हल्दी में बहुत ज्यादा औषधि गुण समाहित होते है। अगर कहीं चोट लगी है तो इसका लेप लगाया जाता है। अगर सर्दी या अंदरुनी दर्द है तो दूध में हल्दी डालकर पिलाया जाता है ताकि इंसान जल्दी ठीक हो। ऐसे ही है ककर्मिन जो कैंसर के इलाज़ में लाभदायक है। लेकिन यह यहां बहुत कम उगाया जाता है। आने वाले वक्त में यह बहुत ही ज्यादा महंगा बिकने वाला है। अमेरिका में यह गोल्डन ड्रिंक के नाम से जाना जाता है।

1 एकड़ पर 2 करोड़ तक हो सकता है फायदा

यह बात सभी जानते हैं कि सागवान से बहुत ही मुनाफा होता है। लेकिन अगर इसकी अच्छी देखरेख हो तब। हमारे बिहार में मालाबार प्रजाति लगाया जाता है। इसलिए यह विकसित नहीं होता। इसे अगर खेत के किनारे लगाया जाए, टिश्यू पद्धति के अनुसार तैयार किया जाये, तो खेत मे अन्य अनाज भी उगेंगे और यह करोड़ों का मनाफ़ा भी देगा। हालांकि इसे तैयार होने में लगभग 15 वर्ष तो लगते ही हैं, लेकिन फायदा भी मोटी रकम का होगा। टिश्यू की मदद से अगर बल्कोवा बांस को 1 एकड़ में लगाया जाए यह भी खेत के मेड पर तो इससे भी 1 साल में 1 लाख तक की कमाई हो सकती है, वह भी 60 वर्षों तक।

विदेशों से लेकर अन्य फलों को भी लगाया है

इतना ही नहीं इन्होंने थाईलैंड से हमारे यहां के वातावरण को ध्यान में रखकर फल लगायें हैं। फलों में इन्होंने थाई इमली, राम भूटान, स्ट्रॉबरी , वाटर एप्पल, और बीज रहित नींबू ये सब फल थाईलैंड से यहां इन्होंने लगाया है। अगर बीज रहित निम्बू लगाया जाता है तो 25 वर्षों तक इससे लाभ होगा, लगभग 1 एकड़ में 3 लाख तक। इसके अलावा इन्होंने हमारे यहां के फलों में केला, आम और अनार भी लगाएं हैं।

अनिल के बेहद नायाब तरीके से विकसित की गई खेती के लिए The Logically इन्हें सलाम करता हैं और इनसे उम्मीद करता है कि यह आगे और भी किसानों को अपने कार्यों से जोड़ेंगे।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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