Thursday, October 28, 2021

अपनी अपराधों के कारण कभी जेल में थे ,आज सड़क पर रहने वाले हज़ारों लोगों के लिए हैं मसीहा :प्रेरणा

हर इंसान के अंदर अच्छाईयाँ समाहित होती हैं ! बुरे कर्मों को करने वाला शख्स दिल से भी बुरा हो यह निश्चित नहीं होता है ! इंसान के अंदर छुपी हुई अच्छाईयाँ उसके जिंदगी में कभी ना कभी आ हीं जाती है ! आज बात ऐसे हीं एक शख्स “ऑटो टी राजा” की जिन पर कभी डकैती करने का आरोप था लेकिन वर्तमान में वे सड़कों पर रह रहे हजारों लोगों का सहारा बन चुके हैं !

गलत कार्यों में लिप्त था शुरूआती जीवन

ऑटो टी राजा हमेशा से इतने परोपकारी और जिम्मेदार व्यक्ति नहीं थे ! इनके पिता टेलीफोन लाइनमैन थे ! वे माँ-बाप के सानिध्य में उतने ज्यादा नहीं रहे जिसके कारण उनका लगाव बुरे कार्यों से हो गया ! इसी कारण उन्होंने अपनी पढाई भी छोड़ दी ! राजा को बुरे कार्यों की आदत ऐसी लगी कि वे उसी में खुद को खोते जाने लगे फिर उन्होंने डकैती और चोरी भी करना शुरू कर दिया ! उन्होंने अपनी माँ का मंगलसूत्र भी चुरा लिया ! अपने परिवार की सारी दौलत बुरे कार्यों में खर्च करने लगे ! आखिरकार उनके माता-पिता ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया जिसके कारण उन्हें सड़कों पर रहना पड़ा ! बस स्टैण्ड में रखा एक कचरे का डब्बा हीं उनका घर बन गया ! वे कहते हैं कि “मेरी हालत सड़क के कुत्ते जैसी हो गई थी जिसका कोई घर नहीं , जिसकी कोई योजना नहीं” ! इसके बाद वे चेन्नई चले गए और वहाँ एक डकैती की ! इस डकैती में वे पुलिस द्वारा पकड़े गए तत्पश्चात पुलिस ने उन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया !

जेल में बदली सोंच

डकैती के आरोप में पकड़े जाने के बाद बाल सुधार गृह में आने पर उनके मन में उथल-पुथल शुरू हुई ! वहाँ राजा को यह लगा कि जिंदगी में इन सबसे इतर बहुत कुछ और भी करने को हैं ! जेल में हीं उन्होंने जरूरमन्दों की मदद और सेवा करने का दृढ संकल्प ले लिया ! वे कहते हैं कि मैंने अनेकों लोगों को अपना जीवन सड़कों पर बिताते हुए देखा है ! लाचार और मजबूर उन जिंदगियों को देखना मेरे लिए अत्यन्त दुखद है ! उन लोगों में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें मनोरोग , टीबी , कैंसर , एचआईवी , छूआछूत आदि बीमारी भी है !

इस तरह हुई सेवा कार्य की शुरूआत

जेल से निकलने के पश्चात वे ऑटो रिक्शा चलाने लगे और इसी से अपना जीविकोपार्जन करने लगे ! एक दिन उन्होंने सड़क किनारे पड़े एक नंगे व्यक्ति को देखा , वह व्यक्ति अंतिम साँसों में था ! लाचारी को इतने करीब से देखना उनके लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया और वे जरूरतमंदों के लिए कुछ करने को आगे बढ़ गए ! उनके पास उस वक्त संसाधनों और पैसों की बेहद कमी थी बावजूद इसके वे सेवा में लग गए ! 1997 में राजा ने अपने छोटे से घर के सामने एक छोटी सी जगह में “न्यू आर्क मिशन ऑफ इंडिया” की स्थापना की और सड़कों पर रह रहे लोगों की सेवा की शुरूआत की ! वे अपने ऑटो से सड़कों पर जीवन बसर कर रहे बीमार व लाचार व्यक्तियों को अपने घर ले आते और उनके जख्मों को साफ करते , उन्हें स्नान करवाते , खाना खिलाते ! यह देखकर राजा के माता-पिता राजा को पागल कहकर बुरा-भला कहा करते थे ! उनके इस कार्य में उन्हें परिवार के सदस्यों और दोस्तों का कोई साथ नहीं मिला ! इसके बाद उनके इस कार्य में उनकी पत्नी ने साथ देना शुरू किया ! दो लोगों के हो जाने से वे पहले से कहीं अधिक लोगों की सेवा कर पाते थे ! जरूरतमन्द लोगों की तादाद बढने के कारण उन्हें और ज्यादा जगह की जरूरत आन पड़ी !

“होम फॉर होप” की शुरूआत

सेवा के बढते दायरे और लोगों की बढती संख्या के कारण उन्हें जगह और संसाधन की आवश्यकता बढ गई ! कुछ दिनों बाद एक चर्च ने उन्हें 5 हजार रूपए और थोड़ी जगह मुहैया कराई ! इसकी मदद से राजा ने “होम फॉर होप” की नींव रखी और सेवा के क्षेत्र में और तीव्रता से बढ चले ! सड़कों पर रहे लोगों के लिए यह संस्था बेहद मददगार साबित हो रही है ! वर्तमान में इस संस्था में एक डॉक्टर , साइक्याट्रिस्ट और आठ नर्सें हैं जो हमेशा जरूरतमन्दों का खयाल करती है ! होम फॉर होप में अभी लगभग 700 लोग रह रहे हैं जिसमें लगभग 80 अनाथ बच्चे हैं ! राजा उन बच्चों की परवरिश के साथ-साथ उन्हें पढने हेतु निजी विद्यालयों में भेज रहे हैं ताकि उनकी जिंदगी से अँधेरा हमेशा के लिए खत्म हो जाए ! अभी तक होम फॉर होप लगभग 11000 लोगों की मदद कर चुकी है ! जिसमें से कई लोगों ने इस दुनिया को अलविदा भी कह दिया है !

राजा के पास आज रहने के लिए खुद का घर नहीं है ! घर बनाने के नाम पर राजा कहते हैं कि मुझे आशा है कि ईश्वर मेरे लिए स्वर्ग में बेहद सुन्दर सा घर बनाएँगे ! उनका सपना है कि कर्नाटक राज्य में कोई भिखारी ना हो !

समाज सेवा को अपने जीवन के लक्ष्य बना चुके राजा लोगों से भी इस कार्य में जुड़ने को कहते हैं ! उनका कहना है हमें किसी का इंतजार नहीं करना चाहिए बल्कि हमें जरूरतमन्दों और गरीबों की सेवा में लग जाना चाहिए !

राजा ने जिस तरह गलत रास्ते पर अग्रसर अपने जीवन को जरूरतमन्दों , लाचार व गरीबों की मदद करने की ओर मोड़कर समाज सेवा के क्षेत्र में एक पराकाष्ठा पेश की है जो अनेक लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है ! Logically राजा जी और उनके कार्यों को नमन करता है !