Wednesday, March 3, 2021

केले के छिलके से कपड़े के अनेकों समान बनाकर बिहार की यह महिला ने दिया 30 लोगों को नौकरी

“कचरे से पैसा” यह सोने पे सुहागा वाली बात है। कचरे से पैसा, इस बात से हम भाली भांति परिचित है। इसके दो फायदे है पर्यावरण संरक्षण और अतिरिक्त पैसे। आज कल कचरे को पुनः उपयोग करने के तरफ लोगों का रुझान बढ़ा रहा है। इससे पर्यावरण भी संरक्षित होगा और हमें आर्थिक फायदा भी होगा। कचरा रिसाइकिल, निस्तारण, कचरे से ऊर्जा उत्पादन… इन सबसे कचरे का प्रबंधन होता है। कचरा प्रबंधन की दिशा में उठाया गया हर कदम बेहतरीन साबित हो रहा है। ऐसे ही बेहतरीन कार्य कर रही है बिहार में हाजीपुर की महिलाएं।

बिहार (Bihar) का हाजीपुर (Hajipur) केले के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। वहां केले की खेती बहुमात्रा में की जाती है। केले को हम अनेकों तरह से उपयोग करते है, यह हमारे सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। हाजीपुर से केले का निर्यात सभी जगह किया जाता है। केले का फल तोड़ने के बाद हाजीपुर में उसके डंठल का उपयोग फाइबर निकालने के लिए होता है। केले के डंठल से फाइबर निकालने का काम वहां की महिलाएं करती है, जिसका नेतृत्व एक फैशन उद्यमी वैशाली प्रिया करती है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 25 वर्षीय वैशाली प्रिया (Vaishali Priya) यूरोप (Europe) में कपड़ा और एक्सेसरीज बाज़ार में बिहार से निकले फाइबर को पहुंचा रही है। इस काम के जरिए वैशाली हाजीपुर के महिलाओं को रोजगार दे रही है। वैशाली प्रिया “Surmayi Banana Extraction Project” के ज़रिए ऑर्गेनिक और नेचुरल प्रोडक्ट से फाइबर निकालने के स्किल को प्रमोट कर रही है।

इस प्रोजेक्ट में लोकल कृषि विज्ञान केन्द्र से भी मदद मिल रहा है। शुरुआत में वैशाली के साथ इस काम में 30 महिलाएं शामिल हुई थी और आज के समय में हर रोज नये लोग जुड़ रहे हैं। इससे महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और कचरे से छुटकारा भी। यह काम आसान नहीं है इसमें भिगोने, झड़ने, बांधने जैसे कई प्रक्रियाएं शामिल है। वैशाली के अनुसार वहां लोगों को केले के पौधे से प्रोडक्ट बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। केले के फाइबर का उपयोग विभिन्न प्रकार के वस्त्र बनाने के लिए किया जाता है।


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वैशाली प्रिया ने बचपन से ही हाजीपुर में केले की खेती देखते आईं है। हाजीपुर केले का बहुत बड़ा उत्पादन क्षेत्र है, जिससे वहां केले के फसल कटने के बाद भारी मात्रा में कचरे का भी उत्पादन होता है। यह सब देख वैशाली वहां के कचरे को पुनः उपयोग करने की ओर अग्रसर हुईं और कामयाब भी हुई। यह काम इतना आसान नहीं था, शुरुआत में वैशाली को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वैशाली अपने बढ़ाए कदम पर अडिग रही। इस राह पर धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ने लगा। फिर और भी लोग साथ जुड़ते गए। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के साथ काम करना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जहां महिलाओं के लिए घर गृहस्थी से ज्यादा कुछ भी मायने नहीं रखता।

The Logically, Vaishali Priya द्वारा उठाए गए नायाब कदम की सराहना करता है। यह कदम महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करता है। साथ ही पूरे शहर के कचरे को भी कम करता है।

Anita Chaudhary
Anita is an academic excellence in the field of education , She loves working on community issues and at the same times , she is trying to explore positivity of the world.

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