Wednesday, August 4, 2021

कंधे झुके हैं पर हिम्मत नही, आधा शरीर काम नही करता फिर भी 85 वर्ष के यह बुजुर्ग भेलपुरी बेच परिवार चलाते हैं

मनुष्य का शरीर जब वृद्ध हो जाता है तो उसे कई सारी शारिरीक परेशानियों के साथ-साथ कुछ अन्य समस्याओं को भी झेलना पड़ता है। हम ऐसे कई सारे वृद्ध को देखते हैं जिन्हें सड़क किनारे या अन्य जगहों पर अपने जीवन यापन करने के लिये उम्र के उस पड़ाव में भी कार्य करना पड़ता हैं जब शरीर को आराम और अपनों के प्यार की जरुरत होती है। एक वृद्ध जिससे कार्य नहीं होता हैं, इसके बावजूद भी वह अपने जीवन को चलाने के लिये ठेला चलाता है, लोगों के जूते पॉलिश करता है या इसी तरह का कोई अन्य कार्य करता है, यह दृश्य देख कर बहुत ही दुख होता है।

सोशल मिडिया का यदि सही उपयोग किया जाये तो वह लोगों के गिरते हुयें आँखो से दुख के आंसू को खुशी में बदलने की क्षमता रखता है। इसका सबसे नया और ताजा उदाहरण है ‘बाबा का ढाबा।’ कुछ ही दिन पहले आपने सोशल मिडिया पर वायरल हुईं ‘बाबा का ढाबा’ की कहानी पढ़ी, सुनी या देखी होगी, जिसमें बुजुर्ग की स्थिति बहुत ही दयनीय थी। आज की कहनी इसी से मिलती जुलती एक ऐसे वृद्ध की है, जिसका आधा शरीर काम नहीं करता, इसके बावजूद भी वह 85 वर्ष के उम्र में भी गलियों में भेलपुरी बेचता है।

इस बुजुर्ग की दिल छू लेने वाली खबर पहले सोशल मिडिया पर वायरल हुईं। इस कहनी को सबसे पहले विशाल चौबे नाम के फेसबुक यूजर ने अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया।

यहां आप उस बूढ़े व्यक्ति को वीडियों में देख सकते हैं।

इस वीडियो में एक 85 वर्ष का बूढ़ा व्यक्ति दिखाई दे रहा है, जो उम्र के ऐसे कठिन समय में भी अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभा रहा है। इस व्यक्ति का बेटा लकवाग्रस्त है और वह कुछ कर नहीं सकता। इसलिए घर-परिवार का भरण-पोषण करने के लिये वृद्ध ने अपने झुके हुयें कंधो पर जिम्मेदारी ली है। यह बुजुर्ग आदमी प्रतिदिन ठेला लगाकर भेल पूरी बेचता है। इससे उस बुजुर्ग की कमाई केवल 50 रुपये से 200 रुपये होती है और उसी से पूरे परिवार का गुजर-बसर कर रहें है।

इंडिया टाइम्स से बात करतें हुयें बुजुर्ग आदमी ने अपने स्थिति के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना के लॉकडाऊन में कैसे घर चलाया।

उस बुजुर्ग का नाम छंगा लाला है। उनके हाथ में 6 उंगलियां होने की वजह से उनका नाम छंगा लाला है। उनके चेहरे पर चमक नहीं हैं, शरीर पर झुर्रियां पड़ी है और उनको ऊंचा सुनाई देता है। लेकिन छंगा बाबा कभी भी आशा से मुंह नहीं मोड़ते है। बाबा प्रत्येक दिन सुबह अपना भेल पूरी का ठेला लेकर निकल जाते हैं। कुछ गलियों में घुमने के बाद वे हरियाणा के फरीदाबाद में सेक्टर-37 में शाम के 4 बजे तक ठेला लगाते हैं।

छंगा बाबा के कंधे झुक गये हैं लेकिन बाबा की हिम्मत बुलंद है। उनके घर में वे और उनकी बहू दो ही जन कमाने वाले हैं। बाबा के 3 पोते और पोतियां हैं। बाबा की बहू घरेलू सहायिका का कार्य करती है। बाबा ने बताया कि उनका और उनकी बहू दोनो का मिलाकर महीने में 6000 रूपये की आमदनी होती है। इसमें खाने का खर्च, बच्चों का खर्च और दवाओं आदि सभी खर्च होता है।

बाबा की पत्नी का देहांत कई वर्ष पहले हो चुका है। बाबा के 2 बेटे थे, एक बेटा कई वर्ष पहले ही इस दुनिया को छोड़ कर चला गया और दूसरें बेटे को करीब 1 दशक पहले लकवा मार दिया। इन सब के वजह से उम्र के ऐसे पड़ाव पर भी अभी तक परिवार की जिम्मेदारी बाबा के कंधों पर ही है।

बाबा के अपने ठेले पर बेचने वाले भेल की कीमत 5 रुपये से शुरु होती है। हर दिन कुछ पैसों की आमदनी हो जाती थी। लेकिन कोरोना के लॉकडाउन में घर का गुजारा करना बहुत कठिन हो गया था। बाबा की बहू भी काम पर नहीं जा रही थी। घर का गुजारा करने की बात पर बाबा ने बस इतना ही कहा, “यह बात मैं और मेरा भगवान जानता है कि हमने कैसे अपना गुजर-बसर किया।”

बाबा ने यह भी कहा कि, “लॉक डाऊन में एक से दो बार राशन मिला लेकीन किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली।” बाबा के किराये के मकान में रहतें है। उस मकान का किराया 1200 रुपये है। बाबा ने आगे कहा, “अब मैं कमा नहीं पाता हूं।”

बाबा खुश दिल है। वह उम्मीद रखते हैं कि भगवान है न, वे सब ठीक कर देंगें। ये संकट का समय है जो कट जायेगा। इंडिया टाइम्स द्वारा पुछे गये सवाल ‘इस बार दिवाली कैसी जायेगी’ तो इसके उत्तर में बाबा ने कहा कि “पहले जैसी हो तो अच्छा है। मुझें लोगो की सहायता की उम्मीद है ताकी सबकुछ पहले जैसा हो जाये।”

विशाल चौबे ने इंडिया टाइम्स को बताया कि विडियो देखने के बड कई लोग बाबा की सहायता करने के लिये आगे आ रहे हैं। लोग सोशल मिडिया पर हमेशा संपर्क कर रहें जिससे बाबा की सहायता कर सकें। विशाल ने एक बहुत ही सुन्दर बात कही “हमें सिर्फ वायरल विडियो के माध्यम से ही लोगों की सहायता नहीं बल्कि अपने आसपास मौजुद लोगों की भी मदद करनी चाहिए। ऐसा करने से आधे समस्या का हल यूं ही हो जायेगा।”

कंधे झुके हैं पर हिम्मत नही, आधा शरीर काम नही करता फिर भी 85 वर्ष के यह बुजुर्ग भेलपुरी बेच परिवार चलाते हैं

Brother & sisters I request you all that – You don't need to go delhi to support baba dhaba just look around yourself…

Posted by Vishal Chaubey on Sunday, October 11, 2020

यदि आप भी छंगा लाला बाबा की सहायता करना चाहते हैं तो नीचे उनके अकाऊंट का डिटेल है उसके जरिए मदद कर सकते हैं।

NAME – Changa lal

Account No. – 3224605014

IFSC Code – CBINO280299