Saturday, July 31, 2021

दोनों पैरों से हैं विकलांग फिर भी अनार की खेती कर लाखों रुपये कमा रहे हैं: प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं तारीफ

परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हो अगर इंसान का इरादा अटल हो और साहस के साथ निरन्तर प्रयास किए जाएं तो कोई भी लक्ष्य आसान हो जाता है। इस कथन को स्तरीय किया विकलांग किसान ने। सभी जानते हैं कि किसानी में कितनी मेहनत की जरूरत होती है जिसके लिए शारीरिक रूप से फीट होना निश्चित होता है। लेकिन आज बात एक ऐसे महान किसान गेनाभई दर्गाभई पटेल की जिन्होंने विकलांग होकर भी अपनी किसानी की सफलता की ऐसी चकाचौंध रौशनी फैलाई कि उसकी आभा सरकार के आंगन तक फैल गई। फलस्वरूप उन्हें पद्मश्री सम्मान भी मिला। आईए जानते हैं उनके बारे में…

पैर से हैं विकलांग

गेनाभई दर्गाभई पटेल (Genabhai Dargaabhai Patel) गुजरात के बनासकांठा जिले के अंतर्गत आने वाले सरकारी गोलिया गांव के निवासी हैं। गेनाभई का दोनों पैर पोलियो ग्रस्त है। पैर पोलियो ग्रस्त होने के कारण इनके पिताजी सोचते थे कि यह खेती में उनकी मदद नहीं कर सकतें। इसलिए वह गेनाभई की पढ़ाई पूरी करवाना चाहते थे। पढ़ाई पूरी करने के लिये गेनाभई को बहुत ही कम उम्र में 30 किलोमीटर की दूरी पर एक हॉस्टल में डाल दिया गया। वह अपने तिनपहिया साइकिल चलाकर आसानी से स्कूल जाते थे। गेनाभई 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद अपने गांव वापस आ गये।

Pomegranate farming

कृषि से रहा गहरा लगाव

गेनाभई खेती में अपने पिताजी की मदद नहीं कर सकते थे लेकिन फिर भी वह साथ में खेत जाया करते थे। तब उनके मन में विचार आया कि वह सिर्फ एक तरीके से अपने पिता की सहायता कर सकते हैं। उन्होंने ने ट्रैक्टर चलाना सीख लिया। हाथ से क्लच और ब्रेक को सम्भालने लगे और बहुत ही जल्द एक अच्छे ट्रैक्टर चालक बन गयें। गेनाभई के पिताजी परम्परागत तरीके से खेती करतें थे। वह गेहूं, बाजरा जैसे गुजरात के पारंपरिक फसलों को उगाते थे। सिंचाई की व्यव्स्था नहीं होने के कारण बोरबेल की सहायता से सिंचाई किया जाता था। लेकिन बोरबेल की मदद से सिंचाई करने में पानी अधिक बर्बाद होता था। गेनाभई को भी कृषि करना था। वह किसी ऐसे फसल की खोज कर रहे थे जिसे वह अपाहिज होते हुए भी उगा सकें और एक बार बोने के बाद अधिक वक्त तक उससे उपज मिलती रहें।

ऐसे आया अनार की खेती का विचार

गेनाभई (Genabhai) ने शुरु में आम का पेड़ लगाने के बारें में विचार किया। इसके साथ समस्या यह है कि यदि मौसम परिवर्तित हो तो आम के फूल गिर जातें है और फिर अगले वर्ष का इंतजार करना पड़ता। यह सोच कर वह दूसरे फसलों के बारें में जानने का प्रयास करने लगे। इसके लिये उन्होनें स्थानीय कृषि विभाग से सम्पर्क किया। कृषि विश्वविद्यालय भी गयें। इसके अलावा उन्होंने सरकार के कृषि मेले में जाकर जानकारी इकट्ठी की। इससे भी नहीं हुआ तो गेनाभई ने लगभग 3 महीने तक गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र का दौरा किया। उनके जज्बे ने उन्हें कामयाबी दिला दी। गेनाभई ने महाराष्ट्र के किसानों को अनार की खेती करतें हुयें देखा। महाराष्ट्र का मौसम भी गुजरात के जैसा ही रहता हैं। अनार में फूल सालभर उगते है और उन्हें ज्यादा देखभाल की भी जरुरत नहीं होती हैं।

यह भी पढ़े :- मइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ बना रहे हैं कटहल का आटा, जिसके हैं कई औषधीय फायदे: मिल चुका है स्टार्टअप अवार्ड

गेनाभई ने वर्ष 2004 में महाराष्ट्र (Maharastra) से अनार के 18 हजार पौधें लेकर आये। अपने भाई की मदद से अनार के पौधों को खेतों में लगाया। गेनाभई ने बताया, “मुझे इस काम को करते देखकर गांव के लोगों को लगा कि मेरा दिमाग घूम गया है, क्यूंकि इससे पहले गांव में अनार की खेती किसी ने नहीं की थी।” लेकिन गेनाभई का मानना है कि एक किसान की आंखे कभी धोखा नहीं खा सकती। गेनाभई के इस काम में उनके भाई और भतीजे ने काफी सहायता की।

बाजार ना होने से बिक्री की समस्या

गेनाभई ने जो पौधे लगाए थे उसमें 2 साल बाद 2007 में फूल आना शुरु हो गया। इसे देखकर दूसरे किसान भी इनकी मदद से अनार की खेती करने लगे। लेकिन गेनाभई के लिये सबसे बड़ी चुनौती अनार को बेचने की थी क्यूंकि पूरे राज्य में अनार का बाजार कहीं नहीं था। अनार बेचने के लिये गेनाभई ने अनार की खेती करने वाले सभी कृषकों को बनासकांठा (Banaskantha) में एकत्रित किया और ट्रकों में अनार लादकर दिल्ली (Delhi) और जयपुर (Jaipur) के बाजारों में बेचने की व्यवस्था किए। लेकिन यह उपाय ज्यादा दिन तक टिक नहीं सका। इसलिए गेनाभई को ऐसे व्यापारी की जरुरत थी जो उनसे सीधा माल खरीद सके।

उत्पाद बेचने के लिए बनाई सार्थक योजना

गेनाभई ने अपनी पहली ऑर्डर के बारें में बताया कि व्यापारी को जब विश्वास होता है कि माल की पर्याप्त मात्रा है तब ही वह फल खरीदता है। अपने फल को बेचने के लिए उन्होंनें एक योजना बनाई। उनहोंने प्रत्येक खेतों में अलग-अलग किसानों को बैठाया और एक ही खेत को व्यापारियों को अनेक बार दिखाया। वास्तव में उनके पास सिर्फ 40 खेत थे लेकिन अपनी योजना के अनुसार उनहोंने व्यापारी को 100 खेत दिखाया जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि माल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। हम सभी जानते है कठिन परिश्रम का फल जरुर मिलता है। गेनाभई को उनके मेहनत का फल मिला। उनके जिले के अनारो का सप्लाई दुबई (Dubai), श्रीलंका (Sri Lanka) और बांग्लादेश (Bangladesh) तक होता है। विदेशों में सप्लाई होने के वजह से किसानों को अच्छी आमदनी भी होती है। हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ने दासा में एक यात्रा के दौरान गेनाभई के नाम का जिक्र भी किया था।

लाखों का हुआ मुनाफा

गेनाभई के अनार के पहले ऑर्डर की बिक्री 42 रुपये किलो के भाव पर हुई। इसके बाद गेनाभई ने 5 एकड़ की भूमि पर अनार की खेती की जिससे लगभग 54 हजार किलो अनार का उपज किए। गेनाभई ने बताया कि एक एकड़ पर किसानों को पारंपरिक खेती से 20,000 से 25,000 का आमदनी होती है लेकिन मुझे मेरी खेती से 10 लाख से अधिक का फायदा हुआ है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा

गेनाभई से प्रेरणा लेकर गांव वालों ने भी पारंपरिक खेती को छोड़कर अनार की बागबानी करने लगे। किसानो की सहायता के लिये गेनाभई ने एक वर्कसॉप का आयोजन किया और इसमें कृषि जानकारों एवम कृषि वैज्ञानिकों को बुलाया, ताकि उनहोंने जो गलती किया वह दूसरे किसान भाई न करे। वर्तमान में गेनाभई किसानों को समस्या से निपटने के लिये सुझाव भी देते है। वे कहतें हैं कि किसानो को पारंपरिक खेती और फसल के तरीकों से कुछ अलग भी सोचना चाहिए। जैविक खाद बनाने के लिये प्रत्येक किसान भाईयों के पास 2 देशी गाय होना चाहिए। इसके अलावा वह बताते हैं कि बाजार की मांग के हिसाब से उत्पादन करेंगे तो सभी किसान भाई अपने सामान को विदेशों में भी बेच सकते हैं। यह देश के लिए और उनके लिये भी लाभकारी होगा।

Genabhai Dargaabhai Patel

समस्याओं से बिना विचलित हुए निकाला समाधान

अपने इस व्यवसाय में गेनाभई को कई मुसीबतों का सामना भी करना पड़ा। एक वक्त ऐसा आया जब पूरे जिले में जल स्तर नीचे चले जाने के कारण जल संकट आ गया। ऐसे में फलों की सिंचाई के लिये उन्होंने ड्रिप सिंचाई का व्यवस्था किया। गेनाभई का कहना है कि उनके पास ड्रिप सिंचाई करने स्थापित करने के लिये सिर्फ 50% सब्सीडी थी। आज यह बढ़कर 80% हो गई है। सरकार अनार की खेती करने वाले किसानों को 42 हजार की सब्सीडी देती हैं जिसकी सहायता से उन्होंने ने ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की।

मिल चुके हैं कई पुरस्कार

गेनाभई दर्गाभई पटेल को उनके काबिलियत और सफलता के लिये 18 राज्य-स्तरीय सम्मान और कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया जा चुका है। 26 जनवरी 2017 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। यह गेनाभई के लिए एक सपना जैसा था।

यदि गेनाभई पटेल से आप सम्पर्क करना चाहतें हैं तो दिये गये ईमेल से सम्पर्क कर सकतें हैं। [email protected] com

भविष्य की योजना के बारें में गेनाभई कहतें हैं कि भारत वह भारत बने जहां किसानो की सफलता किसी के लिये आश्चर्य की बात न हो। The Logically गेनाभई के जज्बे, उनकी मेहनत और काबिलियत को सलाम करता है।