हमारे देश में गरीबी एक आम समस्या है। यहां ऐसे भी गरीब लोग है जिन्हें पहनने के लिए कपड़े, खाने के लिए भोजन, रहने के लिए आवास तक उपलब्ध नहीं है। ये अपनी आम ज़रूरतों को भी पूरा करने के लिए दिन-रात कठिनाइयों का सामना करते हैं। इस दौरान अगर उन्हें कोई शारीरिक अस्वस्थता होती है, तो उनका इलाज हो पाना असंभव है। अगर वह सरकारी हॉस्पिटलों में जाएं तो वहां की व्यवस्था इतनी अच्छी नहीं है कि डॉक्टर उनकी बात जल्दी सुने और इनका इलाज करें। प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए इन गरीबों के पास पैसे नहीं होते। इस दौरान कुछ लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है। लेकिन हमारे देश में कई ऐसे भी व्यक्ति है जो इन गरीबों का दुःख दर्द समझते हैं। आज की यह कहानी ऐसे ही शख्स की हैं जिन्होंने 300 से अधिक ज़रूरतमंद लोगों को रहने के लिए छत दियें और अस्वस्थ लोगों का इलाज़ करा रहें हैं। यह शख्स आगे भी लोगों की मदद के लिए तत्पर हैं।

जॉर्ज राकेश बाबू

गरीबों की मदद जॉर्ज राकेश बाबू (George Rakesh Babu) अपनी जी जान लगाकर कर रहें है। इनका जीवन दूसरों की मदद करने में ही गुजर रहा है। ज़रूरतमंदों की मदद करना, बीमार का इलाज कराना, यहां तक की लोगों के देहांत के बाद अंतिम संस्कार भी करते हैं जॉर्ज। इन्होंने ज़रूरतमंदों की मदद के लिए एक NGO तेलंगाना (Telangana) के सिकंदराबाद (Secunderabad) में स्थापित कियें हैं। इस NGO का नाम “गुड समैरिटन इंडिया” (Good Samaritans India) है।

2008 से हुई लोगों के सेवा की शुरुआत

जॉर्ज साल 2008 में बुजुर्गों के लिए एक निःशुल्क क्लीनिक में कार्यरत थे। अक्सर वहां बुजुर्ग उन्हें अपनी परेशानी शेयर करते थे। कुछ समय बाद यह क्लीनिक “Welfare Center” में बदल गया। यहां जो मरीज आते हैं, उनका इलाज किया जाता है, उनको रखा जाता और जब ठीक हो जाते तब उन्हें घर पर भेजा जाता। अगर घरवाले उन्हें अपने पास रखने से इंकार कर देते, तो फिर उन्हें वहीं जीवन के अंत तक रखा जाता और उनका अंतिम संस्कार भी किया जाता।
 
गुड समैरिटन इंडिया की स्थापना

गुड समैरिटन इंडिया का पंजीकरण 2011 में एक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर हुआ। वर्तमान में यहां 300 से अधिक जरूरतमंद लोगों की मदद की जा चुकी है। इतने वर्षों में गुड समर्थन इंडिया ने तीन ब्रांच बना लिया है। इनमें से कुछ जगहों में बुजुर्गों का देखभाल किया जाता है और कुछ में उन्हें स्किल भी सिखाया जाता है।

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शुरुआत में हुई कठिनाई

जॉर्ज ने बताया कि उन्हें शुरुआती दौर में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन पर लोगों का विश्वास नहीं था। पैसे के मामले में भी उन्हें बहुत कठिनाइयां हुई। पैसों के अभाव के कारण उन्हें मदद करने में दिक्कत होती थी। कुछ समय बाद लोगों को उन पर विश्वास होने लगा। पहले उन्होंने 10-15 घरों के लोगों की मदद की। फिर 30-35 बेसहारा लोगों की मदद करने लगें। यह ज़रूरतमंद लोगों के साथ-साथ प्रवासी मजदूरों की भी मदद कर रहे हैं। अगर इन मजदूरों को कोई दिक्कत है या चोट लगी हैं तो उनके समस्या का समाधान निकाल, उन्हें ठीक कर फिर घर भेजते हैं।

एलडर्ली स्प्रिंग नाम के संस्था से किया टाइ-अप

जॉर्ज ने होम के निर्माण का कार्य शुरू किया है। इन्होंने “एलडर्ली स्प्रिंग” नाम की संस्था से टाईअप किया है। इन्होंने हेल्पलाइन नंबर की भी शुरुआत की है, ताकि लोगों की मदद करने में इन्हें ज्यादा दिक्कत ना हो और कोई आसानी से इनके पास पहुंच सके।

मिले है अवार्ड

जॉर्ज को अपने इस निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करने के लिए गुड समैरिटन इंडिया को बेस्ट ह्यूमेरिटेरियन का पुरस्कार मिला है। जॉर्ज को वर्ल्ड कैप्शन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। इनके इस नेक कार्य में अब दूसरे लोग भी इनकी मदद भी कर रहें हैं। जॉर्ज के निःस्वार्थ भाव से लोगों की मदद के लिए The Logically इन्हें नमन करता है।

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