Sunday, September 19, 2021

17 वर्षों से मधुमक्खी पालन कर हर साल निकालते हैं 120 क्विन्टल शहद, सलाना आय है 25-30 लाख रुपये

हमारे यहां ज्यादातर लोग यह कोशिश कर रहे हैं कि वह किसी भी तरीके से प्रकृति के करीब रहकर अधिक मुनाफा कमा सकें। कुछ लोग खेती कर रहे हैं वह भी नई-नई विधियों से, तो कुछ लोग मत्स्य पालन कर रहे हैं। वैसे तो हम खेती और मत्स्य पालन या फिर अन्य चीजों से होने वाले फायदे को बहुत ही अच्छी तरीके से जानते हैं, लेकिन यह समझ नहीं आता कि उसे हम कैसे अपनायें।

आज हम आपको मधुमक्खी पालन और उससे होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि आप कैसे मधुमक्खी पालन से मुनाफा कमा सकते हैं। मधुमक्खी पालन आप करना चाहे तो आप नौकरी करने के साथ-साथ भी इस कार्य को कर सकते हैं। अगर आप अपना व्यवसाय भी कर रहें है तो व्यवसाय को जारी रखते हुए भी मधुमक्खी पालन कर सकतें हैं।

यह कहानी भरतपुर के किसान की है जो कभी मधुमक्खियों को देखकर डरते थे। लेकिन वह आज इस मधुमक्खी पालन से 12 लाख का मुनाफा कमा रहे हैं। उनके शहद बहुत सारे राज्यों में भेजे जा रहे हैं।

यह हैं नगला कल्याण गांव के “हरदयाल सिंह”

44 वर्षीय हरदयाल सिंह (Hardayal Singh) भरतपुर (Bharatpur) के नगला कल्याण गांव के निवासी हैं। यह 10 लाख रुपए से अधिक की कमाई मधुमक्खी पालन से कर रहे हैं। इन्होंने हिंदी में बीएड और एमए में किया है। आज इनके घर पर देखा जाए तो हर सुख-सुविधा की चीज़ें हैं जो कामयाब मनुष्य के पास होनी चाहिए। इनके घर पर फोर व्हीलर गाड़ी है जिसमें यह ऐश-ओ-आराम से कहीं भी घूम सकते हैं, साथ ही एक बाइक भी है। पहले यह प्राइमरी शिक्षक के रूप में कार्यरत थें। लेकिन इन्होंने 17 वर्ष पूर्व सोचा कि मैं क्यों न मधुमक्खी पालन करूं और इसका लाभ उठाऊं। इन्होंने अपने नौकरी से इस्तीफा दिया और Himachal Pradesh से मधुमक्खी के 8 बॉक्स लायें। उनका यह कार्य सफल हुआ और उन्हें लाभ मिलने लगा। जैसे-जैसे लाभ बढ़ा इनका 8 बॉक्स 550 तक पहुंच गया। आज की तारीख में हरदयाल प्रत्येक वर्ष 121 क्विंटल शहद प्राप्त कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह लगभग 40 मधुमक्खी पालक को भी इस कार्य से जोड़े हैं। अब यह मिनी प्रोसेसिंग प्लांट का कार्य शुरू करना चाह रहे हैं।


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अन्य किसानों ने भी किया यह कार्य

इनके इस कार्य से लाभ देखकर अन्य किसान भी इनसे प्रेरित हुए। इनके गांव के जगदीश प्रसाद (Jagdish Prasad) भी मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू कियें। पहले तो जगदीश ने इस व्यवसाय को सिर्फ अन्य कार्यों के अलावा शुरू किया था। लेकिन अब इनके आमदनी का मुख्य स्रोत यही बन गया है। जगदीश का मानना है कि खेती से हम इतना मुनाफा नहीं कमा पाते थे जितना उन्हें मधुमक्खी पालन से हो रहा है।

46 वर्षीय मुकेश चंद

46 वर्षीय मुकेश चंद (Mukesh Chand) नगरिया कसौट गांव से सम्बंध रखतें हैं। इनकी सालाना कमाई मधुमक्खी से 77 लाख रुपये है। यह शहद उत्पादन के साथ मोम का भी उत्पादन करतें हैं। शहद का उत्पादन 770 क्विंटल और 15 क्विंटल मोम होता है। मात्र 7 बॉक्स से इन्होंने वर्ष 2003 में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू किया। वर्तमान में इनके पास लगभग 4 हज़ार के बॉक्स मौजूद हैं। इन्हें अधिक कमाई हुई, इसीलिए यह अपने एक बेटे को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए जयपुर भेजें और अन्य दो बेटियां हैं जो प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही हैं।

आई शहद में क्रांति

P. K राय जो “सरसों अनुसंधान निदेशालय” के निर्देशक हैं, उन्होंने बताया कि शहर में शहद की क्रांति ने हमारे शहर को “शहद कटोरा” बना रखा है। उन्होंने यह जानकारी दी कि भरतपुर एक खड़े पानी का इलाका है। इस कारण यहां सरसों की खेती ज्यादा की जाती है। देखा जाए तो यहां मात्र 5 लाख हेक्टर जमीन है जहां खेती की जा सकती है। इस जमीन में से ढाई लाख हेक्टर में सरसों को ही उपजाया जाता है। पहले तो यह खेती लोगों की मजबूरी थी लोग मजबूरी में यहां खेती किया करते थे। लेकिन शहद उत्पादन के लिए यह खेती बेहद ही लाभदायक सिद्ध हुई। पीके अपने यहां के किसानों को इस मधुमक्खी पालन को कैसे करना है, इसकी ट्रेनिंग भी देते हैं। यह लोगों को बताते हैं कि कैसे कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

किसानों को था शुरूआत में डर

शुरुआती दौर में किसान मधुमक्खी पालन को नहीं अपनाना चाहते थे। उनका मानना था कि यह मधुमक्खियां हमें और हमारे बच्चों को हानि पहुंचाएंगे और साथ ही हमारे फलों के रस (nectar) को भी चूस कर बर्बाद कर देंगी। एक किसान के साथ तो ऐसा कुछ हुआ कि उनके घर में उनके बेटे के लिए रिश्ता आया लेकिन जिन लोगों ने रिश्ता लाया था वह डर के मारे भाग गए कि कहीं मधुमक्खियां उनकी बेटी को काट ना ले। लेकिन धीरे-धीरे लोग इस बात को समझने लगे और इस कार्य को अपनाकर अधिक मुनाफा कमाने लगें। राय ने उन लोगों को समझाया कि कैसे सरसों के फूलों से मधुमक्खियों को शहद प्राप्त होगा और इससे फसल को कोई हानि भी नहीं होगी। सभी किसान मधुमक्खी पालन को अपनाकर को बहुत ही खुश है।

रमेश गुप्ता

भरतपुर में शहद उत्पादन के लिए तीन प्रसंस्करण संयंत्र भी शुरू किए गए हैं। जिनका नाम “हेल्थ केयर एन्ड बृज हनी प्राइवेट लिमिटेड” है और इसकी स्थापना 2006 में राजकुमार गुप्ता ने किया। उन्होंने बताया कि इन के यहां सबसे अधिक शहद प्राप्त किया जाता है। हर साल यह लगभग 12 हजार मैट्रिक टन तक का शहद उत्पादन कर लेते हैं। इनके शहद विदेशों में भी बिकने के लिए जाते हैं। इनका शहद कनाडा (Canada), अमेरिका (America), सऊदी अरब ( Saudi Arabia), लीबिया (Libya) जैसे जैसे देशों में जाता है।

The Logically भरतपुर के किसानों को खेती के साथ मधुमक्खी पालन कर लाभ कमाने के लिए बधाई देता है और अपने किसान भाइयों से यह अनुरोध करता है कि वह भी इसे अपनाकर अधिक लाभ उठायें।