Tuesday, September 28, 2021

बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हो गए थे, वहीं किताबों में डूबकर पढाई करते रहे और IAS बन गए

अच्छे बुरे दिन तो आते जाते रहतें हैं लेकिन बुरे दिन तकलीफ़ बहुत देतें हैं। जो इनसे लड़कर जीत गया वह ही अपनी लाइफ का रियल हीरो होता है। कुछ लोगों की सक्सेस स्टोरी पढ़कर या जानकर ऐसा लगता है कि इतनी विषम परिस्थितियों का सामना कोई कैसे करता है। इतने बुरे दिनों को देख आखिर वे इस मुकाम तक कैसे पहुंचे। इनके बारे में पढ़ने पर विश्वास नहीं होता पर बहुत कुछ सीखने को अवश्य मिलता है।

कहानी कुछ इस तरह है कि एक लड़का जिसके बारे में ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की कि वह कभी सफल नहीं होगा। लेकिन वह हमेशा मेहनत करता रहा, यहां तक कि तबीयत खराब होने के दौरान अस्पताल में भी जब डेंगू हुआ तब भी वह किताबें लेकर पढ़ता रहता। अंततः वह ज्योतिषी के भविष्यवाणी को गलत साबित कर अपने परिश्रम से आईएएस ऑफिसर बना। आइए पढ़ते हैं, मेहनत से बड़ी सफलता हासिल करने वाले लड़के की कहानी।

नवजीवन पवार

हम जिनकी बात कर रहें हैं, वह महाराष्ट्र (Maharastra) के नवजीवन पवार (Navjivan Pawar) हैं। ये अपनी ज़िंदगी में मुश्किलों का सामना करते हुए सफलता की ऊंचाई को आखिर हासिल कर ही लियें। कहते हैं ना कि जिंदगी में आपको बहुत सारे दुखों का सामना करना पड़ता है। अगर आप वह सामना करते हुए सफ़ल बन गयें तो सब आपकी मिसाल पेश करते हैं और आप का उदाहरण देते हैं।

यहां नवजीवन पवार का इंटरव्यू के समय का वीडियो देखे..

किसान परिवार से हैं

इनका जन्म किसान में परिवार में हुआ। इनके पिता खेती करते थे जिससे घर का गुजारा होता। मां प्राथमिक विद्यालय में बतौर शिक्षिका के रूप में कार्य करती। इनका ग्रेजुएशन पूरा हो गया तो यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का सोचकर वह दिल्ली चले गए। वहां जाकर उन्होंने इतनी मेहनत की जिससे उन्हें उम्मीद थी कि वह सफल जरूर होंगे। डेढ़ साल के मेहनत का परिणाम यह निकला की जब परिणाम आया तब वह उसमें असफल थे। इन्हें दुख तो बहुत हुआ लेकिन उन्होंने इसे अपनी मजबूरी नहीं बनने दी और फिर अपनी मेहनत में लग गए। इनकी यह कोशिश थी कि बस वह अपने लक्ष्य का निर्धारण कर ले। उन्हें घर से कहीं दूर आए लगभग डेढ़ साल पूरा हो गया था। इन्होंने दिन रात खूब मेहनत की।

48 घण्टे सोएं रहें

इतनी मेहनत कर पढ़ाई करने वाला लड़का जब एक दिन अपनी क्लास खत्म कर घर आया और 48 घंटे के लिए सो गया उठा ही नहीं, तब उनके दोस्तों को इस बात को लेकर बहुत चिंता हुई कि आखिर यह सोया क्यों है?? परेशानी में उन्होंने नवजीवन को उठाया और उन्हें अस्पताल लेकर गयें। जब वह अस्पताल गए तो पता चला कि इन्हें डेंगू हुआ है। जब यह बात उनके परिवार वालों को पता चली तो वे बहुत घबरा गयें। नवजीवन को नासिक बुला लिया और वह ICU में भर्ती हुयें। जब डेंगू हुआ था उस दौरान उन्हें यूपीएससी प्री में सफलता मिल चुकी थी और मेंस एग्जाम का बस एक महीना बाकी था। जब यह परेशानी से पिता के सामने रो रहे थे तो उनके पिता ने उन्हें एक बात कही जो कि एक कहावत है मराठी की। उसका मीनिंग यह था कि जब किसी के जीवन में ऐसे दुखों का पहाड़ टूटता है तो या तो उससे लड़ता या फिर उसके लिए रोता है। उसी समय उन्होंने निर्णय लिया कि मैं इससे रोऊंगा नहीं इसका डटकर सामना करूंगा और लड़ूंगा।


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हॉस्पिटल में बहन और भांजी ने दिया साथ

यह समय बहुत ही कठिन था क्योंकि उनके बाएं हाथ में इंजेक्शन था और डॉक्टरों ने उसे हाथ को छूने से मना किया था। इतना कठिन समय में भी वह हार नहीं माने और अपनी पढ़ाई जारी रखें। उनकी भांजी थी, जो नोट्स बनाया करती थी और वह उनका उत्तर लिखा करते थे। जो छोटी बहन थी, वह नवजीवन को यूट्यूब से वीडियो सुनाया करती थी और कोशिश करती थी, उस वीडियो को सुनकर वह छोटे से नोट्स तैयार कर उन्हें दे। नवजीवन के दोस्तों ने भी इनकी खूब मेहनत की थी। किसी ने फोन के जरिए नोट्स भेजे तो किसी ने उन्हें कॉल करके ही पढ़ाया। इतने मुश्किल हालात में भी इन्होंने हॉस्पिटल में पढ़ाई को जारी रखा। इन्होंने हॉस्पिटल के टेबल पर किताबों का भरमार लगा दिया था।

कुत्ते नें काटा, मोबाइल गुम हुई, ज्योतिष ने बोला नहीं बनोंगे 27 वर्ष के पूर्व ऑफिसर

नवजीवन के दोस्तों ने उन्हें जिद करके एक ज्योतिषी से मिलवाया और उनका हाथ दिखाएं। जब उस ज्योतिष ने हाथ देखा तो उन्हें कहा कि तुम 27 साल के पूर्व तो कलेक्टर नहीं बन सकते फिर इतनी मेहनत क्यों कर रहे हो। तुम यहां मेहनत करने नहीं बल्कि मौज-मस्ती करने आए हो। ये बात इन्हें बहुत बुरा लगा और फिर वह अपने 1 शिक्षक के पास गयें जिन्होंने उनका हौसला अफजाई किया। उनकी पीठ थपथपाते हुए उनके शिक्षक ने बोला कि तुम एक दिन सफल इंसान जरूर बनोगे। डेंगू हुआ और यह हॉस्पिटल गए थे तो इस दौरान एक कुत्ते ने भी काटा, साथ ही मोबाइल भी गुम हो गया थी। फिर भी इन्होंने हार नहीं मानी। इन्हें सिर्फ और सिर्फ सफलता हासिल करने में अपना का ध्यान लगाया।

2018 में बनें IAS

यह एक फिल्म के डायलॉग से बहुत ही प्रेरित हुए। वह डायलॉग है, “किसी भी चीज को अगर पूरे दिल से चाहो तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने की कोशिश में लग जाती है। यही बात उनके दिल और दिमाग में घूमती रही और उन्होंने शुरू से लेकर अंत तक सिर्फ इसी बात को याद रखा। वह समय बहुत कठिन था जब ज्योतिषी ने बोला कि तुम कभी आईएस बनी नहीं सकते, कुत्ते ने काटा मोबाइल भी गुम हुआ, फिर भी यह डरे नहीं और अपनी सफलता के लिए मेहनत करते रहे। आखिरकार यह 2018 में IAS ऑफिसर बनें।

इतनी मेहनत से अपनी सफलता को हासिल करने के लिए The Logically इन्हें बधाई देते हुए सलाम करता है।