vipin shivhare

हमारे देश में करोड़ों ऐसे बच्चे हैं जो गरीबी व सुविधा ना मिलने के कारण उचित शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसा नहीं कि उनके पास काबिलियत नहीं होती, उनके पास सपने नहीं होते। उनके पास भी अपनी जिंदगी को ऊंचे मुकाम देने की चाहत होती है लेकिन सही राह ना मिल पाने के कारण उनकी जिंदगी बेहतर नहीं हो पाती है। ऐसे बच्चों में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो इन संघर्षों को अपने हौसलों, दृढ़ इरादे और अथक मेहनत से हरा देते हैं और काल के कपाल पर सफलता की प्रेरणा रूपी ऐसी हस्ताक्षर करते हैं जो अमिट होती है। आईए वैसे हीं एक शख्स के बारे में जानें जिन्होंने अपने प्रयास से अनेकों गरीब बच्चों को यह सिखाया कि उस संघर्ष को कैसे जीता जाता है और सफलता पाई जाती है।

कहते हैं, अगर हम किसी काम को पूरी लगन और जज्बे से कर रहें हैं और लम्बी अवधि के बाद उस कार्य में सफलता हासिल हो तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। वैसा हीं हुआ जब घर-घर दूध बेचने वाले के बेटे विपिन शिवहरे ने PCS बन पिता का नाम रौशन किया। जब पिता को पता चला कि उनका बेटा यूपीपीसीएस में चौथी स्थान हासिल कर चुका है उस वक्त उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह अपनी खुशी किसके साथ जाहिर करें। विपिन के पिता घर-घर घूमकर दूध बेचने का कार्य किया करते थे। उन्होंने अपने बेटे को एक सफल इंसान बनाने के लिए हर मुमकिन प्रयास किया

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विपिन शिवहरे

विपिन शिवहरे (Vipin Shivhare) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जालौन (Jalaun) में स्थित एक छोटे से गांव के निवासी हैं। कहते हैं ना कि अगर मन में कुछ करने की ठान लो तो उसे किसी भी तरह से पूरा किया जा सकता है। ऐसा ही विपिन के साथ भी हुआ। एक छोटे से गांव में रहने के बावजूद भी इन्होंने अपने सपने को उड़ान भरने का मौक़ा दिया।

संघर्ष करके की पढ़ाई और बने अफसर

विपिन के इस सफलता की खुशी सबसे ज्यादा उनके पिता को हुई। उन्होंने बताया कि जब मेरे गांव के व्यक्ति अपने बच्चों को मोटरसाइकिल पर बैठाकर विद्यालय में लेकर जाया करते थे, तब मैं साइकिल पर दूध का कंटेनर लिए लोगों के घर में दूध बेचने जाया करता था। बहुत ही संघर्ष के बाद मैंने यह खुशी देखी है। मेरे घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी अच्छी नहीं थी और मुझे घर चलाने के लिए यह कार्य करना पड़ता था। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए हमेशा कोशिश किया। जब विपिन के घर वालों को पता चला कि वह UP PCS में चौथा स्थान प्राप्त कर चुके हैं तो इनके घर में खुशी का माहौल बन गया। दुपहर का समय था जब यह बात सबको पता चली। हालांकि विपिन कुछ नौकरी कर रहे थे लेकिन उनका यह सपना था कि वह एक अफसर बने और उस सपने को उन्होंने पूरा किया।

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पिता ने घर-घर दूध बेचा लेकिन नहीं रोकी बेटे की पढ़ाई

विपिन के पिता अपने बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए साइकिल पर बोरा बिछाकर उस पर बैठाते, फिर स्कूल ले जाया करते थे। जब छुट्टी हो जाती तो इनके दोनों बेटे शॉप के बाहर की खाली स्थान पर बैठ अपने पिता के आने का का इंतजार करते थे। विपिन के पिता दूध बेचने के बाद उन कन्टेनरों को साफ कर रखते और फिर अपने बच्चे को साइकिल में बिठाकर घर वापस लाया करते थे। इनके पिता ने बहुत ही संघर्ष कर अपने परिवार की जरूरतों को पूरा किया है। एक बात की खुशी थी कि विपिन की मां हमेशा अपने पति की मदद करती और उनका मनोबल बढ़ाती। विपिन के पिता ने विलाप भरे शब्दों में कहा मेरा सारा मेहनत सफल हुआ जब मेरा बेटा यह मुकाम हासिल कर लिया।

विपिन की शिक्षा

वीपिन ने अपनी आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए सरस्वती विद्या मंदिर (Sarsawati Vidhya Mandir) में नामांकन कराया और वहां से सम्पन्न की। वर्ष 2006 में विपिन ने 12वीं में फर्स्ट आकार आगे की पढ़ाई जारी रखी। वर्तमान में विपिन भोपाल (Bhopal) में SBI बैंक के “असिस्टेंट ऑडिटर ऑफिसर” (Assistent Audit Officer) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एक फोन कॉल के जरिए बताया कि वह अफसर बनना चाहते हैं लेकिन उनकी परेशानी यह थी कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह तैयारी नहीं कर पाते।

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इस तरह बने अफसर

विपिन एक सफल व्यक्ति बनना चाहते थे। इसके लिए वह हमेशा कोशिश में लगें रहें। वर्ष 2008 में विपिन ने Airforce का भी एग्जाम दिया था। वह क्वालीफाई तो हो गए लेकिन मेडिकल की परीक्षा में उनका सलेक्शन नहीं हुआ और वह बाहर निकल गयें। फिर वर्ष 2013 में SSC क्वालिफाइ कर SBI बैंक में Cashier के पद पर कार्यरत हुए। इनकी पहली पोस्टिंग मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक शहर पन्ना (Panna) में हुई। विपिन का प्रमोशन हुआ तो इन्हें भोपाल में Assistent Audit Officer का पद मिला। लेकिन इनका सपना अफसर बनना था। इन्होंने उसकी तैयारी शुरू की। इनके इस तैयारी में इनके एक दोस्त आलोक कुमार (Aalok Kumar) ने काफी मदद की। विपिन सेल्फ स्टडी से 5 घंटे पढ़ाई किया करते थे, वह भी नौकरी करने के पश्चात। इन्होंने यूपीपीसीएस मेन्स परिणाम 2018 में चौथा स्थान प्राप्त कर अपने गांव के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन  किया है। 2018 की इस रिजल्ट में यह टॉप फाइव के लिस्ट में शामिल है। इस लिस्ट में एक बिहार, दो हरियाणा के लड़के शामिल हैं इन लड़कों के साथ विपिन ने भी अपना नाम इस रिजल्ट में अंकित करा चुके हैं।
 
गरीबी से संघर्ष करते हुए विपिन शिवहरे ने जिस तरह सफलता पाई वह कई गरीब युवाओं के लिए प्रेरणाप्रद है। The Logically विपिन शिवहरे के हौसले और उनकी काबिलियत को सलाम करता है।