Wednesday, October 21, 2020

फ़िल्म से हुए प्रेरित और खुद के पैसों से 900 से भी जानवरों की जान बचाई, मिल चुके हैं कई अवार्ड

पंख अपनी ज़गह पे वाजिब है हौसला भी उड़ान देता है। जी हाँ दिल मे हो जूनून और कुछ पाने की ज़िद्द हो तो हौसला ही काफी है अपने सपने को पाने के लिए। आज हम बात कर रहे है कपिल बाजपेयी की जोकि जयपुर राजस्थान से है उनका पशु पक्षियों का प्रेम इस कदर है कि वह खुद की बचत के सारे पैसे पशु पक्षियों की सेवा में लगा देते है अब तक वह 900 से अधिक रेस्क्यू कर चुके है।

ऐसे हुई शुरुआत

कपिल बताते है पशु पक्षियों के प्रति प्रेम व अपनापन तो बचपन से ही था वह बेसहारा जानवरों की सेवा करते थे सबसे पहले उन्होंने 1996 में पतंग के मांजे से घायल हुए कबूतर को रेस्क्यू किया था परन्तु तीन दिन बाद उसकी मृत्यु हो गयी थी। तभी से मन उदास था फिर तेरी मेहरबानियां फ़िल्म से जानवरों के प्रति सेवा का जुनून सा चढ़ गया तबसे लेकर अब तक 900 से अधिक रेस्क्यू किये है।

जागरूकता अभियान चला कर रहे है लोगो को जागरूक

जानवरों के साथ प्रेम व दोस्ती से रहो व हमारे दोस्त होते है वह बिना मतलब ना हमे कोई नुकसान पहुंचाते हैं ना किसी चीज़ की मांग करते है उन्हें बस प्यार से रखो वो बहुत अच्छे व सच्चे होते है वह बच्चो को सिखाते की आवारा जानवरो को देखकर उन्हें परेशान मत करो बल्कि उन्हें खाना पानी दो। वह हर गर्मी मार्च के महीने में पंछियों के लिए परिंडा अभियान चलाते है वह हर साल 200 से अधिक परिंडे बांटते है। जिससे आवारा जानवर अपनी प्यास भुजा सके।

लोग मज़ाक उड़ाते है पर बेजुबानों की मदद करके मुझे सुकून मिलता है।

The Logically से बात करते समय कपिल ने बताया कि मेरे पास जो पैसे बचे होते है उनसे मैं जानवरो की सेवा करता हूँ। लोग मेरा मज़ाक उड़ाते है पर मुझे इस बात से फर्क नही पड़ता मैंने कभी बेजुबानों से मुंह नही मोड़ा। मैं अपना जन्मदिन 20 जनवरी इन्ही के साथ मनाता हूँ इनके साथ खाता हूँ लोग हँसते है पर मैं अपनी सेवा से संतुष्ट हूँ। लोग मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाते है तो मैं उस दिन इन पंछियों को रेस्क्यू करता हूं। जैसे ही किसी का फ़ोन आता है तुरंत पहुंच जाता हूँ और घायलो की मरम पट्टी करता हूँ।

पुरस्कार व सम्मान

कपिल बाजपेयी बताते है कि वो वन विभाग व मेरी सिटी राजस्थान के दो बड़े अखबारों से सम्मानित हुए है साथ ही कई एनिमल एन जी ओ ने भी सराहना की है। सन 2017 में Holydog Times (Planet secours division by discovery channel) की वेबसाइट ने आर्टिकल लिखा व उसके बाद कपिल एनिमल वेलफेयर ऑफिसर चुने गए गूगल ने उन्हें नई पहचान दी उससे बाद सेवा करने का जुननू बस बढ़ता ही चला गया उसके बाद वह रुके नही आगे बड़े और लोगो को जागरूक कर उन्हें भी सेवा करने को कहते है।

कपिल कहते है बेजुबानों की मदद करनी चाहिए वह मुंह से कुछ नही बोलते परंतु सब समझते है कृपया मांजे का इस्तेमाल मत किया करो इससे बेजुबान जानवरो को जाने अनजाने में अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है कई तो गंभीर रूप से घायल हो जाते है। कपिल बाजपेयी कहते है उन्हें बेजुबानों की मदद करने के लिए एक NGO खोलना है व उन्हें इस काम के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगो को अपने साथ जोड़ने है जिससे पशुओ के साथ हो रही क्रुरता को रोका जा सके और इन बेजुबानों की जुबान बन इनकी मदद की जा सके।

The Logically की तरफ से हम कपिल के इस हौसले और काम की सराहना करते है वह हमें अपने काम से प्रेरित करते है हम कपिल के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है। आप कपिल बाजपेयी से फेसबुक पर भी जुड़ सकते है।

Anu Gangwal
दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए और ट्रांसलेशन कर चुकी है अनु साहित्य में विशेष रुचि रखती हैं। इनकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं तथा वेबसाइटों पर प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में फ्रीलांसर राइटर, एडिटर, प्रूफरीडर तथा ट्रांसलेटर का कार्य कर रही हैं।

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