Sunday, June 26, 2022

गरीबी से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ीं, पेंटिंग्स से बनाई पहचान, आज विदेशों से भी है डिमांड

अगर आपके अंदर किसी भी प्रकार का हुनर है तो वही हुनर आगे चलकर के सफलता की ओर ले जाती है। किसी भी व्यक्ति के अंदर किसी ना किसी चीज का हुनर अवश्य होता है परंतु जो लोग अपने अंदर के हुनर को परख लेते हैं, उन्हें सफलता जरुर हासिल होती है।

आज हम एक ऐसी ही कहानी लेकर आए है जिसमें आप जानेंगे कि कैसे एक लड़की ने अपने अंदर के हुनर को परखा और आज वह सफलता की चोटी पर पहुंच चुकी हैं। वह अपनी पेंटिंग के जरिए देशों में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना जलवा दिखा रही हैं। पेंटिंग के माध्यम से आज यह एक खुशहाली और सुखद जिंदगी व्यतीत कर रही हैं। आईए जानते हैं इनकी इस पेंटिंग के बारे में जिसके जरिए उन्होंने बङी सफलता हासिल की।

बिहार के रहने वाली ललिता

ललिता (Lalita) बिहार (Bihar) के मधुबनी (Madhubani) जिले की रहने वाली हैं। इनका बचपन, पालन-पोषण मधुबनी में ही हुआ। ललिता बताती हैं कि हमारा बचपन गरीबी में गुजरा हुआ है। गरीबी की वजह से हमारे घर की हालात कुछ ठीक नहीं थे, जिसके कारण हम पढ़ाई के साथ-साथ पेंटिंग भी किया करते थे। जब हम स्कूल में पढ़ने जाते थे तब हम रास्ते में जो भी चीजें देखते थे जैसे फूल, पेड़, चिड़ियां, चापाकल आदि उन सभी चीजों को हम अपने स्लेट पर ड्रॉइंग करते थे।

इसके बाद जब मैं थोड़ी बड़ी हुई तो अपने कॉपी में ड्रॉइंग किया करती थी। जब मेरी मां मेरी कॉपी देखती थी तो हम पर काफी गुस्सा करती थी और डांटते हुए कहती थी कि पढ़ाई पर ध्यान दो, यह पेंटिंग से तुम्हारा जिंदगी का गुजारा नहीं होने वाला। मां की वो बातें सुनकर के हमें कुछ समय के लिए बुरा लग जाता था परंतु फिर मैं मां के उन बातों को अनदेखा कर के फिर से पेंटिंग करने लगती थी।

जब मैं 7वीं क्लास में पढ़ती थी तब से ही मैंने मन बना लिया था कि मैं आगे चलकर के पेंटिंग ही करूंगी और यही पेंटिंग मेरी सफलता का कारण बनेगा। जब हम बच्चे थे तब हम अपने घर के आंगन में रंगोलियां बनाया करती थी और यह रंगोलियां इतनी सुंदर बनती थी कि पड़ोस के रहने वाले भाभी लोग हमें अपने घर बुला लिया करते थे और अपने घरों में रंगोलियां बनवाती थी। मैं अपने घरों को सजाने के साथ-साथ पड़ोस में भी जा करके उनके घर में पेंटिंग करके अच्छे से सजा देती थी।

ललिता (Lalita) बताती हैं कि मैं 10वीं की परीक्षा पास कर के आगे की पढ़ाई करने के लिए मन बनाया और मैंने साइंस सब्जेक्ट को चुना। 10वीं के बाद पढ़ाई में और भी जादा खर्चा आने लगा। परंतु हमारे घर की स्थिति खराब होने की वजह से मैंने बच्चों को पेंटिंग की ट्यूशन देने लगी जिससे हमें ट्यूशन पढ़ाने से कुछ रुपयों की मदद होने लगी। पर यह ट्यूशन पढ़ाने वाली बात हमारे घर के लोगों को मालूम नहीं था। क्योंकि हमारे घर में कहते थे कि लड़कियां कमा नहीं सकती है जिसकी वजह से हमें यह ट्यूशन घरवालों से छुपकर करना पड़ता था

The Painting Of Lalita Of Bihar Is famous In The Country And Abroad
ललिता पाठक

पेंटिंग बेच पहली बार खरीदा फोन

ललिता कहती हैं कि हमारी शादी घरवालों ने काफी जल्दी कर दी जब मैंने 12वीं की पढ़ाई पूरी कर ली तब साल 2004 में मेरी शादी कर दी। जहां मेरी शादी हुई वहां के भी घर के हालात ठीक नहीं थे। मेरे ससुराल में भी आमदनी का कोई जरिया नहीं था। ललिता बताती हैं कि मेरी किस्मत मायके से ससुराल तक पीछा करती रही। जो हालात मेरे मायके में थी वही हालात अब ससुराल में भी है। मेरे पति कोई काम नहीं करते थे जिसकी वजह से हमें आमदनी का कोई स्रोत नहीं था। इसीलिए हमने कुछ पेंटिंग के जरिए आमदनी करने के बारे में सोचा। और हमने अपने परिवार वालों के बारे में भी सोचकर के कोई कदम उठाना था।

हमें पेंटिंग के अलावा कुछ और करना नहीं आता था तो मैंने सोंचा कि हम अपनी कलाकारी के हुनर से ही कुछ पैसे की आमदनी करूंगी। जिसके बाद मैंने पेंटिंग करके पैसे कमाना शुरू कर दिया। मैंने अपनी पेंटिंग की कमाई से पहली बार 14 हजार का फोन खरीदा। और मैंने अपनी इसी पेंटिंग की कमाई से 12वीं, बीए और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके साथ-साथ अपनी दोनों बच्चों की भी पढ़ाई इसी पेंटिंग की कमाई से की। आज मैं जो भी कुछ है अपनी इस हुनर और पेंटिंग की वजह से हूं। मैंने सरकारी नौकरी पाने के लिए जो पढ़ाई की थी वह इसी पेंटिंग की कमाई से की। मुझे आज अपने आप पर गर्व महसूस होता है कि मैं अपनी हुनर और पेंटिंग के जरिए आज इतना पढ़ पाई। आज हमारे फैमिली में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी मैं ही हूं।

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दो समोसे खा कर देने गई टेट की परीक्षा

ललिता अपनी जिंदगी के संघर्ष के बारे में बताती हैं कि मैं इतना व्यस्त रहने लगी कि मुझे समय के बारे में कुछ पता ही नहीं चलता दिन कैसे गुजर जाता था कुछ पता नहीं चल पाता था। कॉलेज पेंटिंग और ट्यूशन में समय इतना लग जाता था कि हमें खाने तक का समय नहीं मिल पाता था। जब मैं बिहार में आयोजित टेट परीक्षा देने गई थी तब मैं सिर्फ दो समोसे खा कर परीक्षा देने चली गई। टेट की परीक्षा देने के बाद जब रिजल्ट आया तो हमें सलेक्शन हो गया जिसके बाद मुझे मधुबनी के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक कि नौकरी लग गई। यह दिन हमारे लिए काफी खुशी का दिन था क्योंकि हमने इसके लिए काफी संघर्ष की थे नौकरी हो जाने के बाद बिहार सरकार ने बीएड करवाया।

ललिता कहती हैं कि आज मैं इस पेंटिंग के जरिए अपने दोनों बच्चों को पाल-पोष कर बड़ा किया और वह सारी सुख-सुविधा दी हूं जो हमें कभी नहीं मिल पाई। आज हमारी शादी को लगभग 18 साल हो गए हैं। मेरे पति कोई काम नहीं करते थे जिसे मैंने अपने पति को पेंटिंग करना सिखाया। मैंने अपनी जीवन में हर सुख-दुख को देखते हुए और अपने परिवार को संभालते हुए पेंटिंग का कोर्स की। इसके बाद इसकी ट्रेनिंग भी ली और साथ ही साथ और भी पढ़ाई पूरी की। मैं अपनी मेहनत और लगन से हर काम को बारीकी से किया जिसके चलते आज मधुबनी के एक प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हूं। इसके साथ-साथ मैं अपने घर पर पेंटिंग करके अपनी शौक भी पूरा करती हूं।

शुभता का प्रतीक है मेरी पेंटिंग

ललिता कहती हैं कि जब मेरे बच्चे हुए थे और वह छोटे थे तब मैं अपने बच्चे को गोद में लेकर पेंटिंग करती थी। जिसकी वजह से लोग हमें इस पेंटिंग करते हुए देखकर काफी ताने मारते थे परंतु मैं लोगों की बातों को अनदेखा कर अपना काम करती रहती थी। लोगों के ताने ही आज मेरी सफलता का कारण बनी। आज मैं अपनी पेंटिंग में देवी-देवता की पेंटिंग बनाती हूं जिससे लोग अपनी घरों में लगाते हैं। अपनी कलाकारी की हुनर से ऐसी पेंटिंग बनाती हूं जो शुभता का प्रतीक होता है। जिससे लोग हमारी इस पेंटिंग को खरीद कर के अपने घरों में लगाते हैं और अपने घरों को सुसज्जित बनाते हैं।

The Painting Of Lalita Of Bihar Is famous In The Country And Abroad (2)
ललिता की पेंटिंग विदेशों में भी है मशहूर

मेरी पेंटिंग विदेशों में भी खूब चर्चित हुई

ललिता बताती हैं कि मैंने ठान लिया था कि अगर मेरी फैमिली मुझे घर से बाहर नहीं जाने देती है तो मैं अपनी इस पेंटिंग को किसी और के द्वारा बाहर भेजूंगी जिससे हमारी पेंटिंग से और भी कमाई बढ़ सके। मेरे घर के परिवार वाले मुझे घर से बाहर जाकर पेंटिंग बेचने की इजाजत नहीं देते थे इसीलिए मैंने अपनी पेंटिंग को घर के आस-पास के लोगों को दिया जो हमसे पेंटिंग खरीद करके उसे बेचने लगे और उनसे कमाए हुए पैसे के कुछ हिस्से मुझे भी मिलने लगा। धीरे-धीरे लोगों को हमारी पेंटिंग काफी पसंद आने लगी और मेरी पेंटिंग की मांग काफी बढ़ने लगी। मैं अब अपना पेंटिंग का हुनर सूट, साड़ी, टी-शर्ट, मास्क जैसे चीजों पर मधुबनी पेंटिंग करती हूं। मेरी इस पेंटिंग को लोगों ने काफी सराहा जिससे आज भूरे पास अपने देश से ही नहीं विदेशों से भी काफी पेंटिंग करने की मांग आती रहती है और मैं उसे अपने हुनर से पेंटिंग करके लोगों को द्वारा बाहर भिजवाती रहती हूं।

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ललिता महिलाओं को दी आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा

ललिता महिलाओं को प्रेरित करते हुए बताती हैं कि आजकल महिलाओं को आत्मनिर्भर होना बहुत जरुरी है। अगर आपके अंदर कोई हुनर है तो आप अपने इस हुनर को लोगों को सामने आने दे जिससे लोगों को पता चले कि जो महिलाओं को काम करने से रोकते हैं वो महिलाओं के अंदर छुपी उनकी काबिलियत को पहचान सकें। इसके साथ-साथ फैमिली अपनी बहू-बेटियों को उनके कामों में साथ दे और उन्हें हौसला दें। ऐसा करके उनके अंदर की हुनर को लोगों को सामने आने देने में सहायता करें जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर होकर के आगे बढें और अपनी सफलता की उचाई तक पहुंचे।