किसान‘ शब्द को सुनते ही दिमाग में पुरूष का चित्र उभरने लगता है। लेकिन पुरूष के साथ काम करने वाली महिलाएं कभी भी किसान का दर्जा हासिल नहीं कर पाती है। महिलाएं एक पुरूष किसान की ढाल बनकर हीं रह जाती हैं। लेकिन इन सब से अलग आज हम आपको एक ऐसी महिला किसान के बारे में बताने जा रहे हैं जो ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए देश के सैकड़ों युवाओं की ‘रोल मॉडल’ है। उस महिला ने कई सारे अवार्ड भी अपने नाम किया है। आइए जानते हैं उस महिला किसान की कहानी जो आज सभी के लिए नई मिसाल हैं।

ललिता सुरेश मुकाती मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के अन्तर्गत आने वाला एक छोटा-सा गांव बोरलाय की रहने वाली हैं। ललिता को ‘इनोवेटिव फार्मिंग’ और ‘हलधर जैविक कृषक राष्ट्रीय’ सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। ललिता ने B.A की उपाधि हासिल किया है। उन्होंने 20 वर्ष पूर्व अपने पति से खेती के गुण सीखना शुरु किया था और आज 37.5 एकड़ खेत में पति की सहायता से स्वयं खेती करती है।

ललिता के अनुसार उनका जन्म मध्यप्रदेश में मुनावरा के समीप एक छोटे से गांव में हुआ। ललिता अपने पिता की इकलौती संतान थी। उनके पिता ने उन्हें पढ़ाया और अपने पैरों पर खड़ा करने का स्वपन देखा। ललिता के पिता नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी की शादी किसी किसान परिवार में हो और वह सिर्फ एक गृहिणी बनकर हीं रह जाये। लेकिन परिस्थितयों के आगे किसी की नहीं चलती है। 20 अप्रैल 1996 को ललिता की शादी सुरेश मुकाती से हो गई। सुरेश मुकाती कृषि विज्ञान से स्नातक किये हुए हैं। सुरेश नौकरी करने के बजाय अपने पिता की धरोहर खेती कार्य को करने का चयन किया।

ललिता के पिता इस बात से चिंतित रहते थे कि परिवार संपन्न है ऐसे में बेटी की जिन्दगी सिर्फ एक घरेलू कामों में ही गुजर जाएगी। अपने पिता की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए ललिता हमेशा कुछ करना चाहती थी। लेकिन शादी के बाद ललिता को लगा कि उनकी पढ़ाई छुट जाएगी। ललिता के ससुर पढ़े-लिखे थे। उन्होंने ललिता को आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। ललिता ने ससुराल में ग्रेजुएट की पढाई पूरी की। वह 5 बच्चों की मां भी बनी। उस दौरान उन्होंने सिर्फ गृहस्थी पर ही ध्यान केंद्रित किया। बच्चे बड़े होने के बाद उन्होंने अपने पति को अकेले 100 एकड़ की भूमि पर मेहनत करते देखा तो मन ही मन निश्चय किया कि वे भी खेती करेंगी।

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ललिता मुकाती ने बताया कि, उन्होंने अपनी मर्जी से खेती के गुण सीखे। उन्होंने पूरे लगन के साथ किसानी के हर एक गुण सीखे और एक समान्य किसान से ‘इनोवेटिव और ऑर्गेनिक फार्मर’ बनीं। ललिता फवाड़ा, ट्रैक्टर खुद ही चलाती हैं इसके साथ हीं बीज भी अकेले ही बोने लगती हैं। ललिता के पति ने अपना पूरा समर्थन दिया और मिट्टी, बीज, फसल इनसब की जानकारी विस्तार रूप से दिया। ललिता जो पेस्टीसाइड के बारें में जानकारी हासिल हुई तो उन्हे यह समझ मे आ गया कि शायद हम जहर उगा रहे है। उसके बाद ललिता ने लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर जैविक खेती की ओर अपना कदम बढ़ाया। ललिता खेती के गुण सीखने के लिए कई अलग-अलग जगहों पर भी जा चुकी हैं। उदाहरण के लिए, इटली, जर्मनी, दुबई, और ऑस्ट्रिया।

ललिता ने जैविक खेती की शुरुआत सीताफल से किया। उन्होंने सबसे पहले भूमि को पेस्टी साइड से मुक्त किया और हर किसान मीटिंग में इस मुद्दे को उठाया। ललिता ने वर्ष 2015 से खेतों में कीटनाशक का प्रयोग पूरी तरह से बंद कर दिया। वर्ष 2018 में उन्हें हलधर जैविक राष्ट्रिय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उसके बाद वर्ष 2019 में इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से नवाजा गया। इन सब के बाद भी ललिता को कई टीवी शो में कई पुरस्कारो से सम्मानित किया गया है।

खाद बनाने का कार्य बहुत कठिन था। लेकिन लोगों के सेहत का ध्यान रखते हुए ललिता ने खुद से खाद बनाया। वे तरह-तरह के पत्ते चुनकर लातीं और खाद बनातीं। उन्होंने खाद बनाने के लिए नई तरह की तकनीक बनाई जिसमें गोबर, गौ मूत्र, अनेकों प्रकार के पत्ते तथा रसोई से निकलने वाले कचरों से कीटनाशक का निर्माण किया। इसकी सहयता से उनकी खेती अच्छे तरीके से फलने-फूलने लगी और उत्पादन भी अच्छा हुआ। जैविक विधि से फसल उगाने के कारण मुकाती ने 20% की लागत मूल्य से 80% का मुनाफा कमाया। ललिता ने ऑर्गेनिक खेती कर के लाखों की आमदनी की और एक नई मिसाल कायम की। ललिता से शिक्षा लेकर उनके गाव में हजारों एकड़ मे सीताफल की खेती शुरु हुई है।

एक समय मजदूर और ड्राईवर के नहीं आने की वजह से ललिता का काम रुक गया। उस बंद काम से ललिता ने सोंचा कि किसी पर भी निर्भर नहीं होना है। उसके बाद में ललिता ने ट्रैक्टर और गती, फावड़ा चलाना भी सीखा। अब अपने खेतों में ललिता स्वयं ट्रैक्टर चलाती हैं।

ललिता ने जैविक खेती के अलावा भी कई इनोवेटिव कार्य शुरु किए हैं। उन्होंने ‘टपक विधि’ से फसलों की सिंचाई शुरु की है। इस विधि में पानी को बूंद-बूंद के रूप मे फसलों की जड़ों में एक छोटी व्यास वाली प्लास्टिक पाइप से दिया जाता है। यह विधि जल संरक्षण में काफी मददगार है। इसके इस्तेमाल से 70% जल की बचत होती है तथा इससे मिट्टी का कटाव भी नहीं होता है। टपक विधि से फसलों का उत्पादन 150% बढ जाता है। इसके साथ ही इस विधि का प्रयोग लवणीय, पहाड़ी और बलुई मिट्टी हर जगह किया जा सकता है।

ललिता मध्यप्रदेश राज्य प्रमाणीकरण संस्था भोपाल से पंजीकृत 37.5 एकड़ की भूमि पर कृषि कार्य करती हैं। ललिता विशेषतः सीताफल की खेती के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने 20 एकड़ में सीताफल, साढ़े 3 एकड़ में आंवला और चीकू का पौधा लगाया है। ललिता 5 एकड़ में हल्दी, 4 एकड़ में देशी मूँग, 2 एकड़ में गिरनार मूँगफली, 2 एकड़ में मक्का तथा 1 एकड़ में अदरक का भी उत्पादन भी कर रही हैं।

ललिता ने अपने घर में बिजली की खपत को जीरो कर दिया है। उनके घर में बायो गैस से खाना पकाया जाता है। इसके अलावा घर में सोलर पैनल की सहायता से घर की जरुरत की बिजली बना लेती हैं।

ललिता ने खेती के अलावा वर्षा के पानी को इक्ट्टा कर के मछली पालन का कार्य भी करती हैं। खेतों की सिंचाई के लिए बनाया हुआ कुआं भी मछली पालन में इस्तेमाल करती हैं।

एक अच्छे किसान बनने के साथ-साथ ललिता एक अच्छी मां भी हैं। उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी और उच्च शिक्षा दिया है। बच्चे भी उनका नाम रोशन किए हैं। ललिता मुकाती ने बेहद खुशी के साथ बताया कि, उनकी बड़ी बेटी डेंटिस्ट है, दूसरी बेटी इलाहाबाद में कैट में ऑफिसर है, छोटी बेटी का हाल हीं मे आईआईटी में चयन हुआ है और सबसे छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है। ललिता की उम्र में कमर दर्द की शिकायत रहने लगी है जिसके कारण अब वह बड़े ट्रैक्टर नहीं चला पाती हैं। ललिता ने अपने बड़े बेटे शिवम को खेती संभालने का कार्य सौंपा है। शिवम की उम्र 22 वर्ष है और वह एग्रीकल्चर से स्नातक किया है। शिवम ने तरबूज, भिन्डी आदि फसल की सफल खेती करके अपनी मां को अपनी काबिलियत दिखाया है।

भविष्य की योजनाओं के बारे में ललिता मुकाती ने बताया कि वे सीताफल के पल्प स्टोरेज का काम शुरु की हैं और इसे आगे भी बढ़ाना चाहती हैं। सीताफल की बिक्री कच्चा हीं होता है, पकने के बाद इसे स्टोर नहीं किया जा सकता है। फसल का नुकसान होते हुए देखकर ललिता ने घर पर ही मशीन लगाकर पल्प स्टोरेज का कार्य कर रही है।

ललिता ने बताया कि पल्प स्टोरेज के प्रशिक्षण के लिये उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से मदद मांगी थी, लेकिन सहयता नहीं मिली। उसके बाद ललिता ने युट्यूब की सहयता से पल्प स्टोरेज का कार्य आरंभ किया है।

ललिता मुकाती भविष्य में लोगों को जैविक खेती के गुण सिखाना चाहती हैं इसके साथ हीं उन्होंने महिलाओं को भी कृषि क्षेत्र में प्रेरित करने के लिए ‘मां दुर्गा महिला किसान’ नाम की एक समूह संस्था की स्थापना किया है। इस समूह में लगभग 20 से 25 महिलाएं जुड़ कर जैविक खेती के गुण सीख रही हैं। ललिता ग्रुप के साथ मिलकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का कार्य कर रही हैं। वे चाहती हैं कि अधिक संख्या में महिलाएं किचन से बाहर आकर जागरुक कार्य करें।

ललिता पूरे देश के सैकड़ों-हजारों किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जिस खेती को घाटे का सौदा समझ कर छोड़ दिया है उसी ऑर्गेनिक खेती को करके वह लाखों की आमदनी कर रही हैं और मिसाल पेश कर रही हैं। The Logically ललिता सुरेश मुकाती को उनके द्वारा किए गए कार्यो के लिए खूब सराहना करता है।

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