Wednesday, August 4, 2021

मधुवनी पेंटिंग के जरिये विश्वपटल पर बना रहे हैं पहचान, वोकल फ़ॉर लोकल को दे रहे हैं बढ़ावा

मधुबनी पेंटिंग…आज के समय में बेहद प्रासंगिक है ! देखने में अति खूबसूरत और आकर्षक लगने वाली यह पेंटिंग भारत के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपना रंग बिखेर चुकी है ! यह एक ऐसी पेंटिंग है जो कपड़े , दीवार , धार्मिक स्थलों , साज-ओ-सज्जा वाले स्थानों आदि सभी जगहों पर बनाया जा सकता है ! इसी क्रम में आज बात बिहार के मधुबनी में रहने वाले श्याम बाबू झा की जो अपनी कुशलता और लगन के साथ अपने बनाए उत्पादों के माध्यम से मधुबनी पेंटिंग को लोगों के घर-घर तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं आईए जानते हैं कि वे कैसे मधुबनी पेंटिंग को आगे बढ़ा रहे हैं…

Shyam Babu Jha बिहार के मधुबनी जिले में रहते हैं ! वे पद्मश्री सीता देवी के दामाद हैं ! सीता देवी जो मधुबनी के जीतवारपुर गाँव की रहने वाली थीं ! जीतवारपुर मधुबनी पेंटिंग का गढ माना जाता रहा है और इसका श्रेय गाँव की तीन महिलाएँ सीता देवी , जगदम्बा देवी और बउआ देवी को जाता है ! जीतवारपुर भारत का एकमात्र गाँव है जहाँ की तीन महिलाओं को पद्मश्री सम्मान मिला है ! तीनों ने मधुबनी पेंटिंग को खूब ऊँचाईयाँ प्रदान कीं हैं !


Madhubani painting के लिए ऐसे आई प्रेरणा

यूं तो श्याम बाबू झा को अपने घर से हीं मधुबनी पेंटिंग की प्रेरणा मिली ! बचपन से हीं मधुबनी पेंटिंग के इर्द-गिर्द रहे श्याम बाबू झा को इसकी परख भी थी और वे इसकी बारीकी भी जानते थे ! इनकी पत्नी दीपिका झा भी मधुबनी पेंटिंग में गहरी रूचि रखती हैं ! अपने पेंटिंग के कार्य शुरूआत करने के बारे में Logically से बात करते हुए श्याम बाबू बताते हैं कि “मैं एक तो अपने खानदानी कला को और वृहद स्तर पर ले जाना चाहता था और दूसरा कि मेरी पत्नी दीपिका झा मधुबनी पेंटिंग में गहरी रूचि रखती है , वह एक अच्छी कलाकार भी है ! इन बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने इस ओर अपना कैरियर बनाना चाहा” !

मधुबनी पेंटिंग के कार्य की शुरुआत

श्याम बाबू को अब अपने कार्य की शुरुआत करनी थी ! उन्होंने सर्वप्रथम अहमदाबाद और दिल्ली सहित कई जगहों के ट्रेड फेयर का दौरा किया , उस पर उन्होंने रिसर्च किया जिससे उन्हें व्यापार के तौर-तरीकों के बारे में जानकारी मिली ! इसके बाद वे वापस अपने घर मधुबनी आ गए और मधुबनी पेंटिंग का काम शुरू कर दिया ! मधुबनी पेंटिंग के अंतर्गत श्याम बाबू झा कई तरह के कार्य करते हैं ! यूं तो शर्ट , टी-शर्ट , दुपट्टा , कैप आदि कपड़ों पर वे मधुबनी पेंटिंग तो करते हीं हैं , आज कोरोना के समय वे मधुबनी पेंटिंग से बना मास्क भी बृहद पैमाने पर बना रहे हैं ! लोगों में इस मास्क को खरीदने को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा सकती है ! इसके अलावा वे दीवारों , गमलों आदि पर पेंटिंग का काम भी करते हैं ! विभिन्न अवसरों और कार्यक्रमों में वे अपनी कला का रंग बिखेरते हैं ! उन्होंने बताया कि इस बार 2020 में दशहरा के अवसर पर झारखंड की राजधानी राँची में स्टेशन के पास होने वाली भव्य पूजा और साज-ओ-सज्जा हेतु मधुबनी पेंटिंग का हीं काम किया जाएगा !

अपने कार्यों से दे रहे रोजगार को बढावा

श्याम बाबू मधुबनी पेंटिंग के जरिए कलाकारों को रोजगार देकर उनका जीवन निखार रहे हैं ! वे कलाकारों को मेहनताना के साथ-साथ रॉयलिटी भी देते हैं जिससे कलाकारों में इस कार्य को लेकर उत्साह हमेशा बना रहता है और वे संजीदगी से इस कार्य को करते हैं ! उन्होंने कहा कि इस पेंटिंग में इतनी ताकत है कि कोई भी इसका काम कर परिवार चला सकता है ! इस काम में उनकी पत्नी भी खूब हाथ बँटाती हैं , वे मधुबनी पेंटिंग के जरिए महिलाओं को रोजगार देकर महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी कार्य कर रही हैं ! वे मधुबनी पेंटिंग को डिजीटल स्वरूप देने हेतु प्रयास कर रहे हैं और वे डिजीटल प्रिंटिंग की व्यवस्था कर दिए हैं ! कलाकारों को रोजगार देने के बारे में श्याम बाबू बताते हैं “मधुबनी पेंटिंग का विस्तार विश्व के कई देशों तक है और आज का युग आधुनिकीकरण का है इसलिए सरकार को इंस्टीच्यूट खोलकर इसे बढावा देना चाहिए ! इसके टेलरिंग , स्टीचिंग को और विकसित किया जा सकता है ! इसका स्कोप इतना बड़ा है कि इसे एक उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है ! आज यहाँ काम के अभाव में कई कलाकार दूसरे राज्यों को चले जाते हैं जहाँ इन्हें अच्छे दाम भी मिल जाते हैं ! इसे बढावा देने से लोगों का पलायन नहीं होगा” !

मधुबनी पेंटिंग का स्कोप अत्यन्त बृहद

The Logically से बात करते हुए श्याम बाबू ने मधुबनी पेंटिंग के स्कोप के बारे में बताया कि “इस पेंटिंग का स्कोप बहुत हीं बड़ा है ! मधुबनी पेंटिंग भारत के साथ वैश्विक देशों में भी खूब पसन्द की जाती है ! यह एक ऐसी पेंटिंग है जो प्राचीन समय से चली आ रही है ! धार्मिक स्थलों से लेकर घर की दीवारों तक , कपड़े से लोकर तस्वीरों तक हर जगह मधुबनी पेंटिंग की जा सकती है ! यह पेंटिंग हर जगह को खूबसूरत बना देती है ! इस पेंटिंग को कॉपी करना बेहद मुश्किल है ! आज कई संस्थाएँ और कॉरपोरेट तक टीशर्ट , कैप पर मधुबनी पेंटिंग करवा रही हैं ! वॉल पेंटिंग के जरिए मंदिर का ब्यूटिफिकेशन भी किया जा सकता है ! मधुबनी पेंटिंग के माध्यम से मंदिर की पौराणिक कथाएँ भी तस्वीरों के माध्यम से उकेरा जा सकता है ! इस कार्य से पर्यटन को भी बढावा दिया जा सकता है ! इसे Incredible India के तहत विकसित किया जा सकता है” !

विदेश से भी लोग आते हैं मिलने

श्याम बाबू ने बताया कि आप मधुबनी पेंटिंग का प्रभाव और विस्तार का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि लोग आज भी जापान , दक्षिण कोरिया , अमेरिका , ब्रिटेन आदि देशों से मिलने के आते रहते हैं ! वे इसकी खूबसूरती से बेहद आकर्षित होते हैं और इसे नजदीक से देखने हेतु अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर आते हैं !

Madhubani painting के क्षेत्र को विस्तार देना हीं उद्देश्य

श्याम बाबू अपने उद्देश्य के बारे बात करते हुए कहते हैं कि आदिकाल से चली आ रही और अपने खानदान की विरासत मधुबनी पेंटिंग को सेहजकर उसे और विकसित कर अपने आगे आने वाली पीेढि को सौंपना है ! खूबसूरत चीजों को सहेजना , उसे बनाए रखना और और खूबसूरत बनाना हीं हमारा उद्देश्य होना चाहिए ! हमारे पूर्वजों ने जिस रूप में हमें इस पेंटिंग को सौंपा है हमें उसे और आगे तक ले जाना है” !

इस नम्बर पर श्याम बाबू झा से कर सकते हैं सम्पर्क व खरीददारी:-

यदि आप विश्व विख्यात मधुबनी पेंटिंग से जुड़ा हुआ कोई भी सामान खरीदना चाहते हैं तो श्याम बाबू झा से इस नम्बर पर फोन या व्हाट्सऐप के जरिए कर सकते हैं सम्पर्क:- 9931477824

विश्व विख्यात मधुबनी पेंटिंग को आगे बढाने के कार्य को श्याम बाबू झा जिस लगन और संजीदगी से कर रहे हैं वह काबिल-ए-तारीफ है ! The Logically उनके प्रयासों की खूब सराहना करता है !

Logically is bringing positive stories of social heroes working for betterment of the society. It aims to create a positive world through positive stories.