Thursday, October 28, 2021

मिलिए ‘मखाना मैन ऑफ इंडिया’ से, जिन्होंने मखाना की खेती कर बिहार को दिया नया मुकाम

साकेत, बिहार के पूर्णिया ज़िले के निवासी हैं। वे लगभग2 एकड़ की ज़मीन पर मखाने की खेती कर रहे हैं। इस ज़मीन को कुछ ही साल पहले इन्होंने इसी काम के लिए लिया था। आपको बता दे कि, मखाना को कमल बीज या फॉक्स नट के नाम से भी जाना जाता है।

धान और गेहूं को छोड़, मखाना को चुना-

साकेत बताते हैं कि उन्होंने शुरू से अपने दोस्तों को गेहूं और धान की ही खेती करते देखा है, लेकिन उन्होने मखाना की खेती करने का फैसला किया। साकेत का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, लेकिन इस खेती से उनके कर्ज़ भी उतर गए और बच्चों को अब अच्छी शिक्षा भी मिल रही है।

ज़मीन के आभाव में साकेत ने भी किया था गेहू और धान कज खेती-

साकेत बताते हैं कि उनके पास पर्याप्त ज़मीन नही थी, इसलिए वो पहले गेंहू या अन्य फसलों को बोते थे। लेकिन जब उन्होंने मखाना की खेती शुरू की तब कुछ ही वर्षों में उन्होंने 2 एकड़ जमीन खरीद ली, और परिवार को भी अब सही सुविधाएं दे रहे हैं।

हर साल होती है, 4.5 लाख की कमाई-

मखाने के बीज को बेचकर साकेत को 3.5 लाख की कमाई तो होती ही हैं, उसके साथ साथ जो बीज बच जाते हैं उन्हें वो 40% अधिक मूल्य पर बेच देते हैं। जिससे आय लगभग 4.5 हो जाती है।

मखाना मैन ऑफ इंडिया- सत्यजीत कुमार सिंह से सीखी मखाना की खेती-

साकेत बिहार के उन 8 जिलों के 12000 किसानो में से एक हैं जिन्होंने मखाना मैन ऑफ इंडिया से इस खेती की ट्रेनिंग ली। आपको बता दे कि सत्यजीत सक्ति सुधा इंडस्ट्रीज के संस्थापक हैं।

90% मखाना होता है भारत मे तैयार-

हम सब जानते है कि मखाना पूरे विश्व मे लोकप्रिय है, और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी है। सत्यजीत का दावा है कि इस 90% उत्पादन में से अकेले सुधा कंपनी का 50 % योगदान रहता है। और इसको देखते हुए वे चाहते हैं कि पूरी दुनिया में सत्यजीत का मखाना पहुँचे और उत्पादन 70-75% हो जाये।

क्या है मखाना मैन की कहानी?-

दरअसल, सत्यजीत बिहार के जुमई जिले के निवासी हैं। और वे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। शुरू से ही वो चाहते थे कि कुछ ऐसा करे जो अलग हो , लोगो को प्रभावित करे। पढ़ाई में भी अव्वल रहे। ग्रेजुएशन के बाद दो बार upsc की परीक्षा में भी बैठे। दूसरे बार के परीक्षा उन्होंने पास की, लेकिन बहुत सोचने समझने के बाद उन्हें ऐसा लगा की वो इसके लिए नही बने हैं। उन्हें लगता था कि सिविल सेवा से ज्यादा, वो कारोबार में अपना 100% दे सकते हैं।

हवाई यात्रा में ही बन गया, मखाना की खेती का लक्ष्य-

सत्यजीत बताते हैं कि एक बार वो फ्लाइट से बंगलोर से पटना आ रहे थे। भाग्यवस उनकी मुलाकात Dr. जनार्दन से हुई जो राष्ट्रीय मखाना अनुसन्धान बोर्ड के तत्कालीन निदेशक थे। उन्ही से मखाना के फायदे के बारे के पता चला, फिर सत्यजीत ने तय कर लिए की अब वो यही काम करेंगे। आगे लगभग 3 सालो तक वो डॉ जनार्दन के सम्पर्क में रहे, उनके साथ जगह जगह जा कर बारीकियों को सीखा।

नकद भुगतान को दिया बढ़ावा-

साकेत ने बताया कि शक्ति सुधा के पहले बाजार में मखाना क्रेडिट पर ही आधारित था, लेकिन अब इसकी नकद भुगतान होती है। पहले जहा बिचौलियों के वजह से किसान मेहनत के बावजूद बिक जाते थे, वही अब उन्हें अच्छा लाभ मिलता है। शक्ति सुधा ने किसानों के हित को ध्यान में रखा। उन्हें अब तत्काल उच्च दर भुगतान किया जाता है। अब किसान बड़ी मात्रा में मखाना उपजाते है और बेचते हैं। शक्ति सुधा ने बाजार में मखाना को सुपरफूड साबित किया, जिसे लोग मात्र स्नैक्स के रूप में जानते थे। 19 सालों में मखाना आज बिहार के किसानों के लिए नकदी फसल बन गया है। पहले जहां 1500 हेक्टेयर पर इसकी खेती होती थी वहीं आज ये 16000 पर होती है। और लक्ष्य है कि कुछ वर्षों में ये बढ़कर 25000 हेक्टेयर तक पहुच जाए। उनका मानना है कि किसानों के भरोसे और सहयोग से ही सफलता मिली है।

तालाबों को छोड़, सामान्य ज़मीन पर ही शुरू किया खेती-

परंपरागत तरीके की बात करे तो, मखाना की खेती तालाबों या झीलों में ही होती है। लेकिन शोध और प्रयासों के बाद अब खेती सामान्य ज़मीन पर ही होती है। इससे किसानों को भी सुविधा हुई और वो इससे आकर्षित भी हुए। मखाना की खेती के लिए लगभग 2 फिट पानी की गहराई आवश्यक है, उसी हिसाब से खेतों को तैयार किया जाता है। अब 80 % खेती ज़मीन पर ही कि जाती है और मात्र 20% के लिए ही जलाशयों का प्रयोग होता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हो रही कारोबार को फैलाने की तैयारी-

बिहार जिस गति से मखाना के उत्पादन को बढ़ा रहा है, इसी को देखते हुए शक्ति सुधा ने अपने उत्पाद को पूरे दुनिया तक पहुचाने का लक्ष्य बनाया है। वो खुद को कैलिफोर्निया आलमंड की तरह लोकप्रिय बनाना चाहते हैं।
अभी तक शक्ति सुधा ने रेडी टू मेड मिठाई, कुकीज़ हो, पॉपकॉर्न मखाना स्नैक्स आदि, बाजार तक लाया है। ये आप ऑनलाइन भी ले सकते हैं और ऑफलाइन भी। ये ऑनलाइन डिलीवरी जुलाई से ही शुरू हुई है, और इससे 3.25 लाख रुपये का लाभ भी हासिल हुआ और इसमें 33% रिपीट आर्डर भी हुए हैं।

ग्राहकों को मिलती है प्राथमिकता-

सत्यजीत, ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँच उन्हें उचित उत्पाद पहुचाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि कोई काम शुरू करने से पहले आप उसकी पूरी जानकारी ले, उसे समझे, उससे जुड़े। दुनिया मे बहुत से नकरात्मक चीज़े हैं जो आपको नीचे खिंचेगी, लेकिन आप सबल रहे।

The logically की तरफ से सत्यजीत और उनके गतिशील सोच को नमन।

The logically के लिए इस कहानी को अंजली द्वारा लिखा गया है। बिहार से सम्बद्ध रखने वाली अंजली अभी सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही हैं।