Monday, March 8, 2021

दिन में पैसेन्जर और रात में अपनी ऑटो को एम्बुलेंस बनाकर जरूरतमन्दों को फ्री सेवा देता है यह शख्स

हमने अक्सर लोगों को कहते सुना है कि पहले के व्यक्ति हर समय दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते थे.. एक दूसरे से अपनी परेशानी साझा किया करते थे.. साथ बैठकर देश दुनिया की तमाम बातें करतें और अपना खाली समय बिताया करते थे.. पर अब ऐसा नहीं है.. आज किसी को किसी से मतलब नहीं.. सच जमाना बहुत बदल गया है। लेकिन ये सारी बातें ग़लत है। आज भी कई ऐसे लोग हैं जो दूसरे का दुख जानने के बाद उसे दूर करने के प्रयास में लग जाते हैं।

आज की हमारी यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो पूरा दिन ऑफिस में बिताते है, शाम में ऑटो चलाते है और रात में निःशुल्क एम्बुलेंस सर्विस देते हैं। ये सामान्य व्यक्तियों से बिल्कुल अलग हैं।

मंजूनाथ पुजारी

मंजूनाथ पुजारी (Manjunath Pujari) कर्नाटक (Karnataka) बेलगांव (Belgaum) के निवासी हैं। वह इस कोरोना महामारी में अपनी ऑटो एंबुलेंस सर्विस के लिए देते हैं। यह दिन में ऑफिस में काम करते हैं और शाम में ऑटो चलाते हैं। पूरा दिन बिजी रहने के बाद भी यह रात में लोगों को सेवाएं दे रहें हैं। अगर किसी व्यक्ति को रात 2 बजे भी ज़रूरत पड़े तो यह उनके साथ खड़े मिलेंगे, उनकी मदद के लिए। 25 मार्च 2020 से वह प्रतिदिन लोगों को हॉस्पिटल ले जाते हैं वह भी निःशुल्क। उनका कोई भी ऐसा दिन नहीं है जो लोगों की मदद किए बिना गुजरा हो।

गर्भवती महिला को किया हॉस्पिटलाइज्ड

एक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि इस कोरोना महामारी में प्रॉब्लम तो सबको है लेकिन ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर कोई भी व्यक्ति इन्हें कॉल कर बताए कि मेरे घर में गर्भवती महिला है जिसे परेशानी है, तो उसे किसी भी वक़्त हॉस्पिटल ले जाने के लिए तैयार रहते हैं। मंजूनाथ कहते हैं, “अगर हॉस्पिटल वाले बता दे कि सब कुछ ठीक है, इन्हें घर ले जाओ तो मैं उन्हें घर भी छोड़ देता हूं।”

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रक्तदान भी करते हैं

ये सब करने के साथ ही अगर किसी को रक्त की जरूरत है तो यह अपना रक्तदान भी करते हैं। उन्होंने एक महिला की मदद की जिसे डायलिसिस के दौरान खून की आवश्यकता थी। उन्होंने उस महिला को अपना रक्त दिया। महिला के बेटे ने कहा कि मंजूनाथ ने मेरी और मेरे घर वालों की मदद की है। इसके लिए मैं उनका बहुत-बहुत आभारी हूं। मेरी भगवान से दुआ है कि मंजूनाथ हमेशा खुश रहें।

फ़ौज में जाना था पसन्द

यह हमेशा लोगों की मदद करना पसंद करते हैं । ऐसा नहीं है कि वह लॉकडाउन में ही कार्य कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों से वह इस कार्य में लगे हुए हैं। मंजूनाथ शुरू से आर्मी में जाना चाहते थे। उनके पिता भी फौजी थे। अपने पिता की तरह मंजूनाथ भी देश के लिए कुछ करना चाहते थे। इसलिए फ़ौज में जाना पसंद था। लेकिन एक दुर्घटना में इनका हाथ और पैर बुरी तरह से चोटिल हो गया और इनके सपने ने इनसे मुंह मोड़ लिया।

सड़क दुर्घटना में खोये पैर और हाथ

एक समय की बात है कि सड़क दुर्घटना में आए चोट की वजह से बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ा। लेफ्ट हैंड और राइट लेग में चोट अाई थी। बुरी तरह चोटिल हो गए थे। उनके पैर में रॉड लगाया गया। हाथ से आज भी कोई भारी चीज़ नहीं उठा सकते। फिर भी उन्होंने हर नही मानी। देश की सेवा के लिए वह फौज में नहीं गये लेकिन आज भी सबकी देखभाल के जुनून लिये अपने देश और देशवासियों की सेवा कर रहें हैं।

शुरू किये टैक्सी चलाना

अपनी हालत को देख इन्होंने टैक्सी चलाने का निश्चय किया औऱ यह कार्य शुरू हुआ। इनकी यही टैक्सी लोगों के लिए एम्बुलेंस का कार्य करती थी। आगे इन्हें एक कम्पनी में नौकरी मिली और इन्होंने अपनी टैक्सी को बेच दी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद इन्होंने यह महसूस किया कि टैक्सी लेना जरूरी है। एक रात इनके पास किसी व्यक्ति का मदद के लिए कॉल आया। फिर जैसे-तैसे अपने पड़ोसी से उनकी गाड़ी लियें और उस व्यक्ति की सहायता हॉस्पिटल पहुंचाकर कियें।

पूरा दिन करते हैं काम, शाम 6-9 ऑटो चलाते हैं फिर रात में एम्बुलेंस सेवा

मंजूनाथ “आश्रय फाउंडेशन” से भी जुड़े हैं

मंजूनाथ को ऑटो चलाने से जितने भी पैसे मिलते हैं वह “आश्रय फाउंडेशन” को दान दे देते हैं ताकि लोगों की मदद हो सके। वैसे तो मंजूनाथ अच्छे पैसे कमा लेते हैं लेकिन उनके परिवार को कम पैसे से अपना जीवन व्यतीत करने आता है। अगर देखा जाये तो इनके घर मे कोई भी फ्रिज या टीवी जैसे सामग्री देखने को नहीं मिलेगी। मंजूनाथ ने कुछ पैसे इकट्ठा कर ऑटो खरीदा। 6-9 ऑटो चालक के तौर पर कार्य करने लगे। इनका यही ऑटो लोंगो के लिए रात में एम्बुलेंस बनकर उनकी मदद करता है। चाहे कितनी भी रात क्यो न हो इनकी पत्नी इनके आने का इन्तेजार करती हैं।

NH-4 पर भी किये लोगों की मदद

यह लोगों की मदद इसलिए करतें हैं ताकि इन्हें उनकी दुआएं मिले। कुछ ही दिन इन्होंने अपनी कुछ मित्रों जो उनकी कम्पनी के हैं उनके साथ मिलकर NH-4 पर फंसे लोगों की मदद भी की है। इन्होंने उन जरूरमंद लोगों को खाने की सामग्री भी दी है।

इंडिया बुक ऑफ रिकॉड्स में है नाम दर्ज

मंजूनाथ के इस समाजसेवा के लिए इनका नाम “India Book Of Records” में शामिल है। इन्होंने “क्राउडफंडिंग” अभियान की शुरुआत की है ताकि वह प्रोफेशनल एम्बुलेंस ले सकें। आपको अगर मंजूनाथ से किसी मदद की जरूरत है तो आप 09964375115 पर कॉल कर सकतें है।

निःस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा के लिए The Logically मंजूनाथ को नमन करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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