खुद को कर बुलंद इतना कि खुदा भी आकर पूछे बन्दे तेरी रजा क्या है 

जीवन में अक्सर ऐसा मोड़ आता है जब हमे लगता है हम अकेले हैं हमने अपना सब कुछ खो दिया है जब बस एकांत अच्छा लगता है खुद से हज़ारो सवाल जवाब करने का मन करता है पर अक्सर निराश होकर अपनी ही दुनिया में कही खो से जाते हैं जब सबका साथ गवारा लगता है तब अपना साथ प्यारा लगता है। निराशा के पल हम सब के जीवन में आते हैं कोई बिखर जाता है कोई निखर जाता है पर हमें हमेशा खुद पर विश्वास करना चाहिए और याद रखना चाहिए ये वक़्त भी गुजर जाएगा। कठिन परिस्थितियों में खुद पर विश्वास करके भगवान पर भरोसा करना चाहिए। काम में ऐसे लग जाओ की आसपास की दुनिया का आपको आभास हीं ना हो तो निश्चित ही आपको सफलता मिलेगी।

आज हम बात कर रहे है मेरठ की रहने वाली संजू रानी वर्मा की जो 7 वर्षो के कठिन परिश्रम बाद एक अफसर बनी। संजू एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती है जहाँ लड़कियों की शादी 12वीं के बाद हीं कर दी जाती है नौकरी करना तो दूर की बात है। संजू पर भी घरवालों ने शादी का दवाब बनाना शुरू किया तो उन्होंने शादी से बचने के लिए अपना घर छोड़ दिया और सात वर्षों बाद एक पी. सी. एस अफसर बन घरवालों का नाम रौशन किया। वह जल्दी ही कमर्शल टैक्स ऑफिसर के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लेगी।

मेरठ के एक छोटे से गांव में पैदा हुई संजू की अफसर बनने तक का सफर आसान नहीं था। संजू जहाँ से आती हैं वहाँ लड़कियों को अधिक नही पढ़ाया जाता बल्कि 12वीं पास होते ही उनकी शादी कर दी जाती है पर संजू जो कि अपने सपनों के लिए हर पल जीती थी उसे शादी करना गवारा नहीं था। उनको भीड़ से अलग करना था उन्हें सिविल सर्वेन्ट बनना था बस अपने सपनों की खातिर वह छोड़ आई अपना घर और उन्हें अपने सपनों की खातिर हर दिन संघर्ष करना पड़ता था।

संजू सपनों की खातिर घर तो छोड़ आई थी पर उनका खर्चा चलाना बहुत मुश्किल काम था तो इसके लिए संजू ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाए, प्राइवेट नौकरी की और अपने सपनों के लिए हर दिन मेहनत की और संजू की मेहनत आखिर रंग लाई। संजू कहती है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने प्रयासों के बाद कामयाब हुए बल्कि फर्क इससे पड़ता है कि आपको कामयाबी मिली है या नहीं।

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संजू ने 2004 में अपना ग्रेजुएशन किया वह यूपीएससी की परीक्षा देना चाहती थी वह यह तो जानती थी कि यूपीएससी के लिए ग्रेजुएशन जरूरी है परंतु उसकी पढ़ाई रणनीति सभी के लिए काफी मेहनत की जरूरत लगती। अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। फिर संजू ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन का एंट्रेंस टेस्ट दिया असल मे संजू दिल्ली में पढ़ाई का कैसा माहौल है, कैसे पढ़ाई की जाती है, कितना कॉम्पिटिशन है यह सब देखने आई थी। यह सब देखकर संजू जान गई थी कि यूपीएससी की पढ़ाई के लिए धैर्य आवश्यक है। संजू बताती है दिल्ली में सब अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं यहाँ दिन में सोते हैं और सारी सारी रात उठ कर पढ़ाई करते हैं। संजू बताती हैं कि मेहनत कभी खराब नहीं जाती।

संजू जल्दी ही कमर्शल टैक्स ऑफिसर के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लेगी। वह भविष्य में यूपीएससी की परीक्षा पास कर वह आईएएस यानी कलेक्टर बनना चाहती हैं।

अंत मे बस इतना ही कहना चाहूंगी कुछ अलग और अच्छा करने का जुनून हो तो पूरी कायनात आपको आपके सपने पूरे करने में मदद करती है बस जरूरत है तो सिर्फ खुद पर और काम के प्रति ईमानदार होना। आज संजू अनेकों लड़कियों की प्रेरणा बन गयी हैं। हम संजू के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए और ट्रांसलेशन कर चुकी है अनु साहित्य में विशेष रुचि रखती हैं। इनकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं तथा वेबसाइटों पर प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में फ्रीलांसर राइटर, एडिटर, प्रूफरीडर तथा ट्रांसलेटर का कार्य कर रही हैं।

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