Thursday, October 29, 2020

रमाकान्त त्यागी अभी तक 450 नदियों को पुनर्जीवित कर चुके हैं, लगभग 1200 गांव को जल पूर्ति में हो रही सहायता

जिंदा रहने के लिए जिस तरह ऑक्सीजन की जरूरत है वैसे हीं जल की भी जरूरत है। हमारे यहां जिस तरह पानी का अभाव हो रहा है यह खतरनाक है। पेयजल की किल्लत सभी जगह है। जल संरक्षण के लिए वाकई कुछ ना कुछ करने की आवश्यकता है। हमारे देश के ऐसे कई महानुभाव हैं जो जल संरक्षण के लिए अपना कदम बढ़ाए हैं। उनका यह प्रेरणादायक पहल सभी जीवों के लिए बेहद लाभकारी है। उन महानुभवों में एक जल योद्धा हैं, रामनकान्त त्यागी। जिन्होंने अपना जीवन जल संरक्षण में समर्पित किया है। उन्होंने अब तक 12 सौ गाँव मे जल के संरक्षण के लिए कार्य किया है।

रमनकान्त त्यागी

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ (Meeruth) के निवासी रमनकांत त्यागी (Ramankant Tyagi) ने अपने शिक्षा को संपन्न कर मेरठ में काम करने लगे। परंतु वह अपने इस कार्य से संतुष्ट नहीं थे। रमन के मन में समाज की भलाई के लिए कुछ करने का जज्बा था। जब वह मेरठ में काम कर रहे थे उस दौरान उनकी मुलाकात वर्ष 2001 में अनिल राणा से हुई, अनिल समाजसेवी थे। अनिल पहले तो शिक्षक थे लेकिन उन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़ दी और समाज सेवा में लग गये। अनिल मेरठ में जल संरक्षण का काम किया करते थे।

रमनकान्त ने छोड़ दी अपनी नौकरी

रमनकांत जब अनिल से मिले तब उन्हें लगा कि वह जिसकी तलाश में थे वह उनके पास है। फिर दोनों ने एकजुट होकर निस्वार्थ भाव से अपना कार्य करना शुरू किया। रमनकांत जो नौकरी करते थे उसे छोड़ दिया और अनिल के साथ कार्य में लग गए। कुछ दिनों काम करने के बाद रमनकांत का मन जल संरक्षण में लग गया। जल संरक्षण के लिए रमनकांत ने बहुत सारी किताबें पढ़ी और वहां से जानकारी प्राप्त की। फिर वह उत्तर प्रदेश के गांव में घूमने लगे। इस भ्रमण के दौरान उन्होंने हिंडोन नदी की सरहनपुर से गौतमबुद्ध नगर का मैप तैयार किया। इन्होंने जिस नक्शे को तैयार किया है सरकार भी इसका उपयोग कर रही है। रमनकांत जी ने अनिल को अपना गुरु मानकर उनके नक्शे कदम पर चलते हैं। वर्ष 2008 में अनिल का देहांत हार्ट अटैक से हो गया। तब से रमनकांत अकेले हैं और अपने गुरु के कार्यों को विकसित करने में लगे हैं।

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हजारों जल स्रोतों को किया पुनर्जीवित

रमनकांत ने नीर फाउंडेशन की स्थापना, अपने भाई के साथ मिलकर जल संरक्षण के लिए कार्य किया। वर्ष 2009 में “इस्तांबुल वाटर फोरम” में वे जल संरक्षण के लिए गए। वहां जाने के दौरान उनकी बहुत सारे जल संरक्षकों से मुलाकात हुई। जिससे उनका मनोबल बढ़ा और प्रोत्साहित भी हुए। वे 10 वर्षों से जल संरक्षण का कार्य मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के हजारों जलस्रोतों को पुनर्जीवित किए हैं।

काली नदी को किया पुनर्जीवित

काली नदी जो मुजफ्फरनगर के गांव में है। यह नदी देश के बुलंदशहर, अलीगढ़, हापुड़, फर्रुखाबाद और कासगंज से गुजरते हुए कन्नौज की गंगा नदी में मिल जाती है। इस नदी की लंबाई लगभग 598 किलोमीटर है। इस नदी का पानी लगभग 12 सौ गांव के लोगों के लिए उपयोगी था। लेकिन सुखाड़ के कारण उन लोगों को इससे वंचित होना पड़ा। इसीलिए उन्होंने निश्चय किया कि मैं इस नदी को पुनर्जीवित करूंगा। नदी को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ वह वहां लोगों को जागरुक भी करते कि नदी हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है। इसीलिए हमें अपने पेयजल की सुरक्षा खुद करनी चाहिए और इसकी साफ-सफाई का भी हमें ध्यान रखना चाहिए। कठिन परिश्रम और लंबे समय के उपरांत वर्ष 2019 के 20 नवंबर को इन्होंने काली नदी को पुनर्जीवित कर ही दिया। जल संरक्षण के लिए वह जन-जागरूक, तालाब पुनर्जीवन, रसायनमुक्त कृषि, पौधरोपण और कचरा प्रबंधन जैसे उल्लेखनीय कार्य किए।

किसानों को भी किए मदद

इतना ही नहीं रमनकांत ने किसानों की भी सहायता की है। उन्होंने ग्रामीण इलाके में में “कम्पोस्टिंग यूनिट” लगवाई जिसका निर्माण उन्होंने खुद किया है। इस यूनिट के माध्यम से उर्वरक गन्ने के छिलकों से बनाया जाता है। जब यह कार्य सफल हुआ तब उन्होंने “जीरो वेस्ट” यूनिट का भी निर्माण किया। उत्तर प्रदेश में अधिक गन्ना उत्पन्न होने के कारण वहां पर गुड़ बनाने के लिए कोल्हू बहुत ही ज्यादा मात्रा में है। इन से जो कचरे निकलते हैं इसके लिए ही उन्होंने पुराने कोल्हू को जोड़कर “जीरोवेस्ट यूनिट” का निर्माण किया जिसके उपयोग से किसानों को काफी मदद होती है।

मिल चुका है कई अवार्ड

शुरुआती दौर में उन्होंने अपना कार्य शुरू किया था तो उन्हें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। आगे उन्हें आर्थिक मदद संगठनों के सहयोग से मिला। उनके बहुत सारे प्रोजेक्ट बड़े नामों में मौजूद है। जैसे वेटर कलेक्टिव, अलायंस यूनाइटेड नेशन, फिक्की और इंटरनेशनल वाटर एसोसिएशन। रमनकांत को तीन बार वर्ल्ड चैंपियन का खिताब प्राप्त हुआ है।

रमनकांत जी से सम्पर्क करने का माध्यम

अगर आप रमनकान्त से बात करना चाहते हैं तो इन माध्यमों पर उन्हें सम्पर्क कर सकते हैं
मोबाइल नं:- 9411676951
ईमेल:- theneerfoundatiom@gmail.com

रमनकांत जी ने जिस तरह जल संरक्षण के लिए कार्य किया और कई जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया वह प्रेरणादायक है। The Logically रमनकांत जी के प्रयासों की खूब सराहना करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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