भारत एक कृषि प्रधान देश है, यह बात हम भाली भांति जानते हैं। हमारे देश में ज्यादातर लोगों के जीवन यापन का जरिया कृषि ही है। कुछ किसान खेतों में अन्न उपजाने का काम करते है तो कुछ फल, वहीं कुछ फूलों की खेती कर लाखों की कमाई करते हैं। ऐसा नहीं है कि इस कार्य में केवल पुरुष वर्ग ही माहिर होते हैं, आज कल की महिलाएं भी कृषि के क्षेत्र में अपना व्यवसाय ढूंढ़ ख़ूब कमाई कर रही हैं। आज की हमारी कहानी वैसी ही दो महिलाओं की है जो शहर में अपनी MBA और CA की नौकरी छोड़ गांव में फूलों की खेती कर रही हैं।

शिवानी माहेश्वरी (Shivani Maheshwari) जयपुर (Jaypur) की रहने वाली हैं। शिवानी एमबीए (MBA) की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। वामिका बेहती (Wamika Behatee) दिल्ली (Delhi) की रहने वाली हैं। वामीका सीए (CA) की डिग्री हासिल कर चुकी हैं। शिवानी और वामीका दोनों दोस्त हैं। इन दोनों ने फूलों की खेती करने का फैसला लिया। अपनी अच्छी खासी नौकरी और शहर की चकाचौंध भरी ज़िन्दगी छोड़कर खेती की तरफ़ रुख मोड़ना बहुत बड़ी बात है। हम अक्सर बिना पढे-लिखे लोगों को खेती करते देखते हैं, लेकिन अब समय बदल चुका है, ज्यादातर लोगों का जुड़ाव अपनी मिट्टी से बढ़ते जा रहा है।

2015 में एक समय शिवानी माहेश्वरी  (Shivani Maheshwari) दिल्ली रोहतक के सफ़र के दौरान पॉलीहाउस फार्म देखी तभी उनके मन में फूलों की खेती करने का विचार आया। शिवानी फूलों की खेती के बारे में इंटरनेट पर जानकारियां ढूंढने लगी और अपनी नौकरी छोड़कर खेती करने का फ़ैसला ली।


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आगे शिवानी की मुलाकात वामिका बेहती (Wamika Behatee) से हुईं। दोनों ने एक साथ फ्लोरिकल्चर करना प्रारंभ किया। वामिका का बहादुरगढ़ (Bhadurgadh) में एक कारखाना और झाझर (Jhajhar) जिले में तंडा हेरी (Tandaheri) गांव में खाली जमीन भी था। दोनों ने हरियाणा (Hariyana) में फूलों की खेती करने की योजना बनाई क्योंकि हरियाणा खेती के लिए प्रसिद्ध हैं। दोनों ने साथ मिलकर एक फार्म का निर्माण किया जिसका नाम युनिस्टार एग्रो (Unistar Agro) रखा। उस फार्म में अनेकों तरह के फूलों जैसे- लिलियम (Liliyam), गेरबेरा (Gerbera), गुलाब (Rose), रजनीगंधा (Rajnigandha) और ग्लेडीयस (Gladiolus) की खेती प्रारंभ की।

भारत में फ्लोरिकल्चर उद्योग हर साल 30% की रफ्तार से बढ़ रहा है। हरियाणा में शिवानी और वामिका ने अपनी खेती प्रणाली विकसित करने के साथ वहां के अन्य किसानों को भी उन्नत किस्म की खेती और नए व्यवसाय से रूबरू करवाया। इतना ही नहीं किसानों को ऑर्गेनिक खेती के से भी अवगत कराया जिससे उनकी बहुत मदद हुईं, वे भी नई तकनीक से खेती सीख कर विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं। दोनों मित्रों के व्यवसाय युनिस्टार एग्रो को हरियाणा सरकार से भी मदद मिल रही है। इनकी मेहनत और किसानों के मुनाफे को देखते हुए सरकार ने सब्सिडी और इनसेंटिव देना शुरू किया है।

शिवानी और वामिका दोनों की मेहनत और त्याग सराहनीय है। जहां लोग अच्छी नौकरी के लिए शहर की ओर अग्रसर हो रहे हैं, वहीं इन दोनों का निर्णय विपरीत है। दोनों को अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ खेती प्रणाली को विकसित करने और अपनी मिट्टी को संजोए रखने के प्रयास के लिए The Logically आभार व्यक्त करता है।

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