Sunday, October 25, 2020

स्लम के बच्चों को पढाने के लिए बैंक कर्मी ने शुरू किया मुहिम, उन्हें पढाने के साथ भोजन और पाठ्य सामग्री भी देती हैं

बिना शिक्षा के मनुष्य का जीवन एक पशु के सामान है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण अंग हैं। शिक्षा इन्सान को सही और गलत में फर्क समझाती हैं। एक शिक्षित व्यक्ति ही अच्छे समाज का निर्माण कर सकता है। पढ़ा-लिखा मनुष्य अपने जीवन में कुछ भी कर सकता हैं जो एक अनपढ़ व्यक्ति नहीं कर सकता। शिक्षा के कारण ही मनुष्य को सच-झूठ, सही-गलत इन सब में अन्तर समझ आता है। अगर किसी इन्सान के पास धन हैं लेकिन शिक्षा नहीं है तो वह उस धन को गलत कार्यों में भी लगा सकता हैं क्योंकि बिना शिक्षा ग्रहण किये मनुष्य सही और गलत के बीच का जो अंतर है उसे नहीं समझ सकता। इसके विपरित अगर किसी शिक्षित व्यक्ति के पास कम धन हैं तो वह अपनी बुद्धि से धन का इस्तेमाल कर अपना फायदा कर सकता हैं। इसिलिए किसी ने सही ही कहा है,”ज्ञान सबसे बड़ा धन है।” शिक्षा ग्रहण कर हम अपना अच्छा करियर बना सकते हैं। ज्ञान के वजह से हम अपने अन्दर की प्रतिभा को समझ पाते हैं।

अगर देखा जाये तो कहीं न कहीं आज भी पैसे के अभाव में बहुत सारे बच्चे शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं। यह लगभग सही भी है, आज महंगाई के इस नये दौर में शिक्षा भी महंगी हो गयी है। जिनके पास पैसे हैं उन्हें अच्छी शिक्षा मिल जाती है लेकिन गरीब बच्चों को कोई शिक्षा नहीं देता हैं। आजकल लोगों के लिए शिक्षा एक व्यवसाय का साधन हैं। लेकिन अभी भी कुछ ऐसे समाजसेवी हैं जो इसे व्यवसाय नहीं समझते हैं और शिक्षा के महत्त्व को समझते हुए वह अपने व्यस्त जिन्दगी में से कुछ फुर्सत के पल निकाल कर दूसरे गरीब बच्चों में ज्ञान बांटते हैं। ऐसी ही एक महिला हैं जिन्होनें अपने फुरसत के पल में गरीब बच्चों को पढाती हैं।

तरुणा विधाय (Tarunaa Widhaay) बैंक में नौकरी करती हैं। इनकी उम्र 30 वर्ष है। वह गाजियाबाद के इन्दिरापूरम (Indirapuram) में गरीब बच्चों को शिक्षा देती हैं और उनकी मदद करती हैं। तरुणा जब छोटी उम्र में अपनी स्कूल, कॉलेज जाती थी तो वह अक्सर देखती थी कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पैसों के कमी के वजह से गरीब और सामान्य परिवार के बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती है और वह शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। तब उन्होनें निश्चय किया कि वह ऐसे बच्चों की मदद करेंगी जो आर्थिक तंगी के कारण स्कूल नहीं जा पाते हैं जिससे उनकी पढ़ाई नहीं होती है। तरुणा ने वर्ष 2012 में बच्चों को पढ़ाने का काम शुरु किया। उन्होनें अपने बैंक के काम से समय निकाल कर कुछ समय स्लम के बच्चों को देना शुरू किया। तरुणा को इस काम में कुछ दिक्कतें भी आयी लेकिन उन्होनें अटल विश्वास के साथ उनका सामना किया।

तरुणा (Tarunaa) को बच्चों के साथ वक्त बिताना अच्छा लगता हैं। वह अपने कुछ मित्रो के साथ उन बच्चों को पढाती हैं। कहा जाता है, गरीबी और पैसो की मजबूरी इन्सान से क्या कुछ नहीं करवा सकती। पैसों की कमी और घर-परिवार में आर्थिक तंगी के वजह से कुछ बच्चे अपने माता-पिता के काम में हाथ भी बटाते है जिससे उन मासूम बच्चो को पढ़ाई करने का समय नहीं मिलता है और वह शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते। बच्चों को काम न करना पड़े इसके लिए तरुणा ने एक कैपेन का आरंभ किया हैं। इसकी शुरुआत करने के लिए तरुणा को रुपयों की जरुरत पड़ी। पैसों की जरुरत को पूरा करने के लिए उन्होनें अपने समूह के मेम्बर को 2000 रूपए दान में देने के लिये कहा। सभी सदस्यों ने पैसा को दान के रूप मे देकर तरुणा की मदद की। इस कैपेन की सहायता से वह 100 बच्चों को चुन कर लाती हैं। उन बच्चों को काम न करना पड़े और वह मन लगा के पढाई कर सके इसके लिए तरुणा बच्चों को खाद्य-सामाग्री देती हैं जिसमें दाल, रोटी, सब्जी, फल सभी फायदेमंद खाद्य-सामाग्री शामिल हैं। वह बच्चों के लिए स्टेशनरी का सामान भी उप्लब्ध करवाती हैं। तरुणा बच्चों को प्रतिदिन योगा अभ्यास भी करवाती हैं जिससे बच्चे स्वस्थ रहे।

हमारे समाज में आज भी महिलाओं की ज़िंदगी को शादी तक ही सीमित माना जाता है। परिवार वाले चाहते हैं जल्द से जल्द बेटी की शादी कर दे। तरुणा के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। तरुणा पर भी उनके परिवार वालो ने जल्द से जल्द नौकरी कर शादी करने का दबाव बनाया जाता था। लेकिन तरुणा विधाय ने किसी की नहीं सुनी। उन्होनें दृढ़ निश्चय किया कि वह वैसे इंसान के साथ विवाह करेंगी जो इनके काम में इनका साथ दे इनका समर्थन करे। कहते हैं न “अगर मन में कुछ करने के लिए दृढ इच्छा शक्ति, संकल्प हो तो इंसान अपने दृढ़ संकल्प शक्ति से सब कुछ कर सकता है।” आखिरकार तरुणा के परिजन को तरुणा की बात माननी ही पड़ी। तरुणा के परिवार जन इस काम में उनका सहयोग करतें हैं। आज तरुणा पर परिवार जन गर्व महसूस करतें हैं कि तरुणा गरीब बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे रही हैं और उनकी मदद कर रही हैं।

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उनका एक संगठन है जिसका नाम निर्भेद फाउंडेशन हैं। यह संस्था हमेशा प्रयासरत रहती हैं कि कोई भी बच्चा बिना खाए न रहें और शिक्षा से वंचित न हो। इस संगठन ने अपनी दूसरी वर्षगांठ पर निश्चय किया कि प्रोजेक्ट निर्माण के तहत मुफ्त पढ़ाई के अलावा स्कूल, अनाथालय और चिकित्सा सेंटर की भी सुविधा उप्लब्ध करायी जायेगी। इसके अलावा जरुरतमंद को फ़्री शिक्षा के साथ मुफ्त में कपड़ा भी दिया जायेगा। इस संस्था के मदद से जिन बच्चों के पास घर नहीं हैं उन बच्चों को रहने के लिए जगह भी दिया
जायेगा।

Tarunaa बताती है कि वहां पढ़ने वाले बच्चे बहुत बुद्धिमान हैं। उनको पढ़ाई में मदद दिया जाये तो आगे इस देश के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं।

The Logically तरुणा के काम की सराहना करता हैं और गरीब बच्चों के मन में पढ़ाई के प्रति ललक जगाने के लिए उन्हें हृदय से नमन करता हैं।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

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