Wednesday, December 2, 2020

तीन बेटियों को जन्म देने पर समाज ने भ्रूणहत्या तक की सलाह दी, आज तीनों IAS बन परिवार का नाम रौशन कर रही हैं

सरकार के अनेकों पप्रयासों के बावजूद हमारा समाज अभी भी अपनी मानसिकता को नहीं बदल पाया है। आए दिन लड़कियों के प्रति होने वाले घटनाओं से मालूम होता है कि अभी समाज का एक बड़ा हिस्सा लड़कियों के जन्म पर खुशी मनाने के बजाय शोक मनाता दिखता है।

21वीं सदी के भारत में लड़कियों ने अपने बलबूते पर अनेकों कठिन कार्यों को बड़ी आसानी से किया है और समय समय पर अपनी काबिलियत और हुनर का बखूबी परिचय दिया है, इसके बावजूद उन्हें लड़कों के सामान तवज्जो नहीं दी जाती है और आए दिन अभद्र तानों का सामना करना पड़ता है।

तीन IAS बेटियों की कहानी

आज की कहानी ऐसे ही 3 बेटियों की हैं जो आज IAS की कुर्सी पर बैठकर सफलता की ऊंचाई छू रही हैं। लगातार बेटी पैदा होने पर इनके पिता को लोगों ने अबोर्शन करने की सलाह दी लेकिन पिता ने किसी की नहीं सुनी। आज ये तीनों बेटियां IAS बनकर अपने पिता और क्षेत्र का नाम रौशन कर रही हैं। इसके साथ ही इनकी सफलता ने लोगों की अपनी संकुचित सोच को भी बदलने के लिये मजबूर कर दिया हैं जो बेटियों को कमतर आंकते हैं।

one family 3 IAS

देखा जाये तो हमारे समाज में जिसकी एक से अधिक बेटियां हैं, उसे एक अलग ही नजरिये से देखा जाता है। बेटियों को अभी भी समाज का एक बड़ा तबका बोझ की तरह समझता है। इस वजह से लोग लड़कियों को इस दुनिया में आने से पहले ही खत्म कर देने की सलाह देते हैं। कई लोग भ्रूण के लिंग की जांच कराते हैं और बेटी का पता लगने पर अबोर्शन की सलाह देते हैं। हमारे समाज में तो यह भी कहा जाता है कि जो बेटे कर सकतें हैं वो बेटियां नहीं कर सकती। परंतु यह सोचने की बात है कि अगर बेटियों को भी बेटे जैसे परवरिश मिले तो वह भी बेटे जैसा या उससे अच्छा कार्य कर सकती हैं और अपने माता-पिता के साथ अपने क्षेत्र का नाम भी रौशन कर सकती हैं।

चंद्रसेन सागर बरेली के पूर्व ब्लॉक प्रमुख हैं। उनकी 3 बेटियां अर्जित, अर्पित और आकृत हैं जो तीनों IAS हैं। उनकी पत्नी का नाम मीना सागर है। चंद्रसेन सागर का कहना है कि राजनीति में होने के बावजूद भी उनका प्रयास रहता है कि कभी भी किसी का बुरा नहीं हो। अच्छे कर्म का फल हमेशा अच्छा ही होता है। इसलिए शायद उनकी अच्छाई का फल उनकी बेटियों को मिलता है। चंद्रसेन सागर की तीनों बेटियों अर्जित, अर्पित और आकृत की पढ़ाई की चिंता सबसे अधिक उनकी माता मीना सागर हो होती है। तीनों बेटियों की मां, मीना सागर उनके इम्तिहान के दौरान उनके साथ रहती है ताकी किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े और पढ़ाई में रुकावट पैदा न हो।

IAS बनाने में माँ की अहम भूमिका

अक्सर देखा जाता है कि घर के सभी निर्णय घर के मुखिया के द्वारा ही लिया जाता है लेकिन इसके विपरीत,मीना सागर अपनी सभी बेटियों का ख़्याल बहुत अच्छे से रखती हैं। वह बेटियों के साथ ही रहती है। बेटियों को IAS बनाने में उनकी मां मीना सागर की बहुत बड़ी भुमिका है। चंद्रसेन सागर बरेली में अकेले रहते हैं और वहीं से अपनी बेटियों की हौसला अफजाई करते हैं।

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पिता ने हमेशा प्रोत्साहित किया

चंद्रसेन सागर ने कभी भी अपनी बेटियों पर सपनों के बोझ को नहीं डाला। उन्होंने कभी भी अपनी इच्छा को उनके ऊपर नहीं थोपा। बेटियों को जिस क्षेत्र में जाने का मन था उस क्षेत्र में चंद्रसेन ने उनका साथ दिया। उन्होंने बताया, “बेटियां जो बनना चाहती थी, वहीं बनी। उनके सपनों को पूरा करने में मैने उनका साथ दिया।”

चंद्रसेन सागर ने भावुक होते हुए बताया, “समाज में वास्तव में बेटियों को लेकर सोच अच्छी नहीं रही। जब लगातार बेटियां हुईं तो कुछ लोग अल्ट्रासाउंड का सुझाव देकर कहने लगे कि अबोर्शन करा दो, नहीं तो झेल नहीं पाओगे। पहले के समय में अल्ट्रासाउंड कराने पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं था। परंतु हम किसी के भी झांसे में नहीं आये। हम दोंनो पति और पत्नी ने विचार किया कि बेटा हो या बेटी क्या अन्तर है।”

इसके अलावा वे यह भी कहते हैं, “यह सब इश्वर की देन है। आज हमें हमारे फैसले पर बहुत नाज है। लोग जिन बेटियों के अबोर्शन का सुझाव दे रहें थे, उन्हीं बेटियों ने मेरे अधुरे सपने को सच कर दिखाया है। जिससे हमारा सर आज फक्र से ऊंचा हो गया है। एक पिता के लिये इससे बड़ी कामयाबी और खुशी की बात कुछ और नहीं हो सकती है। आज चन्द्रसेन की तीन बेटियां जहाँ IAS बनकर सफलता का परचम परचम लहरा रही हैं।”

आज चंद्रसेन सागर की पहचान एक नेता से ना होकर, 3 IAS बेटियों के पिता के रूप में हुई है। बरेली में आज उनके बारें में पूछने पर लोग कहेंगे वही न जिसकी 3 बेटियां IAS ऑफिसर हैं। सच में एक पिता के लिये यह बहुत गर्व की बात है।

The Logically ऐसे पिता के प्रयास को नमन करता है और साथ ही अपने पाठकों से यह अपील करता है कि लिंग के आधार पर होनेवाले भेदभाव को खत्म कर अपने बेटियों को भी बेटों जैसा समान मौका दें।

News Desk
तमाम नकारात्मकताओं से दूर, हम भारत की सकारात्मक तस्वीर दिखाते हैं।

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