Thursday, October 28, 2021

दो बहनों ने शहरी जिंदगी छोङ अपनाया गांव, जैविक खेती से खोले लोगों हेतु तरक्की के रास्ते !

जहाँ आज के युवा शहर की ओर तेजी से रूख कर रहे हैं ! उनमें अपनी पढाई के उपरान्त अच्छी और मल्टीनेशनल कम्पनियों में नौकरी प्राप्त करने की उनकी लालसा और शहर की सुख-सुविधाओं को जीने की उनकी बेतरतीबी बखूबी देखी जा सकती है ! लेकिन इन सबसे इतर कुछ युवा ऐसे भी हैं जिनके सामने शहरी सुविधाओं और मिलने वाले ऐश-ओ-आराम , शहरों की चमक-धमक फीकी पड़ जाती हैं और वे गाँवों का रूख कर लेते हैं और उसी को अपना लेते हैं ! उत्तराखंड की रहने वाली दो बहनें कुशिका शर्मा और कनिका शर्मा गाँव को अपनाने वाली एक ऐसी हीं उदाहरण हैं जो अपनी जैविक खेती से किसानों की जिंदगी बदल रहीं हैं ! आईए जानें उनके बारे में….

कुशिका शर्मा और कनिका शर्मा अपनी पढ़ाई के पश्चात् अच्छी नौकरी प्राप्त कर लीं ! शहर की सारी सुख-सुविधाएँ उनके पास मौजूद थीं लेकिन उनके पास सुकून नहीं था जो वे लोग पहाड़ियों में लिया करती थीं ! दोनों बहनों ने गाँव की ओर रूख करने का मन बनाया और सोंचा कि गाँव जाकर वे लोग गाँव के उत्थान के लिए कुछ करेंगी ! दोनों ने अपनी नौकरियाँ छोड़ दीं और उत्तराखंड के अपने गाँव मुक्तेश्वर आ गईं !

दोनों बहनें गाँव आकर सर्वप्रथम अपने गाँव का जायजा लिया तो पाया कि यहाँ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है ! वहाँ के लोग कृषि तो कर रहे थे लेकिन अधिक पैदावार को लेकर लोग बिल्कुल भी जागरूक नहीं थे ! उन्हें ना तो कोई तरीका मालूम था और ना हीं उन्हें कोई इस ओर ध्यान हीं था ! जैविक खेती उनके लिए बिल्कुल नई चीज थी ! जबकि शहरों में जैविक उत्पादों की मांग अधिक है और मूल्य भी अच्छा मिल जाता है ! इन सब परिदृश्यों को देखकर , उस पर मनन कर दोनों बहनों ने जैविक खेती के लिए हीं कुछ करने को सोंचा !

ऑर्गेनिक खेती की शुरूआत

कुशिका और कनिका दोनों अपने गाँव लौटकर कुछ ऐसा करने का विचार कर रहीं थीं जिससे उनके गाँव का भी भला हो ! इसी बीच उनके अंदर ऑर्गेनिक खेती करने व उसके प्रति लोगों को जागरूक करने का विचार आया जिसमें उनके परिवार का भी समर्थन मिला ! दोनों बहनों ने “दयो-द ऑर्गेनिक विलेज रिसॉर्ट” की स्थापना की ! इसके माध्यम से वे दोनों किसानों को जागरूक करने लगीं ! इसके बाद इस कार्य को अपने गाँव के बाहर भी ले जाना शुरू किया जिससे दूसरे गाँव के किसान भी इस खेती के प्रति जागरूक हो सकें ! इसके बाद दोनों ने खुद से जैविक खेती करने का विचार बनाया लेकिन जैविक खेती करना उनके लिए बिल्कुल नया था इसीलिए वे इसके बारे में प्रशिक्षण लेना प्रारंभ कर दिया ! कुछ राज्यों का दौरा कर वहाँ के जैविक खेती के तरीकों का अध्ययन किया ! प्रशिक्षण के पश्चात अपने गाँव में हीं 25 एकड़ की भूमि पर जैविक खेती की शुरूआत कर दी !

“दयो-द ऑर्गेनिक विलेज रिसॉर्ट” से दे रहीं पर्यटन को बढावा

“दयो-द ऑर्गेनिक विलेज रिसॉर्ट” की स्थापना कर वे पर्यटन के क्षेत्र में भी कार्य करना शुरू कर दिया ! शहर में रहते हुए दोनों बहनों को इस बात का अनुभव हो गया था कि बहुत सारे लोगों को गाँव से लगाव है , वे छुट्टियों में गाँव जाना पसन्द करते हैं ! इसलिए उन्होंने अपने रिसॉर्ट के माध्यम से इस तरह की व्यवस्था की जिससे वहाँ आए लोगों को सुखद अहसास हो , उसे देखकर उनके अन्दर भी कुछ करने का विचार जागृत हो ! यहां आने वाले पर्यटकों को विशेष सुविधा प्रदान की जाती है जिसमें वे अपने हाथों से अपनी पसन्द की सब्जियों को तोड़ सकते हैं और उसे शेफ को देकर अपनी पसन्द का खाना भी बनवा सकते हैं !

पर्यटन के विकास के साथ-साथ पर्यटन को वहाँ के लोगों के आजाविका से जोड़ा जा रहा है ! दोनों बहनें वहाँ के लोगों को सैलानियों के आतिथ्य का प्रशिक्षण भी दे रही हैं ! इसकी बानगी साफ तौर पर इस बात से देखी जा सकती है कि वहाँ खेती से लेकर आतिथ्य और खाना बनाने तक का कार्य स्थानीय लोग हीं कर रहे हैं ! वहाँ खेतों में उपजने वाले फसलों को बेचने के लिए वह एक ऐसी व्यवस्था कर रही हैं जिससे उसे बाजार में बेचा जा सके !

कुशिका शर्मा और कनिका शर्मा ने जिस तरह जैविक खेती के प्रति लोगों को जागरूक किया , उन्हें प्रशिक्षित किया और फिर एक ऑर्गेनिक रिसॉर्ट के माध्यम से लोगों को रोजगार के नए अवसर प्रदान किए वह सभी के लिए बेहद प्रेरित करने वाला कार्य है ! दोनों बहनों ने एकदम शून्य से शुरूआत कर आज सफलता का जो मुकाम हासिल किया है वह लोगों के लिए अवसर खोलने सरीखा है ! Logically कुशिका शर्मा और कनिका शर्मा को और उनके प्रेरक कार्यों की खूब सराहना करता है !