Wednesday, August 4, 2021

300 ग्रामीणों को जोड़कर इस शिक्षक ने शुरू किया सब्जियों की आर्गेनिक खेती, साल भर में 1 करोड़ की कमाई किये

आजकल खेती का प्रचलन इस कदर बढ़ गया है कि लोग अपनी नौकरी छोड़ इससे जुड़ रहें हैं। ताकि वे शुद्ध, स्वच्छ और ताजा भोजन करने के साथ साथ मुनाफा भी कमा सकें। ऐसे ही उत्तरप्रदेश के एक शिक्षक है जिन्होंने मन बनाया कि मैं भी खेती करुंगा। फिर इन्होंने इस विषय मे जानकारी एकत्रित की, फिर फल और सब्जियों की खेती करने लगें। अब यह अपने शिक्षण कार्य करने के साथ साथ खेती से करोड़ो रुपये का व्यपार कर लाभ भी प्राप्त कर रहें हैं। इतना ही नहीं इन्होंने अपने साथ इस कार्य में 3 सौ से अधिक व्यक्तियों को भी जोड़ा है।

अमरेंद्र प्रताप सिंह

अमरेंद्र प्रताप सिंह (Amrendra Pratap Singh) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बाराबंकी (Barabanki) जिले के दौलतपुर (Daulatpur) गवर्नमेंट स्कूल (Government School) में टीचर है। इस स्कूल से इन्हें वार्षिक वेतन 1.20 लाख रुपये मिलते हैं। लेकिन यह अपनी खेती से इससे अधिक पैसा कमा रहे हैं। इन्हें खेती करने के सभी तरीके के विषय में भली-भांति जानकारी है। यह सिर्फ खेती ही नहीं करते बल्कि अन्य किसानों को भी इसकी जानकारी देकर उनसे भी खेती करवाते हैं। यह अपनी फैमिली के साथ लखनऊ में रहते हैं। वर्ष 2014 में स्कूल की छुट्टी के दौरान वह अपने परिवार को लेकर घर आए और यहां 30 एकड़ भूमि में खेती करने का निश्चय किया।

Amrendra Pratap Singh farmer

शुरुआत की फलों और सब्जियों की खेती

इन्होंने परम्परागत खेती को छोड़ फलों और सब्जियों की खेती करने का निश्चय किया और इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया से हेल्प ली। इन्होंने खेती के सभी जानकारियों को यूट्यूब से इकट्ठा किया और 1 एकड़ में केले की खेती करने का निश्चय किया। इनके यहां सभी किसान परंपरागत खेती किया करते थे जिससे उन्हें अधिक लाभ नहीं मिला था लेकिन इन्हें अपने घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करनी थी। इसलिए इन्होंने कुछ अलग करने के बारे में सोचा। शुरुआती दौर में जब इन्होंने केले की खेती शुरू की और इससे इन्हें सफलता हासिल हुई तब इनका मनोबल बढ़ा। जब इन्हें यह पता चला कि इसके साथ अदरक, हल्दी और फूल गोभी को भी लगाना चाहिए क्योंकि अदला-बदली कर खेती करने से उत्पादन से अधिक लाभ मिलता है। अगर अधिक मुनाफा कमाना है तो हल्दी की खेती की जाए तो आमदनी अच्छी होगी।

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असफलता से घबराये नहीं और सफलता हासिल किए

जब इन्हें खेती से कामयाबी हासिल हुई तब यह दौलतपुर आए और फिर यहां आकर इन्होंने खरबूज, तरबूज के साथ आलू की खेती भी शुरू की। खेती को और भी अच्छे तरीके से विकसित करने के लिए यह अन्य लोगों के खेतों में जाकर वहां उसे देखते समझते और जानकारी इकट्ठा करते। साथ ही इन्होंने सोशल मीडिया की भी सहायता ली और फिर शिमला मिर्च, स्ट्रौबरी एवं मशरूम को खेतों में उगाए। शुरुआती दौर में इन्हें असफलता मिली लेकिन यह डरे नहीं और ना ही घबराए, यह मेहनत से अपने कार्य में लगे रहे। यह अपने खेतों में उपजे हुए अनाजों से निकले कचरो का उपयोग खेतों में उर्वरक बनाने के लिए करते हैं।

Amrendra Pratap Singh farmer

इंटर्करोपींग तकनीक से हुई अच्छी उत्पादन

इनकी 30 एकड़ जमीन खुद की थी, बाकी 20 एकड़ इन्होंने लीज पर ली और 10 एकड़ जमीन इन्होंने हाल में खरीदी है। इस 30 एकड़ में खेती में अमरेंद्र ने लहसुन, धनिया और मक्का की खेती की। बाकी जो जमीन है, उसमें वह गन्ना गेहूं, अनाजों और फल-सब्जियों का उत्पादन करते हैं। आज के वक्त में इनका व्यापार लगभग एक करोड़ का है। वह हर साल 30 लाख का मुनाफा कमा रहें हैं।

जुड़े हैं 350 किसान

इनकी खेती से वहां के अन्य किसान बहुत प्रभावित हुयें हैं और इन्होंने इसके तरीकों को सीखकर खेती की। लगभग 350 किसान इनसे जुड़ चुकें हैं। इनके एक दोस्त हैं, नरेंद्र। इन्होंने ने इसके गुण को सीखा, फिर खेती कर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।

vegetable farming

एक शिक्षक होने के बावजूद भी जिस तरह इन्होंने अपनी भूमि को महत्व देकर खेती किया, वह कार्य प्रशंसनीय है। The Logically अमरेंद्र जी को सराहना करते हुए सलाम करता है।