Wednesday, October 21, 2020

पुलिस नदारत रही लेकिन गोरखपुर के आज़ाद ने अग़वा होते लड़की को असमाजिक तत्वों के चंगुल से बचा लिया

आज के समय में मौका देखते हीं मजबूरी का फायदा उठाने का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है ! आए दिन हमारे आसपास, हमारे शहर, या हमारे देश में कई सारी दुर्घटनाएं, अवैध कार्य, किसी लडक़ी या बच्चे के साथ गलत सुलूक होता हीं रहता है। आज के समय में पब्लिक की मौजूदगी में उक्त वारदातें होती रहती हैं लेकिन वहाँ मौजूद लोगों के कान पर जू तक नहीं रेंगता ! वे बेफिक्र होकर या तो चल देते हैं या तमाशबीन रहते हैं ! वैसे हो रहे वारदातों के समय लोगों की अनदेखी के बीच एक शख्स आजाद पाण्डेय ऐसे हैं जो उन घटनाओं के शिकार हो रहे लोगों के लिए उम्मीद बनकर आए हैं….

हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि किसी के साथ बुरा होने पर भी वहां मौजूद लोग कुछ नहीं बोलते या कुछ नहीं करते और कई बार तो उन्हें वह घटना जब तक समझ आए तब तक कुछ बुरा हो चुका रहता है। एकबार की बात है कि ऐसा ही कुछ घटित हुआ उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में। एक मानसिक रूप से अस्वस्थ लड़की जो सड़क पर धूप में इधर-उधर मंडरा रही थी, कुछ ऑटो चालक उसे बहलाने-फुसलाने में लगे थे। वह थोड़ी चहल-पहल वाली जगह थी लेकिन किसी का ध्यान उस तरफ नहीं गया। शायद किसी ने देखा नहीं या फिर देखा भी तो उसके लिए शायद यह समझना मुश्किल था कि यहां हो क्या रहा है। लेकिन उनमें से ही एक व्यक्ति को जब कुछ संदेह हुआ तो उन्होंने स्माइलप्रोटेक्शनग्रुप के सदस्य आजाद पाण्डेय को फोन किया और कहा- “भइया एक लड़की यूनिवर्सिटी चौराहे के पास इधर-उधर टहल रही है और कुछ ऑटो चालक उसे बहला फुसला रहे हैं, लड़की मानसिक रूप से अस्वस्थ लग रही है शायद उसके साथ कोई दुर्घटना हो सकती है”।

आजाद पाण्डेय उस शख्स की बातें सुनते हीं बिना कुछ सोचे समझे स्माईल टीम के कुछ लोगों के साथ निकल पड़े उस घटनास्थल की ओर जहाँ के बारे में उन्हें जानकारी दी गई थी। इसी बीच उन्होंने पुलिस को भी सूचना दी लेकिन उनके तरफ से इस केस में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गयी। तब तक स्माइल ग्रुप के सदस्य वहां पहुंच गए और उन ऑटो चालकों पर नजर रखना शुरू कर दिया! हलांकि उसी वक्त जिला प्रशासन को भी संदेश भेजा गया लेकिन उनके तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। कुछ देर हीं बीते थे कि एक ऑटो वाले ने उस लड़की को अपने ऑटो में बैठा लिया लेकिन मौके की नजाकत को समझते हुए कि कोई अनहोनी ना हो जाए स्माइल ग्रुप के सदस्यों ने उस ऑटो को घेर लिया और लड़की को ऑटो से उतार लिया! यह देखते हीं ऑटो चालक वहां से फरार हो गया। उस लड़की को लेकर टीम के सदस्य “चाइल्डलाइन हेल्प सेंटर” गए, जहां उसके माता-पिता और घर का पता लगाया गया, इन सारी बातों में 4-5 घंटे का वक्त बीत गया जिसके बाद पता चला कि वहाँ से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर उस लड़की का घर था। सूचना मिलने के बाद देर रात उसके पिता उसे लेने आए। पिता से पूछताछ पर उन्होंने कहा कि बच्ची मानसिक रूप से अस्वस्थ है, वहीं उस लड़की का कहना था कि उसके घर वाले उसे इलाज के लिए लेकर इतनी दूर आए थे लेकिन वे उसे छोड़कर कहीं चले गए।

The Logically से बात करते हुए आजाद पाण्डेय ने बताया कि जहां यह दुर्घटना घटी वहां से लगभग 100 मीटर की दूरी पर सीडब्ल्यूसी(CWC) का ऑफिस, लगभग 100 मीटर की दूरी पर बाल संरक्षण आयोग है, लेकिन किसी ने समय पर प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। अगर प्रशासन समय पर साथ देता तो वह ऑटो चालक भी पुलिस की गिरफ्त में होता। हर वर्ष सितंबर महीने में यूपी सरकार के द्वारा एक मुहिम चलाई जाती है जिसमें पूरे सितंबर महीने में एक कैंपेन के द्वारा बच्चों के साथ आ रही परेशानी जैसे- चाइल्ड लेबर, चाइल्ड बैगर्स या बच्चे जो कहीं भी, किसी भी कारण से अपना बचपन खो रहे तो उन्हें सुविधाजनक जीवन देने की कोशिश की जाती है। इस कैंपेन की शुरुआत हो चुकी थी और पूरे जिले को यह बात पता होते हुए भी प्रशासन की तरफ से ऐसी लापरवाही दिखाई गई अगर समय पर स्माइल ग्रुप ना आया होता तो वह बच्ची भी आज सुरक्षित ना होती।

अब तक ऐसी कई घटनाएं घट चुकी हैं जिसमें आजाद पाण्डेय ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से स्माइल ग्रुप के माध्यम से कई लोगों को एक बेहतर जिंदगी दी है। कई लोगों को उनकी अस्मिता बचाई है ! The Logically से बात करते हुए आजाद पाण्डेय जी ने बताया कि स्माइल टीम वर्ष 2012 से चाइल्ड बेगर्स के लिए काम करता आ रहा है, साथ ही वैसे व्यक्ति जो मानसिक रूप से अस्वस्थ है, सड़कों पर रहते हैं, फटे कपड़ों में घूमते रहते हैं, उन्हें भी अपने साथ रख उनका इलाज करवाती है! उसी स्माइल टीम के आज़ाद पाण्डेय और उनके साथी ने मिलकर उस बच्ची के साथ होने वाली बहुत बड़ी दुर्घटना से उसे बचा कर, उसे उन दरिंदों से आजाद कराया। वे कहते हैं “अगर हर व्यक्ति ऐसी दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए उस पर कुछ प्रतिक्रिया दिखाएं तो ऐसी ही कई बच्चियों के साथ दुर्घटना होने से रोका जा सकता है”!

आजाद पाण्डेय और उनकी टीम स्माईल प्रोटेक्शन ग्रूप के माध्यम से जिस तरह बुरे हालातों में फंसे लोगों के लिए कार्य करते हैं, घटना से पूर्व पहुँचकर उनकी जिंदगी और अस्मिता बचा रहे हैं वह सभी प्रेरणा रूपी प्रकाश पूंज है जिससे लोग सीख ले सकते हैं और मदद की आस जोह रहे लोगों की मदद कर सकते हैं ! The Logically आजाद पाण्डेय और उनके टीम के सदस्यों के बुलन्द हौसले और साहसिक कार्यों को नमन करता है !

Swati Singh
स्वाति सिंह BHU से जर्नलिज्म की पढ़ाई कर रही हैं। बिहार के छपरा से सम्बद्ध रखने वाली स्वाति, अपने लेखनी से समाज के सकारात्मक पहलुओं को दिखाने की कोशिश करती हैं।

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