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बैंक की नौकरी छोड़ शुरू किए खेती, बिहार के अभिषेक ऑर्गेनिक खेती से 20 लाख तक कमाते हैं

आज की पीढ़ि अच्छी नौकरी की चाह में अपनी मिट्टी से दूर होती जा रही है। मिट्टी हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाता है। हमारी संस्कृति में मिट्टी को माता के रूप में माना जाता है। इस बात के उदाहरण हैं अभिषेक आज हम इनके मिट्टी से लगाव और उसकी सेवा के बारे में जानेंगे।

अभिषेक (Abhishek)

अभिषेक औरंगाबाद (Aurangabad) के बरौली (Barauli) गाँव के रहने वाले हैं। 2007 में अभिषेक ने पुणे (pune) से मैनेजमेंट किया है। उसके बाद उन्हें HDFC बैंक में नौकरी मिल गई। उसमें उन्हें 7 लाख का पैकेज मिला। उस समय में 7लाख की बहुत कीमत होती थी। साल 2011 तक उनका पैकेज बढ़ कर 11 लाख तक हो गया। अभिषेक पुणे में बिहार के कुछ ऐसे लोगों से मिले जो पास जमीन रहते हुए भी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। उन्हें यह देख कर बहुत आश्चर्य हुआ।

अभिषेक को महाराष्ट्र के किसानो से मिली प्रेरणा

अभिषेक जब महाराष्ट्र (Maharashtra) गए तो उन्होंने फूल की खेती को बहुत करीब से देखा। उन्होंने देखा कि वो किसान अपने घर पे अपने गाँव में रह कर कमा रहे हैं और वो बहुत खुश भी थे। अभिषेक को उन्हें देख कर ये प्रेरणा मिली कि वो भी अपने गाँव में रह कर भी कमाई कर सकते हैं।

farmer Abhishek

अभिषेक ने की खेती की शुरूआत

उसके बाद अभिषेक अपने घर लौट आए। बिहार में रह कर उन्होंने खेती की शुरूआत करने का फैसला किया। उनके इस फैसला से उनका परिवार आश्चर्य में था। सिर्फ परिवार ही नहीं बल्कि गाँव वाले भी उनके इस फैसले से उनका मजाक उड़ा रहे थे और आश्चर्य हो भी क्यूं ना आखिर 11 लाख के पैकेज वाली नौकरी छोड़ खेती करने का फैसला है भी तो अद्भुत। लेकिन अभिषेक का फैसला तो निश्चित था। उन्होंने खेती करने से पहले कृषि विभाग से उसकी पूरी जानकारी हासिल की।

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अभिषेक ने लगाए औषधीय पौधे

अभिषेक ने परंपरागत खेती ना कर कुछ अलग करने का विचार किया। उन्होंने 8 कट्ठा खेत में औषधीय पौधे लगाए। उनमें जरबेर, लिमियम, जैसे पौधे हैं। अभिषेक को खेती में पहले ही वर्ष 4 लाख का मुनाफा हुआ। इससे उनका मनोबल और बढ़ गया और जो लोग उनका मजाक उड़ा रहे थे वो अब उनसे ही खेती के गुण सीख रहे हैं।

अभिषेक ने दिया औषधीय खेती की जानकारी

अभिषेक बताते हैं की औषधीय पौधों की खेती करना ज्यादा कठिन नहीं हैं। एक बार उसे लगाने के बाद 2-3 साल तक उसमें कुछ भी करना नहीं होता। यह पौधे मौसम की प्रहार को भी बहुत आसानी से झेल लेते हैं। अभिषेक ने बताया कि बिहार में जानवर भी फसल को बहुत बर्बाद करते हैं, परंतु वह औषधीय पौधे को नुकसान नहीं पहुँचाते हैं। इससे इस खेती में और भी ज्यादा लाभ होता है।

अभिषेक द्वारा फूलो की खेती

अभिषेक ना सिर्फ औषधीय बल्कि फूलो की भी खेती करते हैं। फूलो में वो सबसे ज्यादा रजनीगंधा की खेती करते हैं। अभिषेक ने बताया की एक हेक्टयर में फूलों की खेती करने में कम से कम 1.50 लाख की लागत लगती है। जिसमें 2 लाख फूल बल्ब तैयार होते हैं, जिसमें सालाना 5 लाख तक की कमाई होती है। अभिषेक ने औरंगाबाद कादम्बिनी फार्मर प्रोड्यूसर नामक एक कंपनी शुरू की।

अभिषेक को नरेंद्र मोदी द्वारा भी मिल चुका है सम्मान

अभिषेक के इस नेटवर्क से 2 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं। साल 2014 में अभिषेक को सर्वश्रेष्ठ किसान का पुरस्कार मिल चुका है। सिर्फ इतना हीं नहीं साल 2016 में अभिषेक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi) द्वारा कृषि रत्न पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।

The logically अभिषेक के इस अद्भुत कार्य की प्रशंसा करता है।

बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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