अच्छी और ताजी सब्जियां खाना किसे पसंद नहीं है, इसीलिए आज के समय में अधिकांश व्यक्तियों का खेती की तरफ रुख हो रहा है। कुछ जैविक विधि से खेती कर रहे हैं, तो कुछ हरड्रोपोनिक्स विधि से। हमारे देश के कुछ किसान अपने घरों में छत पर फल और सब्जियों को उगा रहें है तो कुछ गार्डन में। वहीं कुछ किसान ऐसे भी हैं जो जमीन लीज पर लेकर खेती करते हैं। यह बात सोलह आने सत्य है कि अगर किसी काम में मन लग जाए तो उसे छोड़ किसी और काम को करने का मन नहीं करता।

आज की यह कहानी मदुरई के एक ऐसे ही शख्स की है जो प्लॉटिंग टेरेस फार्म में कई प्रकार की सब्जियां लगा चुके हैं। या यूं कहें तो लगभग 20 से भी अधिक सब्जियों को लगाकर उनका लुत्फ उठा रहे हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने टमाटर और पत्तेदार सब्जियों को लगाया।

हरड्रोपोनिक्स विधि से करते हैं खेती

डीडी राजेश्वरण (DD Rajeshvaran) मदुरई (Madurai) के निवासी हैं। इन्होंने 2016 में मदुरई में पहली बार खेती की शुरुआत की। यह अपने शहर में प्रथम व्यक्ति थे जो हाइड्रोपोनिक विधि से खेती करते थे। हाइड्रोपोनिक्स विधि से की गई खेती में मिट्टी की जरूरत नहीं होती। पानी की मदद से पौधों को उगाया जाता है। उन्हें खेती बहुत पसंद है क्योंकि उन्हें लगता है कि वह खुद से कोई भी फसल उगा रहे हैं, फिर उसे तोड़कर खा रहे हैं। इनका मानना है कि हाइड्रोपोनिक विधि खेती की एक बेहतर तकनीक है। जिन लोगों के पास मिट्टी और उपजाऊ भूमि नहीं है वह इसका उपयोग कर खेती कर सकते हैं।

70 वर्षीय राजेश्वरन ने लगभग 40 साल पूर्व अपनी पत्नी की मदद से विश्व शांति नगर जहां उनका घर है उसकी छत पर हाइड्रोपोनिक्स ग्रीनहाउस का निर्माण कर, खेती करना शुरू किया। आज उनकी खेती बगीचे में तब्दील हो गयी हैं। वहां 20 तरह के फल और सब्जियों को उगा रहे हैं। इनका छत 800 वर्ग फीट का है।

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खूद का बिजनेस था

राजेश्वरण का सौर्य ऊर्जा उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक का बिजनेस था। लेकिन उन्होंने इस बिजनेस को छोड़कर फूड बिजनेस के बारे में सोचा और अपने शहर में कुछ रेस्टोरेंट का शुभारंभ किया। वह चाहते थे कि उनके रेस्टोरेंट में जिन सब्जियों और फलों का उपयोग होगा, वह खुद अपने तरीके से उगाएंगे। इसी दिलचस्पी के कारण उन्होंने खेती की तरफ रुख मोड़ा। फिर इन्होंने खेती के बारे में जानकारी इकट्ठी की। कुछ बीज मंगवाए और उन्हें खेतों में रोपा।

हाइड्रोपोनिक्स से किये खेती

खेती शुरू करने के लिए इन्होंने बहुत सारी जानकारी इकट्ठी करने के बाद इसकी शुरूआत कियें। उन्होंने इसके बारे में बताया कि पहले तो यह थोड़ा मुश्किल लगेगा लेकिन जब हम इस तरीके से साग सब्जियां उगाना शुरू कर देंगे तो फिर इसमें हमारा मन लगने लगेगा। शुरुआती दौर में उन्होंने बहुत मेहनत किया लेकिन उन्हें लगता था कि कहीं वह असफल ना हो जाए। लेकिन उनकी मेहनत वाकई सफल हुई और 4 महीने में उनके खेतों में फसल लगने लगे। लाल टमाटर देखने पर बहुत खुशी हुई।

अपनी यह सफलता देख उन्हें बहुत ही प्रसन्नता हुई। तब उन्होंने कुछ स्थानीय और वदेशी सब्जियों को लगाया। जैसे- पुदीना, पालक, शतावरी, भिंडी टमाटर, बींस। इतना ही नहीं वह 4 तरह के अन्य टमाटर भी उगाते हैं।

प्रयोगशाला में हुई तब्दील

रामेश्वरम ने अपना यह कार्य शौक से शुरू किया था लेकिन उनका यह ड्रीम प्रोजेक्ट बहुत ही जल्द प्रयोगशाला में तब्दील हो गया। यह बात सही है कि किसी भी काम करने से पहले हमें थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है वैसे ही इन्हें भी बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

15 अर्बन किसानों को दियें है ट्रैनिंग

राजेश्वरन ने लगभग 4 लाख रुपये खर्च कर अपनी NFT हरड्रोपोनिक्स सिस्टम का निर्माण किया हैं। जो किसान खेती में दिलचस्पी रखते हैं उन्हें बखूबी इस तरीके को बताते हैं। अब तक इन्होंने लगभग 15 लाख से अधिक किसानों को इस विधि का प्रशिक्षण दे चुके हैं। यह खेती कैसे करना है, किस वक्त आपको मिश्रण को मिलाकर सही तत्व को बनाना है और कब ट्यूबवेल की साफ सफाई करनी है। इन्हें अपनी खेती से अधिक मात्रा में लाभ हो रहा है।

The Logically राजेश्वरन को इनकी इस विधि से खेती करने और अन्य किसानों को इसके गुड़ सीखाने के लिए सलाम करता है।

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