Saturday, July 31, 2021

पद्मश्री विजेता डॉक्टर ने किया है पहला हार्ट सर्जरी, अब तक कर चुके है 46,000 से ज्यादा सर्जरी

इंसान अगर चाहे तो उम्र की बढ़ती गिनतियों के प्रभाव से सिमटती सीमाओं को लांघ सकता है। डॉ के एम चेरियन ने इस पंक्ति को अपने जीवन मे चरितार्थ किया है। 8 मार्च 1942 को जन्में डॉ के एम चेरियन 78 वर्ष के हो गए है लेकिन इनका नाम 46,000 से भी ज्यादा हार्ट से सर्जरी से जुड़ा है।

डॉ चेरियन का जन्म केरल के एक किशन परिवार में हुआ था। उन्होंने कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मणिपाल से स्नातक किया। उसके बाद वे FRACS के लिए ऑस्ट्रेलिया गए .
भारत के लोगो की सेवा और अपनी मिट्टी की चाह ने उन्हें एक करा कदम उठाने को प्रेरित किया। उन्होंने अमेरिका के सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के नौकरी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया । डॉ चेरियन ने 6 जून 1975 को स्वदेश लौटने के लिए अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के स्थाई नागरिकता प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया और भारत लौट आये।
उन दिनों ओपन हार्ट सर्जरी सिर्फ दिल्ली, मुंबई और वेल्लोर में थे जो कि पुरानी टेक्नोलॉजी के थे। अवसरों की कमी की वजह से डॉ चेरियन ने दक्षिणी रेलवे में सबसे छोटे कैडर के रूप में 1071 रूपय मशिक वेतन के लिए काम किया।

HEART SURGERY

यह भी पढ़े:-

महामारी में ये IAS अधिकारी फिर से डॉक्टर बन गई और जिले के लोगों की सेवा की: Dr.Akanksha Bhaskar

भारत आने के सातवे दिन ही उन्होंने काजा मोइदीन का ऑपरेशन किया जो कि कोच फैक्ट्री में ड्राफ्ट्समैन थे। अगले तीन दिनों में उन्हें ये पता चला कि उन्होंने भारत का पहला बायपास सर्जरी किया है।
लेकिन दुर्भाग्यवश 26 जून को पूरे भारतवर्ष में इमरजेंसी लागू कर दी गयी जिससे उनके बड़े नौकरी का सपना बेकार हो गया क्योंकि यूपीएससी की बहाली को रद्द कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने हर नही मानी और भारत मे अवसरों को तलाशते रहने का निश्चय किया।
अगले 13 साल तक रेलवेज में काम करने के बाद उन्होंने 1987 में स्वैच्छिक रीटायर्मेंट ली और मद्रास मेडिकल मिशन ने नाम से अपनी तरह का पहला सुपर स्पेसलिटी हॉस्पिटल शुरू किया। जिसके बाद “भारत मे पहले” की सूची लग गयी।

डॉ चेरियन ने
पहला आंतरिक स्तन धमनी ग्राफ्ट, बच्चों के हृदय संबंधी दोष में सुधार, मस्तिष्क मृत्यु पर कानून के बाद पहला हृदय प्रत्यारोपण, पहला बल हृदय प्रत्यारोपण, पहला फेफड़ा और हृदय प्रत्यारोपण और पहली बार महिला हृदय प्रत्यारोपण,जैसे बड़े सर्जरी को पूरा किया।

इन सभी सिर्जरी को पूरा करने के लोए कोई आधुनिक उपकरण उपलब्ध नही था। उस समय सारे उपकरण पुराने थे और कैथ लैब , इको मशीन, हेडलाइट या प्रोलीन जैसी आधुनिक उपकरन मौजूद नही थे।
आज भारत में हार्मोनल स्केलपेल जैसे आधुनिक उपकरण है तब से पिछले चार दशकों में हृदय रोगों की घटनाएं 4 गुना बढ़ गयी है।
डॉ चेरियन के अनुसार ये रोग ज्यादातर काम उम्र के लोगो मे पाया जा रहा है। ये विचलित करने वाले आकरे मुख्यरूप से बिगड़ती जीवन शैली, व्यायाम की कमी और जंक फूड के कारण जी। उच्च रक्त चाप और मधुमेह भी इसका कारण है।
वर्ष 1984 में डॉ चेरियन ने पहला बायलैटरल इंटरनल मम्मरी ग्राफ्ट परफॉर्म किया। जिसके लिए उन्हें 1991 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।