Friday, January 22, 2021

CA की नौकरी छोड़कर अनोखे तरह से कर रहे हैं खेती, साल भर की कमाई 50 लाख से भी अधिक है: राजीव बिट्टू

खेती करना और उसमें लगे रहना भी एक हुनर है। खेती से होने वाले अनुभव और मुनाफा को हमारे किसान बखूबी जानते हैं। किसान जानते हैं कि किस मौसम में किस तरह का फसल लगाए ताकि उपज अच्छी हो और उससे अधिक मुनाफा हो। हमारे देश के किसान बंजर पथरीली जमीन को भी उपजाऊ बनाएं हैं और उस ऊसर जमीन पर भी कई प्रकार के फसल उगा रहें हैं। जैविक खेती में उर्वरक का उपयोग किसान घर के कचरों, केंचुये, कीचन वेस्ट, और वर्मीकम्पोस्ट से तैयार करतें हैं। इन उर्वरक से उपजाये गयें सब्जीयां, फल हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इनको खाने से हमे बीमारियों से कम जूझना पड़ता है। यह कहानी एक ऐसे शख्स की है जो CA की नौकरी छोड़ खेती कर रहे हैं और उन्हें लाखों की आमदनी हो रही है।

राजीव बिट्टू का परिचय

राजीव का जन्म बिहार (Bihar) राज्य के एक जिला गोपालगंज (Gopalganj) में हुआ। इनका परिवार संयुक्त परिवार है। वह अपने बहनों और भाइयों के साथ रहें हैं। इन सब में यह सबसे बड़े हैं। राजीव के पिता बिहार सरकार के द्वारा निर्मित सिंचाई विभाग में इंजीनियर के रूप में कार्य कियें हैं। राजीव अपनी शुरुआती पढ़ाई बिहार में किये और आगे पढ़ने के लिए झारखंड चले गयें। राजीव हज़ारीबाग (Hazaribagh) के एक सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते थे। वहां की पढ़ाई संपन्न कर वह रांची चले गए और वहां पढ़ाई की। यह आईआईटी की तैयारी किये लेकिन यह उसमें असफल रहे। फिर इन्होंने बीकॉम में दाखिला रांची में लिया और उसी वर्ष CA के लिए भी एनरोलमेंट कराया। किसानों की मदद के लिए राजीव अब एक NGO भी चलाते हैं जिसका नाम “अंकुर रूरल एंड ट्राईबल डेवलपमेंट सोसाइटी” ( Ankur Rural And Trible Development Society) है।

Image credit-Gaon Connection

CA को छोड़ किया खेती की शुरुआत

राजीव बिट्टू (Rajiv Bittu) झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) में स्थित एक ब्लॉक (Block) ओरमांझी (Ormanjhi) में लीज पर खेती करने की शुरुआत कियें हैं। राजीव कॉमर्स से डीग्री हासिल करने के बाद CA (Chartered Accountant) बनें। लेकिन यह अपना करियर खेती में बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने खेती की शुरुआत करी और अब लीज पर खेती कर रहे हैं। इन्होंने किसानों के अहमियत को समझाने के लिए CA की नौकरी को ठुकराया और खेती करनी शुरू कर दी। इनका मानना है कि अगर हम खाना खाते हैं तो किसानों की मेहनत से ही। किसान गर्मी, ठंडी, बरसात, धूप-छांव नही देखते और हमारे लिए फूल, फल, सब्जियां और अनाज उगाते रहतें है।

2003 में कियें CA की पास परीक्षा

कॉमर्स से पढ़ाई के करने के बाद राजीव CA की तैयारी करने लगें और सफलता हासिल कर साल 2003 में CA बनें। इन्होंने एक किराया पर एक कमरा लिया जिसका मासिक फीस ₹5000 था। वह उस कमरे में रहने लगे और प्रैक्टिस करने लगे। तब इनका मासिक वेतन लगभग ₹40,000 हो गया था। साल 2009 में उन्होंने शादी रश्मि सहाय से की जो “प्लास्टिक इंजीनियर” है।

शुरू हुआ सफर खेती का

वर्ष 2013 में राजीव अपनी बेटी को लेकर बिहार के जिले गोपालगंज में आ गए। उनका गांव गोपालगंज जिले में स्थित है। जब उनकी बेटी यहां आई तो वह गांव के लोगों को बहुत पसंद करने लगी और उनके साथ बहुत खुश रहने लगी। एक अद्भुत नजारा हुआ जिसने राजीव को चौका दिया। राजीव की बेटी ने एक किसान के गोद में जाने से मना कर दिया क्योंकि वह उस किसान के कपड़ों में में लगी गंदगी से दूर रहना चाहती थी। उन्हें इस बात से जोर का झटका लगा इसी बात से उन्होंने तय किया कि वह भी खेती करेगे।

लीज पर लिया जमीन

खेती करने के लिए उन्होंने इससे जुड़ी हर एक छोटी-छोटी जानकारियां इकट्ठी की। उन्होंने कृषि विभाग में जा कर वहां के शिक्षकों से सलाह मांगी और तरीके भी पूछे कि किस तरह से कौन खेती करनी है। अगल-बगल के किसानों से भी उन्होंने छोटी सी छोटी जानकारी हासिल करी। जानकारी इकट्ठा करने के बाद उन्होंने खेती करने के लिए जमीन की तलाश की लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि खेती के लिए उनके पास जमीन नहीं था। उन्होंने यह तय किया कि वह रांची से 28 किलोमीटर दूर के गांव में एक किसान से उनकी उस जमीन लीज पर लेंगे और उसमें खेती करेंगे इसके लिए उन्होंने सारी कार्यवाही भी पूरी कर ली। सभी शर्त्तों और नियम के दौरान उसके सामने किसान ने अपनी 10 एकड़ जमीन राजीव को खेती के लिए दिया। लेकिन खेती से हुए लाभ में उसे 33 फीसदी का भागीदारी चाहिए इसके लिए राजीव ने हां बोल दिया और खेती करने लगे।

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जैविक तरीके से करते हैं खेती

राजीव ने जैविक खेती शुरू की और लगभग 2.50 लाख रुपए जैविक खेती के लिए खर्च किए। उन्होंने जैविक उर्वरक का उपयोग कर लगभग 7 एकड़ में खरबूज और तरबूज को उगाएं। लंबे समय और कठिन परिश्रम के बाद उनकी फसल सफलतापूर्वक तैयार हुए और उन्हें हुए उनकी फसलों की लाख 19 लाख रुपए की बिक्री भी हुई। 19 लाख में से उन्हें लगभग 7-8 लाख का मुनाफा हुआ राजीव का मनोबल बढ़ा और उन्होंने खेती के लिए अलग-अलग तरीके ढूंढने लगे और उन तरीकों को अपनाने लगे। इस सफलता के बाद उन्होंने अपने खेतों में लगभग 45 मजदूरों को रखा जो खेतों में काम करते हैं। आगे राजीव का लक्ष्य है कि वह कम-से-कम 1 करोड़ टर्नओवर की कमाई कर सके इसीलिए उन्होंने और जमनी 13 एकड़ लीज पर लिए और वहां भी खेती की शुरुआत किये। इनकी मेहनत रंग लाई और इसे खेत में उन्होंने 2016 में 40 से 50 लाख का व्यवसाय किया।

3 एकड़ जमीन लीज पर ली

जैसे-जैसे उन्हें मुनाफा हुआ उन्होंने कुचू गांव में लीज पर और 3 एकड़ जमीन ली और उनमें सब्जियां उगा रहे हैं। जैसे राजीव का लक्ष्य सालाना टर्नओवर 1 करोड़ का हो गया है। इसके लिए कभी-कभी उन्हें इस बात की बहुत चिंता रहती है कि अगर इलाका सूखाग्रस्त हुआ या ज्यादा बारिश के कारण बाढ़ आया तो दोनों ही स्थिति में घाटा होगा।

दोस्त करते हैं मदद

राजीव की खेती में उनके दो दोस्त भी मदद करते हैं। उनमें से एक हैं 37 वर्षीय देवराज (Devraj) और दूसरे 33 वर्षीय शिवकुमार (Shiv Kumar)। देखा जाए तो ये 32 एकड़ की खेती करने में लगे हैं। इस खेती को वह ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग की मदद से कर रहे हैं। इस खेती से लगभग वाह लाख का फायदा कमा लेते हैं।

एक CA होने के बावजूद इन्होंने यह नौकरी छोड़ अपनी गांव की भूमि और किसानों को महत्व दिया। इसके लिए The Logically इन्हें सहृदय नमन करता है और उम्मीद करता है कि इनके ज़िंदगी से सभी को प्रेरणा भी मिलेगी।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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