इन्सान के जीवन में कई ऐसे घटनाएं होती है जिसकी उसने पहले कोई कल्पना भी नहीं की रहती। इन्सान के जीवन में हुए हादसे का परिणाम ऐसा भी होता है जिसमे मनुष्य की पूरी जिंदगी ही बदल जाती है। कुछ घटनाओं से मनुष्य सीख लेता हैं या फिर कुछ हादसे ऐसे असहनीय होते है जिससे मनुष्य की पूरा जीवन ही अपना रास्ता बदल लेती हैं। वह कुछ ऐसा करने लगता हैं जिसके बारें में कभी विचार भी मन में नहीं आया होता है।

आज हम आपको ऐसे ही एक शख्स के बारें में बताने जा रहें हैं जिन्होनें अपने जीवन में हुए हादसो से अपने आप को पूरी तरह बदल के रख दिया। उनके साथ जो हुआ वह किसी दुसरे मनुष्य के साथ न हो इसी काम में वह अपना जीवन व्यतीत कर रहें हैं। आईये जानतें हैं उनके जीवन की कहानी।

गंगाराम (Gangaram) अपने परिवार के साथ बहुत खुश थे। वह ईलेक्ट्रॉनिक के दुकान पर इलेक्ट्रानिक के खराब सामानों को ठीक करने का काम करते थे और इसी से अपना रोजी रोटी चलाते थे। कहा जाता है न कि हमारे जीवन में कब क्या हो जाए यह कोई नहीं जानता। जिंदगी कभी भी अपना रुख मोड़ सकती है। गंगाराम के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी किस्मत ने भी अपना रंग बदल लिया और गंगाराम को जीवन के राह में बिल्कुल अकेला कर दिया। एक दिन सड़क घटना में उनके बेटे की मौत हो गयी। उनका बेटा उनसे हमेशा-हमेशा के लिए छिन गया। बेटे को छीनने के बाद भी कुदरत का मन नहीं भरा तो उसने गंगाराम से उनकी पत्नी को भी हमेशा के लिए दूर कर दिया। दूसरे सड़क हादसे में गंगाराम की पत्नी की भी मृत्यु हो गयी। ऐसे में गंगाराम के ऊपर जैसे दुखों का बहुत बड़ा पहाड़ टुट पड़ा हो।

अपने परिवार को खोने के बाद उस घटना से गंगाराम की भी जिंदगी ने रुख मोड़ लिया। बेटे और पत्नी की सड़क हादसे में मौत से गंगाराम ने सीख लेकर, किसी दूसरे व्यक्ति के साथ यह हादसा न हो इसके लिए प्रण किया कि जब तक शरीर में जान रहेगी, तब तक वह अपने क्षेत्र में ट्रैफिक (Traffic) को सम्भालने का काम करेंगे।

गंगाराम (Gangaram) प्रतिदिन ट्रैफिक पुलिस की वर्दी पहनकर सुबह के 9 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक दिल्ली (Delhi) के सिलमपुर लाल बत्ती चौराहे पर ट्रैफिक कंट्रोल करते हैं। सिलमपुर लाल बत्ती (चौराहे) पर कोई हादसा ऐसा न हो जिसके कारण किसी को अपना परिवार खोना पड़े। इसलिए ट्रैफिकिंग को वह ख़ुद नियंत्रित करने का काम करते हैं।

हम अक्सर आते-जाते दिल्ली (Delhi) के सड़को पर बहुत सारे ट्रैफिक कंट्रोलर को देखते हैं लेकिन जैसे ही हम सिलमपुर लाल बत्ती (Silampur Laal Batti) से गुजरते हैं तो वहां एक वृद्ध ट्रैफिक पुलिस की वर्दी पहने हुए हाथ में एक स्टिक लेकर वहां लोगों और गाड़ियों को दिशा देते हुए नज़र आते हैं। यह वृद्ध दूसरा और कोई नहीं बल्कि स्वयं गंगाराम हैं जो 32 साल से बिना किसी तन्ख्वाह के काम कर रहे हैं। उनके इस काम के लिए बहुत सारे लोग उनकी तारिफ करतें हैं। उनको बधाई भी देते है। गंगाराम को कई लोग उपहार देने की कोशिश करतें हैं परंतु गंगाराम तोहफा को लेने से मना कर देते हैं। वह बिना किसी लालच के सिलमपुर लाल बत्ती (Silampur Laal Batti) पर ट्रैफिकिंग करते हैं ताकी सबका जीवन सुरक्षित और सुखमय रहें।

वर्तमान में कोरोना (Corona) ने ऐसा कहर ढाह रखा है जिसमे सभी को अपने घरों में रहने की सलाह दी जा रही हैं। कोरोना बिमारी ना हो इस डर से सभी अपने-अपने घरों में हैं लेकिन गंगाराम अभी भी उस चौराहे पर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। पुलिस ने गंगाराम (Gangaraam) को इस काम को करने के लिए कई मेडल देकर उन्हें सम्मानित भी किया हैं। प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26जनवरी) के मौके पर गंगाराम को बहुत सारी संस्थाएं उनके नेक काम को करने के लिए सम्मानित करती हैं।

Gnagaram के नेक काम और लोगों की मदद करने के लिए The Logically उनको सलाम करता है।

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