पिछले 4 वर्षों में मुंबई के इस ऑटो ड्राइवर ने लगाए हज़ारों पेड़, पौधा संरक्षण के लिए ऑटो में ले कर चलते हैं पानी

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Sadbhawna hara bhara foundation

हम अपने जिंदगी में अनेकों प्रेरणा भरे लोगों से मिलते हैं जो अपने कार्यों से आम मानस को सम्मोहित कर देते हैं । हम अपने दैनिक जिंदगी में इतना व्यस्त हो चुके हैं कि हम अपने आसपास होने वाले बुराइयों और अवगुणों को बहुत आसानी से नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो इन कमियों को दूर करने के लिए अपनी व्यस्त जिंदगी से समय निकालकर अथक प्रयास करते हैं जो उल्लेखनीय और प्रशंसनीय होता है।
हाल ही में हमने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया लेकिन, पर्यावरण से उत्पन्न हो रहे चुनौतियां को शायद ही हम एक गंभीर समस्या की तरह समझ कर कार्य करते हैं । दिन प्रतिदिन पर्यावरण को अनदेखा करने के कारण शहरों में वायु की अशुद्धता बढ़ती जा रही है और हम अक्सर अत्यधिक गर्मी और बाढ़ जैसी समस्याओं से घिर जाते हैं । लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसे इंसान हैं जो अपने अपने अद्वितीय कार्य से समाज के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन कर उभड़ते हैं ।

Purushotamlal gupta

मुंबई के पुरुषोत्तमलाल गुप्ता पेशे से एक ऑटो ड्राइवर हैं जो अपने परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को चलाने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं, लेकिन पुरुषोत्तमलाल गुप्ता अपने दैनिक कार्य से समय निकालकर पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कार्य करते हैं, जो काबिले तारीफ है । पुरुषोत्तमलाल गुप्ता हर वीकेंड को पर्यावरण संरक्षण का कार्य करते हैं जिसमें वह पौधों में पानी डालने के साथ ही पौधरोपण का मुहिम चलाते हैं । 2016 में शुरू हुई इस मुहिम के सफर को आगे बढ़ाते हुए पुरुषोत्तम लाल गुप्ता ने अभी तक लगभग 2000 नए पौधे लगाए हैं और साथ ही हजारों पौधों को सींचते आ रहे हैं




कौन हैं पुरुषोत्तमलाल गुप्ता
पुरुषोत्तम लाल गुप्ता मूल रूप से प्रयागराज के निवासी हैं, जिन्होंने इंटर तक पढ़ाई करने के बाद घर परिवार का खर्च उठाने के लिए नौकरी करने का निश्चय किया । 2006 में पुरुषोत्तम लाल मुंबई में ऑटो चलाने का काम करने लगे । किराए के मकान में रहने के साथ ही अपने परिवार का खर्च उठाने के लिए पुरुषोत्तम लाल गुप्ता दिन रात मेहनत करते हैं ताकि वह अपने परिवार की परवरिश अच्छे तरह से कर पाएं और अपने बच्चे को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकें।

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कैसे हुई पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत
The Logically से बात करते समय पुरुषोत्तमलाल गुप्ता ने बताया कि ऑटो चलाने वाले लोगों को समाज बहुत ही हीन दृष्टि से देखता है और इन्हें कभी भी सम्मान नहीं मिल पाता। यहां तक की बीच सड़क या चौराहे पर अपनी गलती का गुस्सा भी लोग ऑटो ड्राइवर पर निकालने में नही सँकोचते हैं और उन्हें पीट देते हैं। पुरुषोत्तमलाल बताते हैं कि ऐसी ही कुछ घटनाएं उनके साथ भी हुई जहां लोगों ने हमसे कुछ पूछने की बजाय हाथ चलाना वाज़िब समझा । यह सब देख कर पुरुषोत्तमलाल ने सोचा कि हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे समाज में एक बेहतर संदेश जाए और ऑटो चलाने वालों के प्रति समाज का नजरिया बदलें।




शुरुआती दिनों में पुरुषोत्तमलाल अपने ऑटो में पानी रखते थे और जहां भी इन्हें सूखे पेड़ दिखाई देता था वहां रुक कर उस पेड़ को पानी देते थे। यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा, तब पुरुषोत्तमलाल ने अपने नए कार्य के बारे में साथियों को अवगत कराया जिससे बहुत लोग जुड़ने के लिए आगे आये ।

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सद् भावना हरा-भरा फाउंडेशन की शुरुआत
आगे चलकर इस मुहिम का नाम सद् भावना हरा-भरा फाउंडेशन‘ रखा गया और इस मुहिम के तहत अनेकों कार्य शुरू किये गए । इस मुहिम के अंतर्गत स्कूल और कोचिंग के बच्चों को नए पौधे दिए जाने लगे जिससे बच्चों को पर्यावरण के प्रति आकर्षित किया जा सके,पुरुषोत्तम लाल बताते हैं कि इनके कार्य से प्रेरित होकर आदर्श मित्रों की मंडली ने भी हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया और यह काफिला आगे बढ़ता गया।
एजुकेशन प्लस क्लासेज के संचालक रविंद्र प्रजापति हर रविवार को अपने शिक्षक, छात्रों और परिवार के सदस्यों की टीम लेकर पौधारोपण के लिए आते हैं। इनकी पूरी टीम शारीरिक श्रम करती है। पौधों को जमीन में लगाने से लेकर पानी देने तक में इनका सहयोग मिलता है। राम क्लासेज के संचालक रामप्रीत यादव और उनके सहयोगियों का कार्य भी बेहतरीन है। ये लोग हर वक्त पर्यावरण सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। पुरूषोत्तम बताते हैं कि उनकी टीम के प्रमुख सदस्य और सलाहकार विभूति प्रकाशन से कुंवर राकेश सिंह तोमर हैं। वह एक बेहतरीन मार्गदर्शक हैं। टाटा कंसल्टेंसी में जॉब करने वाले चंद्रशेखर ओझा भी शुरू से ही अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं। सोशल यूथ फाउंडेशन के सदस्य भी उन्हें नियमित पौधारोपण में सहयोग देते हैं।

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ठाणे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से भी मिली मदद

इस मुहिम की सफलता को देखते हुए थाने म्युन्सिपल कॉरपोरेशन की तरफ से सद् भावना हरा-भरा फाउंडेशन” को पौधा मिलने लगा, जिन पौधों को आगे चलकर स्कूल और कोचिंग के बच्चों में बाटा जाता था, और इन पौधों के साथ ही पुरुषोतमलाल अपने पैसों से भी पौधा खरीदकर लगाते रहे।
2016 में शुरू की गई इस मुहिम से 4 वर्षों में अनेकों लोग जुड़े और हजारों पौधे लगाए गए। हर शनिवार और रविवार चलने वाली यह मुहिम अब ध्यानाकर्षण का एक नया केंद्र बन चुकी है जिसके जरिए लोग जुड़कर काफी अच्छा महसूस करते हैं और अपना योगदान देते हैं।




इस मुहिम के साथ ही पुरुषोत्तमलाल गुप्ता ने प्लास्टिक कम करने का एक नया तरीका निकाला, वह कोचिंग और स्कूल में जाकर बच्चों से मिलते थे और उन्हें घर के बेकार प्लास्टिक और पॉलिथीन को जमा करने का आग्रह करते थे जिसे आगे चलकर रीसायकल के लिए एक छोटी कम्पनी को दिया जाता था । इस तरह कुछ दिनों में ही पुरुषोत्तम लाल गुप्ता ने लगभग 450 किलो प्लास्टिक इकट्ठा कर उसको रीसाइक्लिंग के लिए एक कंपनी को सौंप दिया।
इस तरह के अनेकों कार्यों से पुरुषोत्तम लाल गुप्ता ने न केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य किया बल्कि समाज को एक बेहतर संदेश देने के लिए पुरजोर प्रयास भी किया। पिछले 4 सालों में इनके द्वारा किया गया कार्य काफी प्रशंसनीय और अनुकरणीय है।

The Logically अपने पाठकों से आग्रह करता है कि अपनी जिंदगी में मिलने वाले हर इंसान को सम्मान देने की कोशिश करें और साथ ही इस तरह की मुहिम से जुड़ कर अपनी सामाजिक भागीदारी को सुनिश्चित करें।

The Logically पुरुषोत्तमलाल गुप्ता के कार्य को नमन करते हुए उन्हें और उनके परिवार को एक बेहतर भविष्य की शुभकामनाएं देता है

Prakash Pandey is an enthusiastic personality . He personally believes to change the scenario of world through education. Coming from a remote village of Bihar , he loves stories of rural India. He believes , story can bring a positive impact on any human being , thus he puts tremendous effort to bring positivity through logically.

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