Friday, January 22, 2021

कभी पैसे के अभाव में खुद स्कूल छोड़ना पड़ा, आज सैकडों जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं

शिक्षा की महत्ता को कदम-कदम पर महसूस किया जा सकता है, देखा जा सकता है। शिक्षा एक प्रकाशपूंज की भांति है जो जिंदगी को प्रकाशमान करती है। शिक्षा के प्रसार के बीच देश में लाखों ऐसे बच्चे हैं जो गरीबी और सुविधा ना मिल पाने के कारण शिक्षा से दूर रह जाते हैं। वे बच्चे भी पढ़ना चाहते हैं, उनके पास भी सपने होते हैं लेकिन मजबूरन उन्हें शिक्षा से दूर रह जाना पड़ता है।आज बात एक ऐसे शख्स की जिन्होंने उन बच्चों में शिक्षा संचार की जिम्मेवारी ली जिनके लिए शिक्षा ग्रहण करना बहुत दूर की बात है। आईए जानते हैं उन बच्चों की नाउम्मीदी में उम्मीद की किरण जगाने वाले और शिक्षा की ज्योत जलाकर उन्हें शिक्षित करने वाले रवि विश्नोई की कहानी….

हरि विश्नोई उत्तरप्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले हैं। ये पिछले दो वर्षों से “शिक्षा सेतु” मिशन चलाकर ऐसे ही बच्चों की शिक्षा पूरी करवाने की कोशिश में लगे हैं। वैसे तो हरि विश्नोई यूपी के गन्ना विकास विभाग में कार्यरत थे, लेकिन उन्होंने अपने रिटायरमेंट के बाद अपना समय इस नेक काम में लगाने का सोचा और जुट गए ऐसे बच्चों की तलाश में जो पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन पढ़ नहीं पाते हैं।

खुद के संघर्ष से मिली बच्चों को पढ़ाने की प्रेरणा

रवि विश्नोई जी की बचपन की पढ़ाई बहुत हीं अभाव में हुई। बताते हैं कि जब वे कक्षा 6 में थे तो स्कूल की फीस नहीं जमा करने पर उनका नाम काटकर हटा दिया गया था। उस वक्त स्कूल की फीस महज 25 पैसे थी। उन्होंने संघर्ष जारी रखा और परिस्थितियों से जूझते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की और फलस्वरूप अच्छी खासी नौकरी भी पाई। लेकिन उनके मन में हमेशा यह बात कौंधती रहती थी कि वैसे बच्चे जो ऐसे ही किसी कारण से या तो पढ़ाई कर नहीं पाते या अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं, आखिर वे कैसे शिक्षित हो पाएंगे। रवि जी उन बच्चों के लिए कुछ करना चाहते थे। वर्ष 2014 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने मित्र महेश रस्तोगी से कहा कि- “मुझे अपने जीवन काल में इतना पैसा तो ज़रूर जमा करना है कि उसके ब्याज से कम से कम दो बच्चे पढ़ सके।


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शिक्षा सेतु मिशन की शुरुआत

रवि विश्नोई जी ने शिक्षा सेतु मिशन की शुरुआत की जिसमें अनाथ, जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उन्होंने लेनी शुरू की। जिसके लिए इन्होंने एक कॉलेज “बाल्यराम बलभूषण शरण इंटर कॉलेज” के साथ एक साझा कार्यक्रम तय किया। उस कॉलेज में नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। विश्नोई जी बताते हैं कि वहां के शिक्षक क्लर्क और प्रिंसिपल से वे जुड़े हुए हैं और किसी छात्र का नाम यदि फीस की वजह से उस कॉलेज से कटने वाला हो तो वे तुरंत विश्नोई जी से संपर्क कर उन्हें यह जानकारी देते हैं। फिर शिक्षा सेतू इस काम के लिए आगे आती है।

शिक्षा सेतु के माध्यम से ऐसे करते हैं काम

विश्नोई जी बताते हैं कि बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी जब हम लेते हैं तो शुरुआत कॉलेज से करते हैं कि उस बच्चे की फीस में छूट दी जाए। फिर उस बच्चे के माता-पिता से संपर्क करते हैं कि उनसे जो भी बन सके 50 रुपये या 100 रुपए वह उसमें दें और फिर शिक्षा सेतु बचे हुए फीस में अपना सहयोग देती है, जो भी उनसे बन सके। फिर भी फीस बाकी रह जाए तो किसी और की मदद लेते हैं। साथ ही वे बच्चों से एक फॉर्म भी भरवाते हैं। जिसमें उनके सारे डिटेल होते हैं और संकल्प भी करवाते हैं। जिसमें चार संकल्प होते हैं-
(i) मैं राष्ट्र को सर्वोपरि मानूंगा/मानूंगी
(ii) पर्यावरण की रक्षा करूंगा/करूंगी
(iii) निरव्यस्नी रहूंगा/रहूंगी
(iv) जब मैं कमाने योग्य हो जाऊंगा/जाऊंगी तो कम से कम 2 जरूरतमंद बच्चों को ऐसे ही पढ़ा कर अपना ऋण चुकता करूंगा/करूंगी।
ऐसा इसलिए ताकि ये शिक्षा सेतु की सेतू ऐसे हीं बनी रहे और ये चेन आगे बढ़ते रहे।

आरटीई, नि:शुल्क पढ़ाई और प्रशिक्षण से कर रहे हैं शिक्षा संचार

वे राइट टू एडुकेशन (RTE) के तहत भी बच्चों का रेजिस्ट्रेशन करवा उनकी पढ़ाई करवाते हैं। जिससे उस जरूरतमंद बच्चे को किसी प्राइवेट स्कूल में दाखिला मिल जाता है और नर्सरी से आठवीं तक की फीस माफ रहती है। साथ ही अगर बच्चा मेधावी है तो उसे नवोदय विद्यालय की तैयारी भी करवाते हैं ताकि उसकी 12वीं तक की पढ़ाई बिना शुल्क के हो सके। जिसमें वे बच्चों को किताबें देते हैं और कुछ शिक्षक फ्री कोचिंग क्लास चलाते हैं। साथ ही वे सरकारी योजनाओं का भी लाभ इन बच्चों को दिलवाते हैं। यूं तो सरकार की तरफ से बहुत सारी योजनाएं, कॉलरशिप आती रहती हैं। लेकिन जो बच्चे पढ़ तक नहीं पाते उन्हें इन योजनाओं की भी खबर नहीं होती है, तो शिक्षा सेतु उन्हें इन योजनाओं तक भी पहुंच जाता है। और 12वीं की पढ़ाई के बाद लीड बैंक से रोजगार की ट्रेनिंग भी दिलवाते हैं ताकि वे बच्चे रोजगार लेकर अपनी आगे की भी पढ़ाई कर सकें।

दूसरों को भी करते हैं प्रेरित

विश्नोई जी ने इस काम के लिए कभी किसी से डोनेशन नहीं मांगा बल्कि जिन्हें उनका काम पसंद आया वे खुद मदद के लिए आगे आए और उनसे भी वे पैसे खुद ना लेकर यह कहते हैं कि या तो आप विद्यालय जाकर किसी बच्चे की फीस में यह पैसा लगाएं या फिर किसी किताब या ड्रेस के दुकानदार से साझा कर उन्हें चेक दे दें। हमेशा लोगों से बात कर और जिन बच्चों को वे पढ़ा रहे उन्हें भी शिक्षा संचार के इस सेतु को आगे भी बरकरार और बढ़ाने हेतु प्रेरित करते रहते हैं।

एक समूह बनाकर करते हैं शिक्षा संचार का कार्य

विश्नोई जी बताते हैं कि जब उन्होंने इसकी शुरुआत की थी तब वे सिर्फ दो लोग थे धीरे-धीरे 2 से 10 हुए, 15 हुए और आज लगभग 40 लोगों का एक व्हाट्सएप ग्रुप है जो इस काम में लगे हुए हैं। और इन 2 सालों में इन्होंने ऐसे ही लगभग 200 बच्चों को उनकी शिक्षा दिलाई है। अगर ये बच्चे भी किसी ऐसे ही बच्चों को शिक्षा दिलवातें हैं तो यह शिक्षा सेतु की गाड़ी कभी नहीं रुकेगी। और ये सेतु और भी लंबी होती जाएगी।

गरीब और असुविधा के कारण जो बच्चे अशिक्षा के अंधेरे में खो जाते हैं उनके लिए रवि विश्नोई किसी जगमगाती किरण से कम नहीं जो हमेशा वैसे बच्चों को शिक्षित करने हेतु तत्पर रहते हैं। The Logically रवि विश्नोई जी के प्रयासों की खूब सराहना करता है।

Vinayak Suman
Vinayak is a true sense of humanity. Hailing from Bihar , he did his education from government institution. He loves to work on community issues like education and environment. He looks 'Stories' as source of enlightened and energy. Through his positive writings , he is bringing stories of all super heroes who are changing society.

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