Sunday, December 10, 2023

इंजीनीयरिंग और MBA करने के बाद कर रहे हैं एलोवेरा की खेती, कमाई है करोडों में: पूरा तरीका पढ़ें

एलोवेरा की खेती मतलब किसान की कमाई निश्चित है। दिन प्रतिदिन आयुर्वेद का प्रचलन बढ़ते जा रहा है जिसके कारण आयुर्वेद की मांग बढ गईं है। देखा जाये तो पिछ्ले कुछ वर्षों से एलोवेरा के उत्पाद की संख्या अत्यधिक तेजी से बढ़ी है। कॉस्मेटिक, ब्यूटी प्रोडक्ट, खाने-पीने के हर्बल प्रोडक्ट बाज़ार में इन सब की डिमांड बहुत तेजी से बढ रही है। अब तो एलोवेरा की मांग टेक्सटाइल उद्योग में भी तेजी बढ गईं है। देश में लोगों का रुझान कृषि के तरफ तेजी से बढ रहा हैं। देश के प्रधान-मंत्री भी कृषि कार्य पर जोर दे रहे है।

एलोवेरा के बढ़ते मांग को देखते हुए इसके प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिये लखनऊ के सीमैप में पिछ्ले दिनों देशभर के युवाओं को भी ट्रेनिंग दी गईं।

आइये समझते है एलोवेरा के फायदे और खेती करने के तरीके।

केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में ट्रेनिंग देने वाले प्रमुख वैज्ञानिक सुदिप टंडन ने बताया कि एलोवेरा के बढ़ते डिमांड किसानों के लिये बहुत मुनाफे का सौदा है। एलोवेरा की खेती कर और इसके उत्पाद बनाकर दोनों तरह से बहुत अच्छी आमदनी किया जा सकता है।

सुदिप टन्डन ने इसकी पूरी प्रक्रिया के बारें में बल्कि वैसे किसानों के बारें में बताया जिसने एलोवेरा की खेती कर के काफी फायदे कमा रहें हैं। उन्होनें यह भी कहा कि किसानों को कंट्रैक्ट खेती करने की कोशिश करनी चाहिए और इसके साथ ही एलोवेरा के पत्तियों के बजाय उसके पल्प बेचने चाहिए।

हरसुख भाई पटेल पिछ्ले लगभग 25 वर्षों से गुजरात के राजकोट में एलोवेरा और दूसरी औषधीय फसलों की खेती कर रहें हैं। उनकी उम्र लगभग 60 वर्ष है। उनका कहना है कि, “एक एकड़ में एलोवेरा की खेती से बहुत आसानी से 5 से 7 लाख रुपये कमाए जा सकतें है। उन्होंने बताया कि शुरुआत के दिनों में उन्होनें पत्तियां बेची लेकिन उसके बाद उन्होंने पल्प बेचना शुरु किया। वर्तमान में हरसुख पटेल का बाबा रामदेव के पतंजलि से कंट्रैक्ट हुआ है और पतंजलि के द्वारा प्रतिदिन 5000 किलो पल्प का ऑर्डर मिलता है। उन्होने आगे बताया कि यदि किसान सक्रिय हो तो एलोवेरा के पत्तियों के बजाय पल्प को निकालकर बेचना चाहिए। क्यूंकि पत्तियां 5 से 7 रुपए प्रति किलो के भाव में बिक्री होती है लेकिन पल्प 20 से 30 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकता है।


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आंचल जिंदल बेंगलुरु की रहने वाली है। इन्होनें इंजीनियरिंग के बाद कई वर्षों तक आईटी क्षेत्र के बड़ी कम्पनियों में काम कर चुकी है। एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिये 4 दिन के विशेष ट्रेनिंग करने सीमैप गईं थी। इनका कहना है कि, एलोवेरा एक जादू से भरपुर पौधा है। एलोवेरा का प्रयोग लगभग सभी चीजों में हो रहा है। इसलिए इसके कारोबार में काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि वह बेंगलुरु से उत्तरप्रदेश के बरेली में शिफ्ट हो गईं है। इसलिए वहां ही एलोवेरा के उद्योग लगाने के लिये कोशिश कर रही है।

एलोवेरा प्रोसेसिंग ट्रेनिंग का पूरा वीडियो देखें।

यदि कोई एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहता है तो उनके लिये केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान कुछ-कुछ महिनों के अंतराल पर ट्रेनिंग कराता है। इसके लिये ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। तय की गई फीस के बाद एलोवेरा के लिये ट्रेनिंग लिया जा सकता है। 18 से 21 जुलाई तक चली 4 दिवसीय एलोवेरा प्रोसेसिंग यूनिट के प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, पंजाब, गुजरात, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और राज्स्थान से कुल 23 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इसे ऊपर के विडियो में देखा जा सकता है।

इंजीनियरिंग और MBA करने वाले युवाओं का भी नौकरी करने के बजाय कृषि के तरफ ज्यादा रुझान बढ़ रहा है और वे खेती कर रहें हैं। मदन कुमार शर्मा ग्रेटर नोयडा के गलगोटिया इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर है। इनकी उम्र 35 वर्ष है। इन्होनें 4 एकड़ में पतंजलि से कंट्रैक्ट कर अपने गांव में एलोवेरा का पौधा लगाया है। इसके बाद अब वह प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की कोशिश में लगे हुयें है। मदन कुमार शर्मा का कहना है कि अभी तक उनके घर में धान, गेंहू और आलू की फसलों को उगाया जाता था। लेकिन उन्होंने सोचा कि कुछ ज्यादा फायदे वाला करना चाहिए। इसके लिये उन्होंने राज्स्थान से से पौधा मंगवाकर एलोवेरा की खेती शुरु की।

Photo source Gaon Connection

एलोवेरा के खेती के बारें में कुछ महत्वपूर्ण बातें।

  1. एलोवेरा का इस्तेमाल हेल्थकेयर, कॉस्मेटिक और टेक्सटाइल में भी उपयोग हो रहा है।
  2. एलोवेरा का उपयोग सबसे अधिक हर्बल दवाईयां बनाने वाली कंपनीयों में होता है।
  3. कंट्रैक्ट फार्मिंग के द्वारा एलोवेरा की खेती करने से किसानों के लिये फायदेमंद है।
  4. एलोवेरा के लिये बड़ी कम्पनियां पतंजलि, डाबर, बैद्यनाथ और रिलांयस हैं।
  5. एलोवेरा का पल्प निकालने और प्रोडक्ट बनाने के लिये प्रोसेसिंग यूनिट लगाया जा सकता है।
  6. एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिये सीमैप में प्रशिक्षण दिया जाता है।
  7. पल्प निकालकर बेचने पर किसानों को 4 से 5 गुना अधिक मुनाफा होता है।
  8. इसका रोजगार शुरु करने के लिये जिले के FCCI क्षे लाइसेंस लेकर इसकी शुरुआत किया जा सकता है।
  9. एक एकड़ जमीन पर 16 हजार पौधें लगते हैं।

एलोवेरा की खेती करने के लिये निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए।

  1. खेती का आरंभ कम्पनियों से कंट्रैक्ट कर के ही करना चाहिए। 2.जलभराव वाले क्षेत्रों में इसकी खेती नहीं करना चाहिए।
  2. विशेषज्ञ 8 से 18 महिनों में पहली बार कटाई करने की सलाह देते हैं।
  3. एलोवेरा की कटी पत्तियों को 4 से 5 घण्टों के अन्दर प्रोसेसिंग यूनिट के पास पहुंचा जाना चाहिए।

The Logically सीमैप को एलोवेरा की खेती के बारें में प्रशिक्षण देने के लिये धन्यवाद देता है।