Monday, March 8, 2021

लॉकडाउन मे रेखा यादव महिलाओं को बना रही हैं आत्मनिर्भर, अभी तक 3000 महिलाओं को मिले फायदे

अँधेरी रात के बाद फिर सुबह होगी।हमेशा याद रखो यह समय हमेशा नहीं रहेगा जल्द ही दुःख के बादल दूर होंगे और जीवन में सुख के पल आएंगे पर आपको इस समय खुद को अधिक व्यस्त रखना होगा इससे दो फायदे होंगे एक  तो आप दुःख से दूर रहोगे दूसरा आप कुछ न कुछ सीखेंगे ही वक़्त हमेशा नईं सीख देता। बिल्कुल वैसे ही जैस रेखा यादव जी ने किया है लॉकडाउन में जहां सभी लोग घर में व्यस्त थे एक दूसरे से दूरी बनाए हुए थे वही रेखा यादव जी ने घर बैठे हुए महिलाओं के लिए कार्य करने की एक नई पहल की और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया रेखा यादव अपने प्रयासों से महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही है रेखा यादव संस्थापक है वुमनियाज़ की। रेखा यादव एक सशक्त मजबूत इरादों वाली आत्मनिर्भर महिला है लॉकडाउन में यहां सभी की जिंदगी पूरी तरीके से रुक गई थी और महिला से किचन तक सीमित होकर रह गई थी वही सभी लोग अपनी अपनी हॉबी पर काम कर रहे थे जहां बचपन में हम पेंटिंग किया करते थे वही पेंटिंग ना जाने कितने सालों बाद फिर से की सब लोग अपनी अपनी हॉबी पर काम कर रहे थे पर महिलाएं थी सिर्फ और सिर्फ किचन में बिजी। यहां तक कि उनका सुबह से लेकर शाम तक काम और बढ गया था वह पहले से ज्यादा बिजी हो गई थी तो उन्होंने सोचा क्यों ना महिलाओं के लिए कुछ काम किया जाए और उनकी क्रिएटिविटी को बाहर लाया जाए उनकी इसी सोच और मजबूत इरादे के साथ उन्होंने 24 जुलाई 2020 को वुमनियाज़ की स्थापना की इसके लिए उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया।

महिलाओं के लिए बनाया मंच

रेखा यादव जी का मानना है कि हर महिला के अंदर कोई ना कोई प्रतिभा छिपी है बस जरूरत है तो उसे बाहर निकालने की घर परिवार के साथ साथ कुछ समय महिलाओं को खुद के लिए निकालना चाहिए और वह काम करना चाहिए जिसे वह पसंद करती है वुमनियाज़ में हर हफ्ते कोई ना कोई प्रतियोगिता होती रहती है यहाँ अनेक तरीके की प्रतियोगिताए होती है जैसे सेल्फी कॉन्टेस्ट, रेंडम क्विज, किड्स सुपरस्टार,जज्बा, मैं अपनी फेवरेट हूँ एवं तंबोला इत्यादि कुछ ही समय में रेखा यादव जी ने अपने साथ 32 सौ से भी अधिक महिलाओं को जोड़ लिया।

बढ़ा रही है महिलाओं का हौसला

एक और जहां महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों की बात होती है वहीं उनको सशक्त बनाने के लिए तरह-तरह के कार्य किए जा रहे हैं जैसा रेखा यादव जी ने किया है वह महिलाओं के लिए हर हफ्ते कोई ना कोई प्रतियोगिताए करती रहती है और जीतने पर गिफ्ट और सर्टिफिकेट भी दिए जाते हैं जिससे महिलाओं का हौसला दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है और वह सब कुछ कर सकती हैं यह हौसला भी जगाया है धीरे-धीरे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है और खुद के लिए समय निकाल कर जीना सीख रही है इसमें कुछ हाउसवाइफ है तो कुछ कामकाजी महिलाएं भी। वह कहती है कि कामकाजी महिलाओं को तो फिर भी उनके काम का क्रेडिट मिल जाता है परंतु हाउसवाइफ कितना भी कुछ कर ले उनको क्रेडिट नहीं मिलता इसीलिए उनके कॉन्फिडेंट को बनाए रखने के लिए वह तरह तरह की प्रतियोगिताए करवा कर महिलाओं का हौसला बढ़ा रही है!

रेखा यादव जी कहती है यह तो बस शुरुआत है हम भी तो बहुत कुछ करना है वह आने वाले दिनों में एक मेगा इवेंट करने वाली है इसके लिए हम सब उन्हें बधाई देते हैं!

Anu Gangwal
दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए और ट्रांसलेशन कर चुकी है अनु साहित्य में विशेष रुचि रखती हैं। इनकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं तथा वेबसाइटों पर प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में फ्रीलांसर राइटर, एडिटर, प्रूफरीडर तथा ट्रांसलेटर का कार्य कर रही हैं।

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