अपने छत पर करती हैं सब्जी की खेती और उससे उगने वाली सब्जियों को अनाथ आश्रम में दान करती हैं

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कभी-कभी इन्सान अपने आप को बहुत ही अकेला समझता हैं। उसके अकेलेपन का कारण कुछ भी हो सकता है। उदहारण के लिये इन्सान अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाए या फिर किसी अपने के होते हुए भी उससे दूर रहना पड़े.. ऐसी स्थिति में इन्सान अपने आप को अकेला समझता है। मनुष्य का अकेलापन कभी-कभी उसे किसी ऐसी राह पर लेकर जाने लगता है जो सही नहीं होता है। वहीं कुछ लोग अपना शौक पूरा कर अकेलापन को दूर कर देते हैं। वह गलत रास्तों पर जाने के बजाय जीवन में कुछ नया और अच्छा करने के बारें में सोचते है और उसे पूरा करने में जुट जातें हैं।

यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसे अपने माता से दूर रहने के कारण कुछ कमी महसूस होती थी। लेकिन फिर भी उसने अपने आप को अकेलेपन के अधीन नहीं होने दिया और आज वह अपनी मेहनत के बल पर अनाथ आश्रम और जरुरतमंदो की मदद करती हैं।

आइए जानतें है उसने जरुरतमंद और अनाथ आश्रमों की मदद कैसे की।

ज्योति प्रियंका (Jyoti Priyanka) तेलंगाना (Telangana) के भद्राचलम की रहनेवाली हैं। ज्योति इंजीनियरिंग की पढ़ाई की हुईं हैं। इनकी उम्र 28 वर्ष है। इनके माता-पिता का प्रेम-विवाह हुआ था। इस वजह से इन्हें अपने पिता के परिवार वालों से प्यार-दुलार नहीं मिल सका। घर में कलेश इस तरह बढ़ गया था कि ज्योति की मां अपने पिता के घर पर ही रहती थी। इस झगड़े का सबसे अधिक असर ज्योति की मां पर ही हुआ और वह डिप्रेशन में चली गयी। झगड़े और कलेश के वजह से ज्योति को अपना बालपन अपनी बुआ के साथ उनके घर पर ही व्यतीत करना पड़ा।

ज्योति प्रियंका का कहना है कि वह 8वीं कक्षा तक अपने माता से अलग रही जिसके कारण उन्हें अपने मां का स्नेह और दुलार नहीं मिल सका। ज्योति ने बताया कि इन्हें अपने बुआ का घर हॉस्टल जैसा महसूस होता था। लेकिन पेड़-पौधों के साथ उन्हें खुशी मिलती थी। आसपास हरियाली होने से माहौल खुशनुमा हो ही जाता हैं। प्रियंका के स्कूल में ढ़ेर सारे पेड़-पौधे थे। इस कारण से प्रियंका का मन पेड़-पौधों के साथ अधिक लगता था। प्रियंका को स्कूल में बागबनी सीखने का अवसर मिला। गार्डनिंग सीखने और करने में प्रियंका का बहुत मन लगता था। वह घर पर भी अपने आप को हमेशा किसी-न-किसी काम में व्यस्त रखतीं थी।

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मां से बढकर इस दुनिया में कोई खुशी नहीं है। यदि मनुष्य के पास मां है तो दुनिया की सारी खुशियां उसके पास है। ज्योति प्रियंका (Jyoti Priyanka) भी जब नानी के घर अपनी मां के पास जाती तो वह उनके लिये सबसे अच्छा वक्त होता था। ज्योति के ननिहाल में कृषि का कार्य होता था जिससे ज्योती का मन खेत-खलिहानों में अधिक लगता था। वह खेतों में अधिक समय व्यतीत करती थी। इन्सान की तबियत ठीक नहीं होती तो वह अपना ध्यान कहीं और भी नहीं दे पाता क्योंकि जब तक इन्सान का मन स्वास्थ नहीं होगा वह किसी भी काम में या किसी भी इन्सान के पास अपना मन नहीं लगा सकता हैं। उनकी मां की तबियत स्वस्थ्य नहीं होने के कारण वह ज्योति पर ध्यान कम देती थी।

कहा जाता हैं, न.. परिवर्तन संसार का नियम है। समय हमेशा एक जैसा नहीं होता है। वह हमेशा अपनी करवटें बदलता रहता है। ज्योति प्रियंका के जीवन में भी समय ने अपना करवट बदला। इंजीनियरिंग (Engineering) के पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्योति हैदराबाद में जॉब करने लगी लेकिन उस नौकरी में उनका दिल नहीं लगता था। अगर किसी काम में मनुष्य का दिल नहीं लगता है तो वह उस काम को सही ढंग से नहीं कर पाता। ज्योति को भी समझ में आ गया कि वह अपने नौकरी से ज्यादा खुश नहीं हैं। प्रियंका ने बताया, “उनकी मां की तबियत में सुधार हुआ है लेकिन अपनी बेटी के दूर रहने से वह अभी भी डिप्रेशन से पूरी तरह ठीक नहीं हो पायी हैं। उनको कही-न-कही मेरी जरुरत है। इसलिये ज्योति प्रियंका ने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया और वर्ष 2018 में वह अपने घर वापस आ गईं।

ज्योती प्रियंका (Jyoti Priyanka) घर आने के बाद अपनी मां की अच्छी तरह से देखभाल करने लगीं। मां की देखभाल के साथ वह अपने बचपन के शौक को भी पूरा करने में लग गई। शौक जो अकेलेपन का साथी हुआ करता था। ज्योति प्रियंका ने गार्डनिंग करने का विचार किया और गार्डनिंग करना शुरु भी कर दी। ज्योति ने बागबानी की शुरुआत सबसे पहले फूलों से किया। सबसे पहले इन्होंने 20 गमलो में फूल लगाएं। धीरे-धीरे उनके यहां 100 से अधिक पेड़-पौधें हो गये। ज्योति फूलों से गार्डनिंग की शुरुआत करने कर बाद वह साग-सब्जियों की भी बागबानी करना शुरु कर दी। साग-सब्ज़ियों में वह गोभी, मिर्च, बैंगन, पेठा, आलू, करेला, शहजन, तरोई और कद्दू आदि उगाने लगी।

गार्डनिंग के पॉटिंग मिक्स को बनाने के लिये वह मिट्टी, जैविक खाद और वार्मी कंपोस्ट का उपयोग करती हैं। वह पेड़-पौधों का एकदम अच्छी तरह से ख्याल रखतीं हैं। उनका मुख्य काम पौधों में पानी देना, समय-समय पर पौधों में लगने वाले कीटो को देखना है। इसके साथ ही पौधों को हमेशा पोषक मिलता रहें इसका खास ख्याल रखतीं थी। इस काम में ज्योति के पैरंट्स ज्योति की सहायता करतें हैं।

ज्योती का कहना है, “उनके घर में पेड़-पौधों के रहने से हमेशा सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। उनकी मां की तबियत में पहले से काफी हद तक सुधार हुआ है। उनकी मां पहले की तुलना में अब बेहतर महसूस करती हैं।” ज्योति का यह भी मानना है कि अधिक पेड़-पौधों की देखभाल करने से शारिरीक थकावट का अनुभव होता है। गार्डनिंग के कारण उनके घर में खुशियां फैल गईं हैं।

ज्योति अपने पिता पर बहुत गर्व महसूस करती है। वह कहतीं हैं कि पेड़-पौधों को बढ़ने के लिये जैसे सुर्य के प्रकाश की ज़रुरत होती है वैसे ही वह आज मैं जो कुछ भी हूं, वह मेरे पिता के ही परिश्रम का फल हैं। ज्योति के गार्डेन में काफी ज्यादा फूल और सब्जियां की उपज होती है। ज्योति ने बागबानी के शुरुआती 8 माह तक गार्डन में उगायें जाने वाले सब्जियों को शहर के 3 अनाथ आश्रमों में दान में दिया। अपने गार्डन से प्राप्त होने वाले फूलों और साग-सब्जियों को वह अपने आस-पड़ोस के लोगों में भी बांटती हैं। सब्जियों के सीजन में ज्योति प्रत्येक सप्ताह करीब 3Kg सब्जियों को दान में देती हैं। ज्योति को जरुरतमंदो की मदद करना अच्छा लगता है। वह कहतीं हैं कि जरुरतमंदो की सहायता करना बहुत ही अच्छा और नेक काम है। इन्सान को हमेशा एक-दूसरें की मदद करनी चाहिए। ज्योती लॉकडाउन में भी जरुरतमंदो की मदद की हैं। गरीब और ऐसे लोग जिन्हें आवश्यकता हो वैसे मनुष्यों को अपने गार्डेन की सब्जियों को बांट कर उनकी मदद करती हैं।

वर्तमान में ज्योति प्रियंका (Jyoti Priyanka) के घर पर 800 से अधिक पेड़-पौधें है। इन पेड़-पौधों से ज्योति को अधिक मात्रा में फूल और साग-सब्जियां प्राप्त होती है और इससे वह लोगों की मदद भी करती हैं। ज्योति का लक्ष्य हैं कि वह कुछ एकड़ जमीन पर किसानी कर दूसरे लोगों को भी उससे रोजगार दे। ताकी सभी को मदद मिल सकें। ज्योति का मानना है, “जरुरतमंदो को हमेशा सहायता करनी चाहिए।”

The Logically ज्योति प्रियंका को लोगों की सहायता करने और साथ-साथ पर्यावरण को स्वच्छ एवं हरा-भरा रखने के लिये नमन करता हैं।

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