Saturday, July 31, 2021

मात्र 12 वर्ष की उम्र में हो गई थी शादी ,200 की नौकरी से की शुरुआत, आज 500 करोड़ की कम्पनी खड़ी कर चुकी हैं

हमारे समाज में वैसे तो पहले की अपेक्षा बहुत सारे परिवर्तन हो चुकें हैं लेकिन अगर एक भी मौका मिले तो वह औरतों की निंदा करने से अभी भी बाज नहीं आता। अभी भी भारतीय संस्कृति में बहुत सारी रुढ़ियां हैं। अगर किसी औरत को आगे बढ़ना है तो इन परंपराओं को तोड़कर ही आगे बढ़ पाएंगी। अगर वह आगे बढ़ गई तो उसे बहुत से नाम से बुलाया जायेगा।

आज की हमारी यह कहानी ऐसी महिला की है, जिन्हें लोग कुरूप, जहर की पुड़िया, गंदी और गधे की औलाद का नाम दिया। ससुराल वालों ने अत्याचार किया। लेकिन आज उन्होंने उन सभी लोगों के मुंह पर तमाचा मारा है।कभी यह 200 रुपये की नौकरी करती थी, लेकिन इनकी गिनती आज मिलिनेयर में होती है। इन्हें हमारे देश की स्लमडॉग मिलिनियर कहा जा सकता है।

12 वर्ष की उम्र में हुई कल्पना की शादी, आत्महत्या की कोशिश भी की

कल्पना सरोज (Kalpana Saroj) का जन्मस्थल अकोला (Akola) है जो Maharashtra का एक गांव है। इनका जन्म वर्ष 1961 है। यह एक दलित परिवार से हैं। इनके कास्ट के कारण इन्हें स्कूल से बाहर निकाल दिया गया। इनका बाल विवाह (Child Marriage) हुआ। यह मात्र 12 वर्ष की थी और लड़का 22 वर्ष का। शादी के बाद इनके साथ बहुत ही गलत व्यवहार हुआ। इनके ससुराल वालों और इनके पति ने इन पर अत्याचार किया। जब उनके पिता को यह मालूम हुआ कि उनकी बेटी अपने ससुराल में खुश नहीं है, उसके घर वाले उसके ऊपर अत्यचार करतें हैं तो उन्होंने कल्पना को अपने पास बुला लिया। लेकिन पता नहीं क्यों हमारे घर वालों को अपने बेटी को रखने में जितनी परेशानी नहीं होती उससे ज़्यादा हमारे समाज के लोगों को होती है। ऐसा ही कल्पना के साथ हुआ। समाज ने इन्हें पाखण्डी पत्नी का नाम दिया। खुद सोंचिये अगर कोई आपको गलत बात बोले तो अच्छा लगेगा?? वह इस बात से सदमें में चली गईं और आत्महत्या करने का प्रयास की। प्रयास क्या इन्होंने चूहे मारने वाली दवा तक खा लिया था, लेकिन सौभाग्यवश बच गईं।


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शुरुआत हुई नौकरी की

इन्होंने पढ़ने का निश्चय किया। वह पढ़ाई के महत्व को जानती थी लेकिन ज्यादा दिन पढ़ाई छूटने के कारण इन्हें पढ़ाई में मन नहीं लगा और इन्होंने पढ़ाई छोड़ दिया। मुंबई गईं नौकरी के लिए लेकिन वह इस कार्य में सफल नहीं हुई। फिर यह कपड़ों के कारखानों में नौकरी करने लगीं। यह खुद का व्यापार करना चाहती थी इसलिए इन्होंने गवर्मेंट से लोन लिया और सिलाई का व्यापार शुरू की। इनका यह कार्य सफल हुआ। इन्होंने गरीबी की मार झेली थी। इसलिए यह दलितों की गरीबों को दूर करना चाहती थी, इसलिए इस कार्य को अपनाई।

फिर से की शादी

22 वर्ष की उम्र में यह मुंबई आईं और 1980 में Samir Saroj से शादी कर ली। लेकिन 1989 में इनके पति का इंतकाल हो गया और यह थोड़ी अकेली हो गई। यह दो बच्चों की मां थी और इन्होंने अपने बच्चों के सहारे के लिए विरासत में मिले व्यापार जो स्टील-कबर्ड बनाने का था, उसे संभाला। इन्होंने अपनी मेहनत से इस कंपनी को एक नया जीवनदान दिया। राजनीति में कार्य किया और अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत की। फिर आगे चलकर इन्होंने स्टील और शक्कर के कारखानों को खरीदा। इनकी मेहनत रंग लाई और उनका व्यपार निकल पड़ा।

Kamani Tubes Company

जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष उस टाइम आया जब इनकी “कल्पना सरोज एंड एसोसिएट्स” कंपनी की रफ़्तार धीमी पड़ गई। यह दिन वर्ष 2006 और मार्च माह था। इन्होंने इसे संभालने का जिम्मा अपने ऊपर लिया और अपनी Kamani Tubes Company को बेहतरीन बनाया। इन्होंने सुस्त परी कंपनी में जान डाल दी और इसे लाभदायक कंपनी में तब्दील कर दिया। यह कम्पनी 5 सौ करोड़ से भी अधिक है।

मिला है पद्मश्री सम्मान

कल्पना विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल भी खोली हैं और लाइब्रेरी भी। यह जरूरतमंद लोगों की मदद करती है चाहे वह किसी भी रूप में हो। इनकी उदारता के लिए 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वैसे तो यह कम पढ़ी लिखी हैं, लेकिन यह ग्रेजुएट और एमबीए वालों को भी जॉब दे रही हैr। गवर्नमेंट ने इन्हें “भारतीय महिला बैंक” के “बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स” में मौजूद किया है।

अपनी सफलता से सबको यह दिखाने के लिए कि अगर कोई भी व्यक्ति चाहे तो मेहनत कर किसी भी पद को हासिल कर सकता है। The Logically इन्हें सलाम करता है।