Wednesday, October 21, 2020

बिहार की किसान चाची अब घरेलू उत्पादों से लोगों को बना रही हैं आत्मनिर्भर, इन्हें पद्मश्री से नवाजा जा चुका है

अपने आप को गांव की मिट्टी से जोड़े रखना और उसके लिए बेहतर कार्य करने की भावना हमारे देश की प्रधानता है। हमारे देश मे किसानों के जीवन-यापन का जरिया खेती है। आज के समय में कुछ लोग शौक से भी खेती कर रहे हैं। वह अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ जैविक खेती कर रहे हैं और अधिक मात्रा में लाभ भी कमा रहें हैं। महिलाएं भी इस क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। देश की कई महिलाएं टेरेस गार्डन पर खेती कर मिसाल कायम कर रही है।

आज की यह कहानी बिहार की एक ऐसी महिला की है जिसे शुरुआती दौर में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इन्हें घरवालों ने घर से बाहर कदम निकलने के लिए बहुत कुछ सुनाया। फिर भी इन्होंने कभी हार नहीं मानी। यह अपने उत्पादों को लोगों के घर-घर साइकिल चलाकर बेचा करती थी। इन्हें किसान चाची के नाम से भी जानते हैं। इस किसान चाची को कई पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इनकी तारीफ मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, और अमिताभ बच्चन ने भी की है।

तो आईये पढ़ते हैं बिहार की किसान चाची के बारे में और जानते हैं कैसे इन्होअपनी जिंदगी में सफलता तक का सफर तय किया है। किसान चाची से BJP के अध्यक्ष J. P नड्डा इस सप्ताह मिलने आयेंगे। यह इनके अचार के व्यपार के बारे में संवाद करने आएंगे। किसान चाची की कृषक महिला के तौर पर सफलता के रूप में गणना हो रही है।

किसान चाची का परिचय

राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) की जैविक खेती, अचार (pickles) और मुरब्बा बनाने से अलग ही पहचान बनी है। इन्हें सब किसान चाची कह कर बुलाते हैं। किसान चाची बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) ज़िलें के एक गांव आनंदपुर (Aanandpur) से संबंध रखती हैं। भले ही आज यह सभी महिलाओं के लिए रॉल मॉडल हैं लेकिन इनका जीवन बहुत ही कठिनाइयों से व्यतीत हुआ है। एक खेतिहर परिवार में शादी होने के कारण इनके जीवन यापन का माध्यम खेती ही था। जब यह खेती करने के लिए घर से बाहर निकली तो इन्हें बहुत सारी ग़लत बातों को सुनना पड़ा। इनके पास खेती के साथ अचार बनाने का भी हुनर है। इन्होंने अचार बनाना शुरू किया और साइकिल चलाकर उसे गांवों में घूमकर बेचना शुरू की।

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होता है अचार का निर्यात

किसान चाची किसी की बात नहीं सुनी और अपने कार्य में लगी रही। इस कारण इनके अचार बनाने का कार्य सक्सेसफुल हुआ। इनका उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री होता है। इन्होंने अपने इस व्यापार को बहुत ही नया तरीके से संभाला है। 65 वर्षिय राजकुमारी देवी की गणना सफल महिला किसान में हो रही है।

शुरू की खेती करना

किसान चाची जैविक खेती करनी शुरू की। जिसमे इनके पति ने भी सहयोग किया। शुरुआती दौर में इन्होंने “पूसा कृषि विश्वविद्यालय” से बहुत सारी जानकारियां हासिल की। फिर उन्होंने सोचा कि मैं खेतों में गेहूं और धान ना लगाकर, ओल एवं पपीता लगाऊंगी। हालांकि किसान चाची इस कार्य में सफल नहीं हुई। इसलिए उन्होंने अचार और मुरब्बा बनाना प्रारंभ किया।

अचार का टेस्ट

किसान चाची इन अचारो को अपने हाथों से बनाती है जिस कारण इसका स्वाद बहुत ही अच्छा होता है। वैसे तो अचार का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। किसान चाची 20 से अधिक प्रकार के आचार एवं मुरब्बा बनाया करती है। साथ ही इनका ब्रांडिंग भी वह स्वयं करती हैं। अचार तो बहुत सारी कंपनियां बनाती हैं लेकिन मशीनों द्वारा बनाएं गयें आचारों में वह स्वाद कहा जो हाथ से बने हुए अचार में हैं।

250 से अधिक महिलाओं को जोड़ा है रोजगार से

किसान चाची गांव में घूमकर लोगों को यह बताती हैं कि खेती कैसे करनी है और कैसे मुनाफा कमाना है। इन्होंने 40 से ज्यादा स्वयं सहायता समुदाय का निर्माण किया हैं। सैकड़ो महिलाओं को अचार तैयार करने के विषय जानकारी दी है। इसके साथ 250 से भी ज्यादा महिलाओं को रोजगार से भी जोड़ी है। वे सभी औरतें इनसे जुड़कर मुरब्बा और आचार बना रहीं हैं।

पद्मश्री से हुईं हैं सम्मानित

राजकुमारी देवी को 2006 में किसान अवॉर्ड मिला। तब से इनका यह नाम ‘किसान चाची’ प्रचलित हुआ और अब इन्हें किसान चाची के नाम से ही जानते हैं। इन्हें KBC 2015-16 में अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने बुलाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।

किसान चाची ने बताया कि अगर पति का साथ हर महिला को मिले तो वह किसी भी काम को कर सकती हैं। इससे उनका हौसला बना रहता है। लोगों की बातों को अनसुना कर अपने कार्य मे लगे रहने के लिए The Logically किसान चाची उर्फ राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) की सराहना करता है।

Khusboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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